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पीएफ (EPF) से जुड़ी ये चार बातें आपकी जानकारी में होनी चाहिए ताकि आड़े वक्त में दिक्कत न हो

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पीएफ (EPF) से जुड़ी ये चार बातें आपकी जानकारी में होनी चाहिए ताकि आड़े वक्त में दिक्कत न हो

पीएफ (EPF) से जुड़ी ये चार बातें आपकी जानकारी में होनी चाहिए ताकि आड़े वक्त में दिक्कत न हो (सांकेतिक फोटो)

नई दिल्ली:

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के खाताधारक हैं तो कुछ पिछले दिनों हुए खास डेवेलपमेंट आपको पता होने चाहिए. नौकरीपेशा लोगों के लिए पीएफ की रकम उनके लिए रिटायरमेंट का प्लान होती है जिसे लेकर जानकारों की राय रहती है कि बहुत अधिक जरूरत पड़ने पर ही इसमें से रकम निकालें. जितना हो सके तो इस पैसे को रिटायरमेंट प्लान की तरह ही यूज किया जाए लेकिन आड़े वक्त में जब आप पैसा निकाल सकते हैं और सरकार ने इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी किए हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए.

सरकार ने 2016-17 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) पर 8.65 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी दे दी है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के सदस्यों के खाते में यह ब्याज डाला जाएगा. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईपीएफओ ने अपने फील्ड कार्यालयों से अंशधारकों के खातों में 8.65 प्रतिशत ब्याज डालने को कहा है. पिछले दिनों श्रम मंत्रालय ने ईपीएफओ को इस बारे में सूचित भी कर दिया कि केंद्र सरकार ने इस ब्याज दर को मंजूरी दे दी है.

ईपीएफओ की ग्रुप हाउसिंग स्कीम  के तहत, ईपीएफ खाते से मकान खरीदने के लिये अग्रिम भुगतान (डाउन पेमेंट) और ईएमआई (EMI) का भुगतान कर सकते हैं. इसके लिए आप 90 प्रतिशत निकाल सकते हैं. लेकिन, यहां ध्यान दें कि पीएफ खाते से निकासी सुविधा उन्हीं सदस्यों के लिये उपलब्ध होगी जो निर्धारित शर्तों को पूरा करते हों. अगर सदस्य इस नए नियम के तहत आवेदन करता है तो इसके लिये जरूर है कि उसने कम से कम तीन साल कोष में योगदान किया हो. साथ ही, यह सुविधा किसी सदस्य को उसके जीवनकाल में सिर्फ एक बार ही मिल सकेगी. यानी, ऐसा नहीं है कि आप दो या इससे अधिक बार इस नियम का उपयोग कर पाएंगे.


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अंशधारक ईपीएफ खाते से बीमारी के इलाज और विकलांगता से निपटने के लिये उपकरण खरीद को लेकर धन निकाल सकते हैं. इसके लिये उन्हें स्वास्थ्य प्रमाणपत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी. बीमारी के इलाज और शारीरिक रूप से विकलांग होने की स्थिति में उपकरण खरीदने को लेकर भविष्य निधि खाते से पैसा निकालने को लेकर विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्र जमा करने की जरूरत को समाप्त करने और प्रोफार्मा में बदलाव के लिये कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1952 में संशोधन किया गया है. अब अंशधारक एकीकृत फार्म का उपयोग कर और स्व-घोषणा के जरिये विभिन्न आधार पर ईपीएफ खाते से कोष निकाल सकते हैं.

वे लोग जो ईपीएफओ की स्कीम में 20 साल या इससे अधिक समय तक कंट्रीब्यूशन करते रहेंगे, उन्हें लायल्टी-कम-लाइफ’  के तहत 50000 रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय लाभ सरकार द्वारा दिया जा सकता है. ईपीएफओ बोर्ड ने यह फैसला लिया है. यह अतिरिक्त वित्तीय लाभ हालांकि उस समय भी मिलेगा जब अंशधारक आजीवन अक्षमता (Permanent Disability) का शिकार हो गया हो लेकिन उसने 20 साल से कम समय तक ईपीएफओ में योगदान दिया हो. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सीबीटी (Central Board of Trustees- CBT) ने यह सिफारिश की कि अंशधारक की मृत्यु हो जाने पर 2.5 लाख रुपये का न्यूनतम सम अश्योर्ड भी मुहैया करवाया जाए.



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