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नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) बनी लोगों की पसंद, अंशधारकों की संख्या में बड़ी वृद्धि

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नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) बनी लोगों की पसंद, अंशधारकों की संख्या में बड़ी वृद्धि

एनपीएस अंशधारकों की संख्या में इजाफा (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली:

नेशनल पेंशन स्कीम (National Pension Scheme) में पिछले छह साल से अधिक समय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. साल 2010 (मार्च) से लेकर 2016 तक इसके अंशधारकों की संख्या 7.76 लाख से बढ़कर 141.88 लाख पर पहुंच गयी. वैसे आप राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के बारे में काफी कुछ सुन चुके होंगे. इस स्कीम में भागीदारी के लिए जहां पहले न्यूनतम सालाना निवेश छह हजार रुपए करना जरूरी होता था वहीं बदले नियम के तहत न्यूनतम सालाना निवेश की सीमा एक हजार रुपए कर दी गई है. एनपीएस के प्रथम श्रेणी के खातों को परिचालन में बनाए रखने के लिए अब तक हर वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) में कम से कम 6,000 रुपए का योगदान अनिवार्य था.

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पीएफआरडीए के निवर्तमान पूर्णकालिक सदस्य (वित्त) आरवी वर्मा ने कहा, ‘मार्च 2010 में एनपीएस के प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) केवल 4,679 करोड़ रुपये थीं जो मार्च 2016 में उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 1,18,801 करोड़ रुपये और दिसंबर 2016 में 1,61,016 करोड़ रुपये पर पहुंच गयीं.’ उन्होंने कहा कि हालांकि इसमें बड़ी हिस्सेदारी सरकारी क्षेत्र की है. केंद्र या राज्य कर्मचारियों की कुल एयूएम में हिस्सेदारी करीब 88 प्रतिशत है जबकि अंशधारकों की संख्या के मामले में इनकी हिस्सेदारी 35 प्रतिशत है.

उन्होंने कहा कि पीएफआरडीए के नियमन दायरे में आने वाला एनपीएस अभी निजी क्षेत्र और कंपनी क्षेत्र के कर्मचारियों के मामले में पहली पसंद नहीं बन पाया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने हालांकि, विभिन्न नीतिगत कदमों के जरिये एनपीएस के विस्तार पर जोर दिया है लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और लोक भविष्य निधि (PPF) जैसे अन्य कोषों के मुकाबले कर लाभ में असमानता होने की वजह ने एनपीएस के विस्तार को सीमित किया है.

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सरकार ने पिछले बजट में एनपीएस से निकाली गई राशि पर 40 प्रतिशत तक कर छूट देने की घोषणा की थी. सरकार का इरादा ईपीएफओ अंशधारकों को एनपीएस के मंच पर लाना है.

(न्यूज एजेंसी भाषा से इनपुट)



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