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भारत, चीन अगले दशक में वैश्विक चाय मांग, उत्पादन की करेंगे अगुवाई

संगठन ने जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिये तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया.

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भारत, चीन अगले दशक में वैश्विक चाय मांग, उत्पादन की करेंगे अगुवाई

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली: भारत और चीन अगले दशक में वैश्विक चाय उत्पादन तथा खपत में अगुवा रहेंगे. संयुक्त राष्ट्र निकाय खाद्य एवं कृषि संगटन (एफएओ) ने यह बात कही. संगठन ने जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिये तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया. एफएओ ने ताजी रिपोर्ट में कहा कि दुनिया में काली चाय का उत्पादन 2027 तक बढ़कर 44 लाख टन हो जाने का अनुमान है जो 2017 में 33.3 लाख टन था. वहीं ‘ ग्रीन टी ’ का उत्पादन आलोच्य वर्ष में 36 लाख टन हो जाने का अनुमान है जो पिछले साल 17.7 लाख टन था. 

‘ग्रीन टी’ का उत्पादन अगले दशक में 7.5 प्रतिशत से बढ़ेगा जबकि काली चाय में केवल 2.2 प्रतिशत की वृद्धि होगी. रिपोर्ट के मुताबिक काली चाय की वैश्विक खपत 2017 में 41.6 लाख टन रहने का अनुमान है जो 2017 में 32.9 लाख टन था.  एफएओ ने कहा , ‘‘ वैश्विक चाय खपत और उत्पादन में अगले दशक में वृद्धि का अनुमान है. इसका कारण विकासशील और उभरते देशों में मजबूत मांग है. ’’ 

रिपोर्ट के मुताबिक इससे चाय उत्पादक देशों में ग्रामीण आय के नये अवसर सृजित होंगे और खाद्य सुरक्षा में सुधार होगा.  दुनिया के दूसरे सबसे बड़ा उत्पादक भारत में काली चाय का उत्पादन 2027 तक 16.1 लाख टन रहने का अनुमान है जो 2017 में 12.6 लाख टन था. 

दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक चीन में ‘ ग्रीन टी ’ का उत्पादन 2027 तक 33.1 लाख टन होने का अनुमान है जो 2017 में 15.2 लाख टन था. जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव के बारे में संयुक्त राष्ट्र निकाय ने चेतावनी दी है , ‘‘ पर्यावरण को लेकर चाय की खेती काफी संवेदशील हैं. चाय का उत्पादन केवल विशेष परिस्थतियों वाली कृषि पारिस्थिति स्थिति में हो सकता है और इसीलिए काफी कम देशों में इसका उत्पादन होता है जलवायु परिवर्तन से काफी प्रभावित होंगे. ’’ 

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रिपोर्ट के अनुसार तापमान और बारिश के प्रतिरूप में बदलाव से उत्पादन पहले ही प्रभावित है. इसके अलावा चाय उत्पादन की गुणवत्ता तथा कीमत , कम आय एवं ग्रामीण आजीविका को खतरा है. एफएओ ने कहा कि जलवायु परिवर्तन में ये बदलाव आगे ओर तेज होने का अनुमान है और इसके लिये उपाय करने का आह्वान किया. 

खपत के बारे में एफओ ने कहा कि चीन , भारत और अन्य उभरते देशों में इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है. इसका कारण उच्च आय तथा इसमें हर्बल चाय जैसे उत्पादों को जोड़कर इसे विविध बनाने का प्रयास है.


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