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सुरक्षित आधार के भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में भी मिली मदद, नहीं मारी जाएगी सब्सिडी : नरेंद्र मोदी सरकार

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सुरक्षित आधार के भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में भी मिली मदद, नहीं मारी जाएगी सब्सिडी : नरेंद्र मोदी सरकार

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद.

खास बातें

  1. आधार को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के लिए अनिवार्य
  2. पात्र व्यक्तियों को सब्सिडी का पूरा लाभ मिला और अपात्र व्यक्ति इससे दूर
  3. लीकेज के जरिये अपात्र व्यक्ति सब्सिडी का लाभ लेते थे
नई दिल्ली: सरकार ने विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) आधार को पूरी तरह सुरक्षित, संरक्षित एवं जवाबदेह बताते हुए कहा कि यह न केवल बेहतर प्रशासन में मददगार साबित हुआ है बल्कि इससे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में भी सहायता मिली है.

आधार के कार्यान्वयन और उसके प्रभाव पर राज्यसभा में भोजनावकाश के पश्चात हुयी अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आधार को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के लिए अनिवार्य बनाए जाने के बाद पात्र व्यक्तियों को सब्सिडी का पूरा लाभ मिला है और अपात्र व्यक्ति इससे दूर हुए हैं. प्रसाद ने कहा कि आधार से पहले, लीकेज के जरिये अपात्र व्यक्ति सब्सिडी का लाभ लेते थे और पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित रह जाते थे. एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार आदिवासी बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाती है. जांच के बाद वहां 30 से 40 फीसदी बच्चों की संख्या और शिक्षकों की 20 फीसदी संख्या कम हो गई. यह संख्या इसलिए कम हुई क्योंकि इन बच्चों और शिक्षकों का अस्तित्व ही नहीं था जबकि इनके नाम पर लाभ लिया जाता था.

उन्होंने कहा कि मनरेगा में, डीबीटी में, एलपीजी में, पेंशन योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर अपात्र व्यक्तियों ने लाभ लिया और पात्र व्यक्ति वंचित रह गए. आधार की वजह से इस पर रोक लगी है. उन्होंने कहा कि अपात्र व्यक्तियों ने जो लाभ लिया वह विकास कार्यो के लिए करदाताओं से मिली राशि थी.

प्रसाद ने कहा कि आधार कार्ड को जनधन योजना से जोड़ने पर 50,000 करोड़ रुपये की एलपीजी सब्सिडी की बचत हुई है. हालांकि मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि किसी भी गरीब व्यक्ति को उसके लाभ के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा.

प्रसाद ने कहा कि विश्व बैंक की विश्व विकास रिपोर्ट में भारत की 12 अंकों वाली आधार प्रणाली की सराहना की गई है. साथ ही विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री ने भी इस प्रणाली को बेहतर एवं अनुकरणीय बताया है. उन्होंने कहा ‘‘विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के एक निकाय ने साफ शब्दों में कहा है कि दुनिया को भारत के अद्भुद प्रौद्योगिकी नवाचार का अनुकरण करने की जरूरत है.’’

विभिन्न स्पष्टीकरणों के जवाब में उन्होंने कहा कि आंखों की पुतलियों और फिंगर प्रिंट की वजह से कोई भी व्यक्ति डुप्लीकेट आधार कार्ड नहीं बनवा सकता. उन्होंने कहा कि निजता के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और आधार के लिए एकत्र आंकड़ों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है. इस बारे में सरकार की ओर से स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए गए हैं. यह प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित, संरक्षित एवं जवाबदेह है.

प्रसाद ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी ने कभी कहा था कि सरकार की ओर से एक रुपया दिया जाता है लेकिन आम आदमी को केवल 15 पैसा मिल पाता है. उन्होंने कहा कि राजीव गांधी की यह पीड़ा थी जिसका जवाब अब समाधान के रूप में मिल रहा है क्योंकि अब आधार व्यवस्था के तहत लाभ वास्तव में उन लोगों को मिल रहा है जो इसके हकदार हैं.

अवसंरचना को दुरुस्त करने को प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए प्रसाद ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में जहां तीन साल में 358 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाए गए थे वहीं हमने ढाई साल में एक लाख 78 हजार किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाए हैं.

इससे पहले, चर्चा में हिस्सा लेते हुए विभिन्न दलों के सदस्यों ने जहां आधार योजना के तहत आंकड़ों की गोपनीयता बनाए रखने पर खासा जोर दिया वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला और कहा कि सत्ता में आने के पहले और उसके बाद पार्टी के रूख में व्यापक बदलाव आया है.

विपक्ष ने आधार लागू किए जाने के कारण 50,000 करोड़ रूपए की बचत के सरकार के आंकड़ों पर संदेह जताया और कहा कि वास्तव में यह बचत की राशि नहीं है बल्कि लाभार्थियों के नाम योजनाओं की सूची से हटाए जाने के कारण राशि खर्च नहीं हो सकी. विपक्ष ने आरोप लगाया कि कंेद्र सरकार द्वारा आधार पर जोर दिए जाने के कारण बड़ी संख्या में लोगों को विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है.

चर्चा में विभिन्न सदस्यों ने चिंता जताई कि उम्र बढ़ने के साथ और दुर्घटना के अलावा कई अन्य कारणों से भी बायोमिट्रिक पहचान बदल सकती है. इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस संबंध में संशोधन के बारे में गौर किया जायेगा.

चर्चा में भाग लेते हुए भाकपा के डी राजा ने दक्षिण भारतीय लोगों के बारे में भाजपा नेता तरूण विजय की आपत्तिजनक टिप्पणी का जिक्र किया. इस पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्होंने इस बारे में माफी मांग ली है. राजा ने स्कूलों में मध्याहन भोजन को आधार से जोड़े जाने की आलोचना की और कहा कि लोगों को सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने में आधार को बाधा नहीं बननी चाहिए. उन्होंने कहा कि समय तथा उम्र बढ़ने के साथ ही बायोमीट्रिक पहचान भी बदल जाते हैं. ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के विजय साई रेड्डी ने मांग की कि आधार कार्ड को पैन कार्ड तथा मतदाता पहचान पत्र के साथ जोडा जाना चाहिए क्योंकि कई लोग एक से अधिक पैन कार्ड का उपयोग कर कई बैंकांे में खाते रखते हैं और कई लोगों के पास एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र भी हैं.

कांग्रेस के रिपुन बोरा ने सवाल किया कि 70 से 80 साल की बुजुर्ग महिलाएं आधार कार्ड कहां से लाएंगी जिनके पति की मृत्यु हो गई है और जो पेंशन तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जीवन गुजार रही हैं. भाजपा के शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि भारत से प्रेरणा ले कर अन्य देश भी अपने यहां आधार जैसी व्यवस्था कर रहे हैं. इसी पार्टी के एल गणेशन ने कहा कि विपक्ष आधार की आलोचना कर रहा है लेकिन उसे देखना चाहिए कि यह व्यवस्था गरीबों के हित में कितनी कारगर रही है.

द्रमुक के तिरूचि शिवा ने कहा कि सरकार को ध्यान देना चाहिए कि आधार के कारण कोई जरूरतमंद व्यक्ति सामाजिक कल्याण योजनाओं के दायरे से बाहर नहीं हो जाए. उन्होंने कहा कि वह आधार के खिलाफ नहीं हैं लेकिन आंकड़ों की गोपनीयता कायम रहनी चाहिए.


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