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अब यह शख्स संभालेंगे देश के सबसे बड़े बैंक की बागडोर, जानिए उनके करियर के बारे में

रजनीश कुमार को देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है.

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अब यह शख्स संभालेंगे देश के सबसे बड़े बैंक की बागडोर, जानिए उनके करियर के बारे में

रजनीश कुमार को भारतीय स्टेट बैंक का नया चेरयमैन बनाया गया है

नई दिल्ली: रजनीश कुमार को देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है. वह अरुंधति भट्टाचार्य की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो रहा है. पिछले साल अक्टूबर में उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया था. रजनीश कुमार फिलहाल एसबीआई के प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत हैं. कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने 7 अक्टूबर से या कार्यभार संभालने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए रजनीश कुमार की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. 59-वर्षीय रजनीश कुमार 26 मई, 2015 को एसबीआई बोर्ड से जुड़े थे. रजनीश कुमार ने अपनी नियुक्ति पर कहा, 'यह मेरे लिए सचमुच गौरव की बात है कि मुझे एसबीआई का नेतृत्व ऐसे समय दिया गया है, जब भारत वृद्धि के लिए तैयार है.'

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खेल के शौकीन और साइंस बैकग्राउंड के रजनीश कुमार की वर्ष 1980 में प्रोबेशनरी अधिकारी के तौर पर एसबीआई में नियुक्ति हुई थी. 26 मई 2015 को उन्हें एसबीआई के चार प्रबंध निदेशकों में से एक के लिए चुना गया और खुदरा बैंकिंग समेत पेमेंट और डिजिटल बैंकिग की जिम्मेदारी दी गई. एसबीआई से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के लिए विदेश में काम करने के अलावा उन्होंने पूर्वोत्तर में मुख्य जनरल मैनेजर समेत अन्य जिम्मेदारियों को बड़ी ही कुशलता से निभाया है.

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आधिकारिक बायोडेटा के मुताबिक इस नियुक्ति से पहले वह अनुपालन और जोखिम विभाग के प्रबंध निदेशक, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा प्रबंध निदेशक के पद पर थे. कुमार ने फाइनेंस परियोजना और लीजिंग स्ट्रैटेजिक बिजनेस यूनिट के मुख्य महाप्रबंधक के रूप में भी काम किया है. इसके अलावा उन्होंने कनाडा और ब्रिटेन में दो अतंर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाने समेत विभिन्न व्यापारिक कार्यक्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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उल्लेखनीय है कि बड़ी संख्या में बैंकों को गैर-निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) से जुड़े मामलों का सामना करना पड़ रहा है. वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2017 के अंत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए बढ़कर 6.41 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो एक साल पहले 5.02 लाख करोड़ रुपये था.


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