'दरों में वृद्धि से आर्थिक वृद्धि होगी प्रभावित'

खास बातें

  • उद्योग जगत ने आशंका जताई कि रिजर्व बैंक की प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि के कदम से औद्योगिक वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
नई दिल्ली:

उद्योग जगत ने आशंका जताई कि रिजर्व बैंक की प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि के कदम से औद्योगिक वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ेगा। औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि दर नवंबर में घटकर 2.7 फीसद रह गई। उद्योग मंडल फिक्की के महासचिव अमित मित्रा ने कहा, हम औद्योगिक वृद्धि दर के नए आंकड़े का इंतजार करेंगे और साथ ही फिक्की रिजर्व बैंक से औद्योगिक वृद्धि को देखते हुए ब्याज दरों के निर्धारण के मामले में खुली सोच से कदम उठाने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि औद्योगिक वृद्धि दर में आगे किसी प्रकार की गिरावट की स्थिति में इस क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा आर्थिक वृद्धि के लिए ब्याज दरों में कमी की जानी चाहिए। रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति पर शिकंजा कसने के लिए रेपो और रिवर्स रेपो दोनों में 0.25 फीसद की वृद्धि की। साथ ही ब्याज दर में आगे और वृद्धि का संकेत दिया है। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए 2010 में छह बार प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि की। लेकिन इसके बावजूद दिसंबर महीने में मुद्रास्फीति बढ़कर 8.43 फीसद हो गई जो इससे पूर्व माह नवंबर में 7.48 फीसद थी। उद्योग मंडल सीआईआई ने भी कहा कि रिजर्व बैंक लगातार ब्याज दरों में वृद्धि करता जा रहा है जिसका निवेश गति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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