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भारतीय वायुसेना की बोली से अमेरिका निराश

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खास बातें

  1. अमेरिका की दोनों कंपनियां भारत को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने की अरबों डॉलर की बोली से बाहर हो गईं और अमेरिका ने इस पर निराशा जताई है।
नई दिल्ली:

अमेरिका की दोनों कंपनियां भारत को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने की अरबों डॉलर की बोली से बाहर हो गईं और अमेरिका ने इस पर निराशा जताई है। भारतीय वायुसेना के लिए 126 मध्यम बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों (एम-एमआरसीए) की आपूर्ति की खातिर बोइंग के एफ-18 और लाकहीड मार्टिन के एफ-16 विमान प्रक्रिया में थे। लेकिन गहन परीक्षण के बाद रक्षा मंत्रालय ने दोनों लड़ाकू विमानों पर विचार नहीं किया। उसने रूस के मिग 35 और स्वीडन के साब ग्रिपन पर भी विचार नहीं किया। अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय ने यूरोपियन यूरोफाइटर और फ्रेंच डसाल्ट रफेल को आगे विचार के लिए चुना है। दोनों कंपनियों से सौदे के लिए उनकी निविदाओं की वैधता 31 दिसंबर तक बढ़ाने को कहा गया है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि दोनों कंपनियों यूरोपियन यूरोफाइटर और फ्रेंच डसाल्ट रफेल से कहा गया है कि वे अपनी व्यावसायिक निविदाओं की वैधता को 31 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दें। उन्होंने बताया कि शेष चार कंपनियों अमेरिकी बोइंग, लॉकहीड मार्टिन, रूसी मिग-35 और स्वीडन की साब ग्रिपेन को उनकी निविदाएं खारिज किए जाने के बारे में बुधवार को जानकारी दे दी गई। कंपनियों को बता दिया गया कि परीक्षणों के विभिन्न पहलुओं पर उनके विमानों में क्या कमियां रहीं। अधिकारियों ने कहा कि इस सौदे को अगले साल 31 मार्च को खत्म होने वाले चालू वित्त वर्ष के अंत तक अंतिम रूप मिल जाने की उम्मीद है। इस बीच सौदे को हासिल नहीं कर पाने के बाद अमेरिका ने गुरुवार को कहा कि वह इससे बेहद निराश है लेकिन वह खरीद प्रक्रिया का सम्मान करता है। अमेरिकी दूतावास ने एक वक्तव्य में कहा कि उसे कल सूचित किया गया कि अमेरिकी विमानों को रक्षा मंत्रालय की खरीद प्रक्रिया के लिए नहीं चुना गया है। भारत में अमेरिका के राजदूत टिमोथी रोमर ने कहा हम भारत सरकार से मिले दस्तावेजों की समीक्षा कर रहे हैं और खरीद प्रक्रिया के प्रति सम्मान रखते हैं। हालांकि, हम इस खबर से बेहद निराश हैं। रोमर ने कहा कि भारत सरकार के उच्चतम स्तर से उन्हें यह आश्वासन दिया गया था कि लड़ाकू विमानों के लिए खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहेगी। इस फैसले पर बोइंग ने प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि हम इस नतीजे से दुखी हैं। कंपनी ने कहा कि वह ब्यौरे की समीक्षा करेगी और भारतीय वायुसेना पर होने वाले असर को ध्यान में रखते हुए अपने संभावित विकल्पों पर कोई फैसला करेगी।

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