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दिल्ली मेट्रो को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं : डीएएमपीईएल को कर्ज के ब्याज के तौर पर 60 करोड़ रुपये अदा करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और PSU को नसीहत देते हुए कहा कि बिना मतलब कानूनी मामलों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए. 

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दिल्ली मेट्रो को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं : डीएएमपीईएल को कर्ज के ब्याज के तौर पर 60 करोड़ रुपये अदा करने का आदेश

दिल्ली मेट्रो को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं.. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने DMRC को एयरपोर्ट मैट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमपीईएल) को कर्ज के ब्याज के तौर पर 60 करोड़ रुपये अदा करने के आदेश दिया है. मगर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए DMRC को 7 दिन का अतिरिक्त वक्त दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और PSU को नसीहत देते हुए कहा कि बिना मतलब कानूनी मामलों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए. 

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाईं की. डीएमआरसी ने 60 करोड़ रुपये दिल्ली एयरपोर्ट मैट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमपीईएल) को कर्ज के ब्याज के तौर पर देने के हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने गत 7 जून को डीएमआरसी को कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए एकलपीठ के आदेश में दखल देने से मना कर दिया था. दिल्ली हाई कोर्ट की एकल पीठ ने गत 30 मई को डीएमआरसी से कहा था कि वह एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर काम करने वाली रिलायंस इंफ्रा की सहयोगी कंपनी डीएएमपीईएल को 60 करोड़ रुपये का भुगतान करे.

कोर्ट ने कहा था कि पहले एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का निर्माण करने वाली डीएएमपीईएल ने निर्माण के लिए जो कर्ज लिया था उसके लिए वह हर महीने 20 करोड़ रुपये ब्याज दे रही है. कोर्ट ने आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए ये अंतरिम आदेश पारित किया था. एकलपीठ ने ये अंतरिम आदेश डीएएमपीईएल की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया था.

डीएएमपीईएल ने उस याचिका में उसके हक में जारी किये गये 4670 करोड़ के आर्बिटल अवॉर्ड की 75 फीसद राशि यानि 3502 करोड़ रुपये जल्दी दिलाए जाने की मांग की है. मुख्य मामला अभी भी एकलपीठ के समक्ष लंबित है. डीएमआरसी ने हाई कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि ये तो एक प्रकार से जारी अवार्ड के बड़े भाग को लागू करना है और साथ ही अवार्ड के खिलाफ उसकी आपत्तियों को भी खारिज करना है लेकिन खंडपीठ ने डीएमआरसी की दलीलें खारिज करते हुए कहा था कि ये एकलपीठ का सिर्फ अंतरिम आदेश है मुख्य मामला तो अभी भी एकलपीठ के समक्ष लंबित है ऐसे में वह आदेश में दखल नहीं देंगे.

खंडपीठ ने ये भी कहा था कि एकलपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते समय डीएमआरसी के हितों का भी ध्यान रखा है और डीएएमपीईएल को 65 करोड़ की बैंक गारंटी देने को कहा है. डीएएमपीईएल ने एकलपीठ के समक्ष जल्दी भुगतान के लिये दलील दी थी कि नीति आयोग के 5 सितंबर 2016 के दिशा निर्देश कहते हैं कि पीएसयू चाहें आर्बिटल अवार्ड को चुनौती देने की तैयारी क्यों न कर रहे हों लेकिन वे अवार्ड राशि का 75 फीसद हिस्सा अदा करेंगे. हालांकि इसके खिलाफ डीएमआरसी की दलील है कि नीति आयोग के दिशा निर्देश इस मामले में लागू नहीं होंगे क्योंकि आर्बिटल अवार्ड गत 11 मई का है और उसे चुनौती देने के लिए उसके पास 90 दिन का समय है.


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