NDTV Khabar

मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी की आरकॉम सबसे पहले हुई Jio इफेक्ट का शिकार

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी की आरकॉम सबसे पहले हुई Jio इफेक्ट का शिकार

रिलायंस जियो के लॉन्च होने के बाद टेलीकॉम सेक्टर में विलय का दौर शुरू हो गया है...

मुंबई:

जियो ने भारत की टेलीकॉम इंडस्ट्री में भूचाल ला दिया है. भारत के टेलीकॉम सेक्टर में विलय का दौर शुरू हो गया है. 2010 तक भारत के टेलीकॉम सेक्टर में दर्जनभर कंपनियां ग्राहकों के लिए संघर्षरत थी लेकिन अब उनकी संख्या घटकर आधी रह गई है और इनकी संख्या घटकर चार होने वाली है. नार्वे की बहुराष्ट्रीय कंपनी नार्वे ने भी भारत से अपना कारोबार समेट लिया है. जानकारों का कहना है कि जैसे-जैसे प्राइस वॉर बढ़ेगा, अन्य कंपनियां भी गायब होंगी. छोटी कंपनियों को अपना कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है और वह इस कारोबार से बाहर निकलने का विकल्प तलाश रही हैं.  

रिलायंस जियो द्वारा 4जी नेटवर्क के जरिये सस्ता डेटा प्लान और आजीवन फ्री वॉइस कॉल की सुविधा देने से अन्य कंपनियों को बाजार में बने रहने के लिए अपने टैरिफ में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. भारत का टेलीकॉम सेक्टर इस वर्ष 37 अरब डॉलर का रहा. जियो के आ जाने से कई कंपनियों के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए है. आइडिया और वोडाफोन भी विलय का रास्ता तलाश रहे हैं. जियो ने पहले छह महीने में 100 मिलियन ग्राहक जोड़ लिए हैं. टेलीनॉर ने फरवरी माह मे घोषणा की थी कि उसके भारतीय परिचालन का जिम्मा अब भारती एयरटेल संभालेगी. इस डील से एयरटेल के 40 मिलियन ग्राहक बढ़ जाएंगे और उसका स्पेक्ट्रम कवरेज भी बढ़ जाएगा.
 
हालांकि एयरटेल की पोजिशन भी दांव पर है क्योंकि वोडाफोन और आइडिया में विलय की बात चल रही है. वोडाफोन ने जनवरी में घोषणा की थी कि उसकी आइडिया के साथ विलय को लेकर बातचीत चल रही है.  जानकारों का कहना है कि अगर विलय पूर्ण हो गया तो वोडाफोन-आइडिया के पास वित्त वर्ष 2019-20 तक बाजार की कुल 43 फीसदी हिस्सेदारी होगी. एयरटेल के पास 33 जबकि जियो के पास 13 फीसदी हिस्सेदारी होगी.

टिप्पणियां

उद्योगपति अनिल अंबानी की अगुवाई वाली आरकॉम और एयरसेल ने 14 सितंबर, 2016 को अपने वायरलेस परिचालन के विलय की घोषणा की थी. ऑरकॉम ने जियो के लॉन्च होने के पंद्रह दिन के भीतर एयरसेल से विलय कर लिया था.  इससे एक नई कंपनी का गठन होगा, जिसकी परिसंपत्तियां 65,000 करोड़ रुपये की होगी. नई कंपनी में आरकॉम और मैक्सिस कम्युनिकेशंस बिरहाद (एमसीबी) की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी होगी और दोनों ही कंपनियों का नई कंपनी बोर्ड और समितियों में समान प्रतिनिधित्व होगा. इस विलय से जहां 2017 के अंत तक आरकॉम के कर्ज में 20,000 करोड़ रुपये तक की कमी आएगी, वहीं, एयरसेल का कर्ज 4,000 करोड़ रुपये तक कम हो जाएगा.   


खबरों के मुताबिक, टाटा ग्रुप की टेली सर्विस को भी इस नई कंपनी में विलय की चर्चा है. बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलय की भी चर्चाएं हैं. कुल मिलाकर आगे आने वाले समय में भारती एयरटेल, जियो, वोडाफोन-आइडिया और आरकॉम-एयरसेल जैसी चार टेलीकॉम कंपनियां ही बची रह पाएंगी.
 
उधर, रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) को अपने वायरलेस खंड के एयरसेल में प्रस्तावित विलय के लिए सेबी, बीएसई और एनएसई की मंजूरी मिल गई है. कंपनी ने बुधवार को यह जानकारी  दी. कंपनी ने एक बयान में कहा, "रिलायंस कम्यूनिकेशन को अपने वायरलेस खंड के एयरसेल और डिशनेट वायरलेस लि. में प्रस्तावित विलय को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), बीएसई लि. और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) की मंजूरी मिल गई है." बयान में आगे कहा गया, "रिलायंस कम्युनिकेशन लि. ने राष्ट्रीय कंपनी कानून प्राधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई शाखा के पास भी मंजूरी के लिए आवेदन भेजा है. इस प्रस्तावित सौदे को अन्य जरूरी मंजूरी की भी जरूरत है."



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement