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कार्ति का कारनामा! चिदंबरम के बेटे से जुड़ी कंपनी ने ऐसे किए करोड़ों के वारे-न्यारे

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कार्ति का कारनामा! चिदंबरम के बेटे से जुड़ी कंपनी ने ऐसे किए करोड़ों के वारे-न्यारे

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति की फाइल फोटो

नई दिल्ली:

पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ती चिंदबरम द्वारा कथित रूप से की गई मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच में दुनिया की जानी मानी वेंचर कैपिटल फर्म सिकोइया कैपिटल का नाम जुड़ गया है।

तीन करोड़ के शेयर 22.5 करोड़ रुपये में बिके
एनडीटीवी को प्राप्त दस्तावेज़ों से पता चलता है कि वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामले देखने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्ति की कंपनी और सिकोइया के बीच हुए एक लेनदेन की जांच कर रहा है, जिसमें सिकोइया ने 22.5 करोड़ में जो शेयर खरीदे थे, दो साल पहले उनकी कीमत महज तीन करोड़ रुपये थी। तमिलनाडु सहित देश के कई हिस्सों में क्लिनिक चलाने वाले 'वासन हेल्थ केयर' के शेयर में साल 2010 में हुआ यह अप्रत्याशित उछाल एक ऐसी कंपनी की बदौलत था, जिस पर परोक्ष रूप से कार्ति चिदंबरम का ही मालिकाना हक है।

शेयर खरीद से पहले कंपनी का मूल्यांकन भी नहीं
इस महीने की शुरुआत में ईडी ने सिकोइया इंडिया के बेंगलुरु स्थित दफ्तर पर छापे मारे थे। ईडी ने तब कंपनी के प्रबंध निदेशक वीटी भारद्वाज से भी पूछताछ की थी, जिसमें कथित रूप से उन्होंने बताया था कि वासन हेल्थ केयर का कोई मूल्यांकन रिपोर्ट नहीं की गई थी, जिससे कि उसके शेयरों की असल कीमत का पता चल सके।


वहीं प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि सिकोइया द्वारा शेयरों के लिए चुकाई गई यह कीमत उसके अपने ऑडिटर सुरेश एंड कंपनी की अनुमान से भी मेल नहीं खाते हैं। ईडी के अधिकारी कहते हैं, जांच में पता चला कि वासन के एक शेयर का मूल्य 110 रुपये था, लेकिन एक हफ्ते बाद ही इस वेंचर कैपिटल फर्म ने भारी भरकम प्रीमियम पर ये शेयर खरीद लिए।

शेयरों में हुए मुनाफे से दुनिया भर में की खरीदारी
ईडी के दावों के मुताबिक, इस सौदे से हुए भारी मुनाफे से कार्ति की अप्रत्यक्ष मालिकाना हक वाली कंपनी एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसंल्टिंग सर्विसेज़ की सिंगापुर शाखा दुनिया भर में खरीदारी के लिए निकल पड़ी।

एजेंसी ने सिंगापुर के अधिकारियों को चिट्ठी लिखकर कंपनी का विवरण मांगा है। इसके साथ ही एजेंसी ने फ्रांस, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका सहित 12 दूसरे देशों को भी चिट्ठी लिखी है, जिसमें कि एडवांटेज सिंगापुर का कारोबारी लेन-देन था।

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कार्ति की सफाई और उससे उठते सवाल
हालांकि कार्ति का कहना है कि उन्होंने 2012 में ही एडवाटेंज का मालिकाना हक छोड़ दिया था और अब उनका इससे कोई लेना देना नहीं। हालांकि जांचकर्ताओं का कहना है कि छानबीन में उन्हें चार वसियतें मिली हैं, जो कि एडवाटेंज के मौजूदा मालिकों से जुड़ी हैं। एनडीटीवी ने भी उन दस्तावेज़ों का मुआयना किया है और उससे पता चलता है कि हर एक मालिक ने एडवांटेज में अपने हिस्से के शेयर कार्ति की बेटी अदिति नलिनी चिदंबरम के नाम कर रखे हैं। इस पर चिदंबरम के राजनीतिक विरोधी और जांचकर्ता कहते हैं कि इससे साफ है कि एडवांटेज के मालिक चिदंबरम परिवार के ही छद्म रूप की तरह है और कार्ति चिदंबरम ने ही ये चारों वसियतें बनाई हैं।

वहीं एडवांटेज से जुड़े सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि सिकोइया ने वासन के शेयरों का मूल्यांकन किसी 'खास वजह' से ही नहीं किया होगा। उन्होंन साथ ही बताया कि ये 'विवादास्पद वसियतें' ऐसे लोगों ने बनाए हैं, जो कि 'दशकों से कार्ति चिदंबरम के करीब दोस्त' रहे हैं और उन वसीयतों में लिखी बातों पर किसी तरह की 'अटकल, बहस या चर्चा' की गुंजाइस नहीं।



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