ढांचागत क्षेत्र के धीमे विकास से वित्तमंत्री चिंतित

खास बातें

  • खर्जी ने कहा कि सरकार ढांचागत क्षेत्र के विकास और अनुसंधान और विकास में निवेश से जुड़ी चिंताओं के प्रति सजग है।
New Delhi:

वर्ष 2011-12 के आम बजट की तैयारियों में लगे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि सरकार ढांचागत क्षेत्र के विकास और अनुसंधान और विकास में निवेश से जुड़ी चिंताओं के प्रति सजग है। उद्योग जगत के साथ बजट पूर्व बैठक में मुखर्जी ने कहा सरकार ढांचागत क्षेत्र के परियोजनाओं के विकास और अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र में निवेश की धीमी गति से जुड़ी दो अहम् चिंताओं के प्रति सजग है। उन्होंने कहा कि इन दोनों क्षेत्रों का उद्योगों की उत्पादकता पर सीधे असर पड़ता है, इसके साथ ही ढांचागत क्षेत्र में निवेश समावेशी आर्थिक वृद्धि के लिये भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले हमारे अनुसंधान एवं विकास कार्यों में खर्च काफी कम होता है, कारोबार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिये हमें इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के हरसंभव प्रयास करने चाहिए। मुखर्जी ने कहा कि इन दोनों ही क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के सहयोग के बिना सरकार अकेले ही वांछित परिणाम हासिल नहीं कर पायेगी। निजी क्षेत्र सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी के तौर पर सहयोग दे सकता है अथवा पूरी तरह निजी क्षेत्र अपने दम पर इस काम में हाथ बंटाकर सहयोग दे सकता है। उन्होंने इस संबंध में निजी क्षेत्र से सुझाव मांगे। बैठक में टाटा संस के अध्यक्ष रतन टाटा, फिक्की अध्यक्ष राजन भारती मित्तल, एसोचैम अध्यक्ष दिलीप मोदी, सीआईआई के अध्यक्ष हरि एस भरतिया, सुजलॉन एनर्जी अध्यक्ष तुलसी आर तांती और वीडियोकॉन अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत सहित कुछ अन्य उद्योगपति उपस्थित थे।

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