महंगाई रोकने में रिजर्व बैंक की नीतियां निष्प्रभावी

खास बातें

  • भारतीय उद्योग जगत ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति खाद्य वस्तुओं की बढ़ती महंगाई पर काबू पाने में एक निष्प्रभावी औजार बनकर रह गई है।
नई दिल्ली:

भारतीय उद्योग जगत ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति खाद्य वस्तुओं की बढ़ती महंगाई पर काबू पाने में एक निष्प्रभावी औजार बनकर रह गई है। उद्योग मंडल फिक्की के महासचिव अमित मित्रा ने कहा, खाद्य वस्तुओं की कीमतें एक बार फिर चढ़ गई हैं और इससे पता चलता है कि मौद्रिक नीति खाद्य वस्तुओं की महंगाई पर काबू पाने में एक निष्प्रभावी हथियार बन गई है। मित्रा ने कहा, फल, सब्जियों, दूध और मीट जैसी खाद्य, वस्तुओं की मांग बढ़ रही है और जब तक उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं की जाती और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर नहीं किया जाता, कीमतों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकेगा। इसी तरह, पीएचडी चैंबर ने कहा कि कीमतों में उतार-चढ़ाव पर अंकुश और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के जरिए बढ़ती कीमतों पर बेहतर ढंग से काबू पाया जा सकता है। एक अन्य उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि बढ़ती कीमतों के चलते रिजर्व बैंक के पास प्रमुख नीतिगत दरें बढ़ाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं रह जाएगा। उल्लेखनीय है कि 25 दिसंबर को समाप्त हुए सप्ताह में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति बढ़कर एक साल के उच्च स्तर 18.32 प्रतिशत पर पहुंच गई।

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