NDTV Khabar

नोटबंदी : बैंकों में 'पैसा निवेश' करना यदि नुकसान का सौदा है तो क्या यह सही विकल्प है?

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
नोटबंदी : बैंकों में 'पैसा निवेश' करना यदि नुकसान का सौदा है तो क्या यह सही विकल्प है?

नोटबंदी : सरकार के इन बॉन्ड्स में निवेश करना एफडी में निवेश करने से बेहतर है? जानें... (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली:

कई बैंकों ने अपने यहां फिक्स्ड डिपॉजिट पर दिए जाने वाले ब्याज की दरें घटा दी हैं. विमुद्रीकरण के चलते इन ब्याज दरों में अभी और कटौती होनी बाकी है. ऐसे में कम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए क्या विकल्प शेष हैं, यह एक बड़ा सवाल है.

कुछ फाइनेंशल प्लानर मानते हैं कि ऐसे निवेशकों को सरकार के 8% सेविंग्स (टैक्सेबल) बॉन्ड्स में निवेश करना चाहिए. इनमें सालाना की दर से 8 फीसदी ब्याज मिलता है. ये बॉन्ड रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए जाते हैं. चूंकि ये बॉन्ड सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं इसलिए ये निवेश के बेहद सुरक्षित विकल्पों में से एक हैं. निवेशक इन्हें कभी भी खरीद सकते हैं और इसे खरीदने के लेकर कोई मियाद या समय की बंदिश नहीं है.

--- ---- ---- -----
नोटबंदी से जुड़ी तमाम खबरें पढ़ने और वीडियो देखें, यहां
--- ---- ---- -----


स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) फिलहाल 5 से 10 साल के डिपॉजिट पर 6.5 फीसदी का इंट्रेस्ट रेट दे रहा है. बैंकों के एफडी की तरह ही इन बॉन्ड्स से होने वाली आय को निवेशक की आय में जोड़ा माना जाता है और इस पर इनकम टैक्स के स्लैब के मुताबिक, टैक्स लगता है.

सरकार के 8% सेविंग्स (टैक्सेबल) बॉन्ड के कुछ फीचर्स इस प्रकार हैं....

  • इन सरकारी बॉन्ड्स का लॉक-इन पीरियड छह साल है.
  • निवेशक ब्याज का भुगतान संचयी और गैर संचयी विकल्प में से किसी एक को चुन सकते हैं. संचयी विकल्प चुनने पर निवेशक को जो भुगतान होगा वह बॉन्ड्स की मैच्योरिटी पर होगा और यदि गैर संचीय मोड चुनते हैं तो ब्याज का भुगतान छमाही आधार पर होगा.
  • उदाहरण के लिए यदि आप संचयी विकल्प चुनते हैं तो बॉन्ड्स पर 8 फीसदी सालाना दर से ब्याज लगने के बाद मैच्योरिटी वैल्यू पर इस पर निवेशक को 1601 रुपए मिलेंगे. ब्याज की गणना छमाही आधार पर होगी.
  • कम से कम 1000 रुपए निवेश करने होंगे और 1000 रुपए के गुणक में निवेश की कोई उच्चतम सीमा नहीं है, जितना चाहे निवेश कर सकते हैं.
  • ये बॉन्ड्स न तो स्थानांतरित किए जा सकते हैं और न ही इनकी ट्रे़डिंग की जा सकती है. हालांकि आप चाहे तो किसी को नॉमिनेट कर सकते हैं.

... तो क्या आपको इनमें निवेश करना चाहिए?

सिनर्जी कैपिटल सर्विसेस के एमडी विक्रम दलाल के मुताबिक, ऐसे वक्त में जब ब्याज की दरें कम हो रही हैं तब निवेशकों को निवेश के इस विकल्प पर गौर करना चाहिए. लेकिन चूंकि ये ट्रेड करने योग्य बॉन्ड नहीं हैं और न ही इनका स्थानांतरण किया जा सकता है, इसलिए निवेश से पहले इस पहलू पर भी पूरी तरह से गौर कर लें.

टिप्पणियां

दलाल के मुताबिक, जो लोग 30 फीसदी टैक्स ब्रेकेट में आ रहे हैं उनके लिए टैक्सफ्री बॉन्ड एक अच्छा है जो 8.75 फीसदी की दर से ब्याज दे रहे हैं. इनमें एक अच्छी बात यह भी है कि टैक्सफ्री बॉन्ड्स की ट्रेडिंग भी की जा सकती है.

सरकारी संस्थानों द्वारा पिछले कुछ सालों से जारी किए जा रहे टैक्स फ्री बॉन्ड्स को लेकर निवेशकों में आकर्षण था लेकिन इस वित्तीय वर्ष में कोई नए टैक्स फ्री बॉन्ड जारी नहीं किए जाएंगे. चूंकि टैक्स फ्री बॉन्ड्स की एक्सचेंज में ट्रेडिंग की जा सकती है इसलिए इन्हें सेंकेंड्री मार्केट से भी खरीदा जा सकता है.



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement