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भारत 7.8 फीसदी की दर से विकास करेगा : विश्व बैंक

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भारत 7.8 फीसदी की दर से विकास करेगा : विश्व बैंक
संयुक्त राष्ट्र: विश्व बैंक द्वारा गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यस्था नए साल में 7.8 फीसदी की रफ्तार से बढ़ती रहेगी जो कि दुनिया में सबसे अधिक होगी। इससे पहले विश्व बैंक ने जून में भारत के विकास दर का अनुमान 7.9 फीसदी लगाया था। वहीं, विश्व बैंक द्वारा जारी वैश्विक आर्थिक संभावना रिपोर्ट में वैश्विक विकास दर में आधा फीसदी की कटौती करते हुए 2016 में 2.9 फीसदी होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि पिछले साल जून में इसके 3.3 फीसदी की दर से बढ़ने की बात कही गई थी।

दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में चीन की विकास दर का अनुमान 2016 में 6.7 फीसदी और 2017 में 6.5 फीसदी लगाया गया है। वहीं अमेरिका की अर्थव्यवस्था का इस साल 2.7 फीसदी की दर से तो अगले साल 2.4 फीसदी की दर से और 2018 में 2.2 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है।

वहीं, भारत की आर्थिक रफ्तार 2017 में 7.9 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है, जबकि 2018 के लिए पहले के पूर्वानुमान 8 फीसदी से घटाकर 7.9 फीसदी की बात कही गई है। इसका कारण भारत में सुधारों की रफ्तार में कमी होना बताया गया है।

इस रिपोर्ट में भारत में सुधारों पर आशंका जताते हुए कहा गया है कि राज्य सभा में सत्ताधारी पार्टी का बहुमत नहीं होने के कारण सरकार अपने विधायी एजेंडे को लागू नहीं कर पा रही है। जीएसटी विधेयक पारित नहीं होने के कारण सरकार बुनियादी संरचनाओं पर खर्च के लिए ज्यादा धन नहीं जुटा सकेगी। वहीं, घरेलू बाजारों में भी तेजी के बजाए यथास्थिति बनी रहेगी।

इस रिपोर्ट में औद्योगिक क्षेत्र में जारी मंदी का भी उल्लेख किया गया है। सेवा क्षेत्र और उत्पादन क्षेत्र सूचकांक दिसंबर 2014 में 54.5 फीसदी था जो पिछले महीने घटकर 49.15 फीसदी पर आ गया है।

वहीं, इस रिपोर्ट में कुछ अच्छी बातें भी कही गई है। खासतौर से सरकार द्वारा आधारभूत संरचनाओं पर खर्च बढ़ाने से निवेश को गति मिलने की बात कही गई है। यह भी कहा गया है कि इससे अमेरिका द्वारा अपनी मौद्रिक नीति बदलने खासतौर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का भारत में निवेश पर पड़ने वाले असर को कम करने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है, "इस तरह के निवेश से मध्यम अवधि में विकास को रफ्तार मिलती है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल और गैस की कम होती कीमतें और घरेलू बाजार में ऊर्जा सुधारों से भारतीय कंपनियों की ऊर्जा लागत में कमी आने की बात कही गई है।"

इसके अलावा इस रिपोर्ट में भारत के राजकोषीय घाटे में कमी आने, चालू खाते के घाटे में कमी आने, एफडीआई निवेश का रुख सकारात्मक होने और हाल में 7वें वेतन आयोग द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन वृद्धि को सकारात्मक बताते हुए उससे अर्थव्यवस्था में तेजी आने की बात कही गई है।


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