विकसित देशों की भाषणबाजी से तंग हो चुके हैं : प्रेमजी

खास बातें

  • प्रेमजी ने अमेरिका को लेकर अपनी निराशा का इजहार किया, जो उभरते बाजारों में अपनी वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार खुलवाना चाहता है।
दावोस:

सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने कहा है कि विकासशील देश बाजार खोलने के विकसित देशों के उपदेश से तंग आ चुके हैं, क्योंकि विकसित देश स्वयं अपनी तरफ से व्यापार में नित नई अड़चनें खडी कर रहे हैं। प्रेमजी ने यहां विश्व आर्थिक मंच :डब्ल्यूईएफ: की सालाना बैठक में दुनियाभर की कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, मुझे लगता है कि बाजार खोलने के लिए विकसित देशों की बार बार की भाषणबाजी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं परेशान हो चुकी हैं। प्रेमजी ने खासकर अमेरिका को लेकर अपनी निराशा का इजहार किया, जो उभरते बाजारों में अपनी वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार खुलवाना चाहता है, पर दूसरी ओर आयात पर अड़चनें लगा रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या एशिया की अर्थव्यवस्थाएं पश्चिम की भाषणबाजी से उब चुकी हैं, प्रेमजी ने कहा, बात इससे भी आगे बढ चुकी है। प्रेमजी ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं का बाजार खोलवाने का मापदंड अन्य देशों खासकर अमेरिका से अलग नहीं हो सकता। अमेरिका ने सभी तरह की सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। यह एकतरफा नहीं चल सकता। भारत के आईटी उद्योग की 50 अरब डॉलर की आमदनी वैश्विक आउटसोर्सिंग से आती है। इसमें भी बड़ी हिस्सेदारी अमेरिका की है। अमेरिका ने सेवाओं के आयात को लेकर तमाम तरह की बाधाएं खड़ी हैं, इससे भारतीय आईटी उद्योग काफी नाराज है। अमेरिका ने पेशेवरों के लिए वीजा शुल्क भी बढ़ा दिया है। वहीं दूसरी ओर भारत ने अमेरिका को करीब 10 अरब डालर के सौदे दिए हैं, जिससे अमेरिकियों के लिए 50,000 नौकरियों का सृजन होगा। भारत के लिए सेवाओं के निर्यात का काफी महत्व है, क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान 55 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

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