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बोर्ड मीटिंग से पहले साइरस मिस्त्री से मिले थे रतन टाटा, इस्तीफा देने को कहा : टाटा के वकील

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बोर्ड मीटिंग से पहले साइरस मिस्त्री से मिले थे रतन टाटा, इस्तीफा देने को कहा : टाटा के वकील

साइरस मिस्त्री की जगह रतन टाटा को टाटा ग्रुप का अंतरिम चेयरमैन बनाया गया

खास बातें

  1. साइरस मिस्त्री की जगह रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया
  2. टाटा ग्रुप ने साइरस मिस्त्री को हटाने के लिए एक महीने तक कानूनी सलाह ली
  3. रतन टाटा व्यक्तिगत तौर पर साइरस से मिले, उनसे इस्तीफा देने को कहा : वकील
नई दिल्ली:

साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाने के लिए बुलाई गई टाटा ग्रुप की मीटिंग से पहले रतन टाटा की उनसे व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात में रतन टाटा ने साइरस मिस्त्री को चेयरमैन के पद से इस्तीफा देने को कहा था.

साइरस मिस्त्री को किस तरह से हटाया जाए, इस मामले में टाटा समूह को सलाह देने वाले तीन वकीलों में से एक मोहन परसरन ने बताया कि उस मुलाकात में रतन टाटा और नितिन नोहरिया ने साइरस से उनको हटाए जाने के बारे में बताया था. बता दें कि साइरस को हटाए जाने के बाद रतन टाटा को टाटा ग्रुप का अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है और नितिन नोहरिया बोर्ड के सदस्य और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के डीन भी हैं.

परसरन ने बताया, 'रतन टाटा और नोहरिया ने साइरस को इस्तीफा देने के लिए कहा, लेकिन उनकी अपनी अलग राय थी. इसलिए साइरस नहीं कह सकते हैं कि अचानक से उन्हें हटाने का फैसला ले लिया गया.'


परसरन ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि साइरस मिस्त्री को हटाने के सिलसिले में उनसे करीब एक महीने पहले विचार-विमर्श किया गया था और 'टाटा संस के पास उन्हें हटाने का पूरा अधिकार है. साइरस को हटाने के लिए टाटा संस को बहुमत की जरूरत थी और बहुमत से ही उन्हें हटाया गया.' बोर्ड के 9 सदस्यों में से 6 साइरस को चेयरमैन पद से हटाए जाने के पक्ष में थे, जबकि दो ने अपनी राय नहीं रखी. इस तरह नियम के तहत ही बहुमत से साइरस को हटाने का फैसला हुआ.

साल 2012 में 48 वर्षीय साइरस मिस्त्री 10 हजार करोड़ डॉलर की इस कंपनी के संस्थापक टाटा परिवार से बाहर के पहले चेयरमैन बने. साइरस से पहले रतन टाटा इस कंपनी के चेयरमैन थे और अब साइरस को हटाए जाने के बाद एक बार फिर रतन टाटा को ही 4 महीने के लिए कंपनी का अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है. इस बीच एक चयन समिति नए चेयरमैन की तलाश कर रही है.

साइरस को हटाए जाने के एक दिन बाद मंगलवार को टाटा ग्रुप ने विभिन्न आदालतों में कई कैविएट दाखिल की हैं. ताकि साइरस मिस्‍त्री के कोर्ट के शरण लेने की स्थिति में एकतरफा आदेश से बचा जा सके. हालांकि शापूरजी पैलोनजी ग्रुप ने फिलहाल ऐसे किसी भी कदम के बारे में विचार करने से इनकार किया है. बता दें कि टाटा ग्रुप में शापूरजी पैलोनजी ग्रुप सबसे बड़ा स्टेक होल्डर है.

बोर्ड मीटिंग के एजेंडे में पहले साइरस मिस्‍त्री को हटाए जाने का मामला शामिल नहीं था. परसरन ने बताया कि इसको 'अन्‍य कोई आइटम' श्रेणी के रूप में पेश किया गया. इसको आमतौर पर हर बोर्ड मीटिंग के खत्‍म होने से पहले पेश किया जाता है. इस मसले को पेश करने पर साइरस ने विरोध करते हुए इसे गैरकानूनी कदम बताया. इसके साथ ही कहा कि इस तरह के मैटर को शामिल करने से पहले 15 दिन का नोटिस देने का नियम है. इस पर बोर्ड ने उनको बताया कि इस पर पहले ही कानूनी राय ली गई है और उसके बाद ही यह कार्यवाही की जा रही है.  

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उल्‍लेखनीय है कि टाटा ग्रुप का ऋण भार तकरीबन 30 अरब डॉलर होने पर साइरस मिस्‍त्री ने कई परिसंपत्तियां बेचनी शुरू कीं. इसके अलावा उनके काम का तौर-तरीका भी रतन टाटा से काफी अलहदा था. रतन टाटा ने तो अरबों डॉलर खर्च कर वैश्चिक कंपनियों मसलन स्‍टील निर्माता कोरस और जगुआर लैंड रोवर को खरीदा था.

इस मसले पर ग्रुप की ही एक मैगजीन को पिछले दिनों दिए एक इंटरव्‍यू में मिस्‍त्री ने स्‍वीकार किया था कि समूह की कई कंपनियों को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है और उसके लिए ''पोर्टफोलियो में छंटाई के लिए सख्‍त निर्णय की दरकार होगी.'' अब उस इंटरव्‍यू को कंपनी की वेबसाइट से हटा दिया गया है.



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