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RBI ने CSO पर उठाए सवाल, कहा - जीडीपी वृद्धि का अग्रिम आकलन कम किया

केवल दो साल ही इस तरह का मौका आया जब अग्रिम अनुमान वर्ष की जीडीपी वृद्धि दर से ज्यादा रहा. रिजर्व बैंक के एक शोध पत्र में यह कहा गया है.

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RBI ने CSO पर उठाए सवाल, कहा - जीडीपी वृद्धि का अग्रिम आकलन कम किया

प्रतीकात्मक फोटो

मुंबई:

केन्द्रीय साख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने पिछले 14 साल में से 12 सालों के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अग्रिम अनुमान उस साल की वास्तविक वृद्धि दर के मुकाबले कम लगाया. केवल दो साल ही इस तरह का मौका आया जब अग्रिम अनुमान वर्ष की जीडीपी वृद्धि दर से ज्यादा रहा. रिजर्व बैंक के एक शोध पत्र में यह कहा गया है.

इस दस्तावेज में कहा गया है कि यह वास्तविक अर्थव्यवस्था को समझने के लिये अग्रिम अनुमान के साथ ही आवृति संकेतकों को पढ़ने की जरूरत को रेखांकित करता है.

रिजर्व बैंक के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गई इस मासिक शोध रिपोर्ट में जिसे मिंट स्ट्रीट मेमोज नाम दिया गया है. इस रिपोर्ट में इस बार इस पर चर्चा की गई है कि पिछले 14 वर्षों में 12 वर्ष में सीएसओ ने अपने अनुमान को बाद में बढ़ाया है जबकि केवल दो बार ऐसा अवसर आया जब इसे अनुमान से कम किया गया. ये दो वर्ष 2008- 09 और 2012- 13 रहे हैं. 

शोधकर्ताओं ने हालांकि कहा कि इस दौरान बीच में सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) आंकड़ों का इस्तेमाल भी शुरू हुआ और फिर जीडीपी पद्धति को भी अपना लिया गया. वर्ष 2005- 06 में जीडीपी का अग्रिम अनुमान 8.1 प्रतिशत लगाया गया जबकि इसे बाद में संशोधित कर 9.5 प्रतिशत किया गया. इसी प्रकार 2009- 10 में अग्रिम अनुमान का आंकड़ा 7.2 प्रतिशत लगाया गया और बाद में यह बढ़कर 8.6 प्रतिशत हो गया. 


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इसके विपरीत सीएसओ ने 2008- 09 में वास्तविक वृद्धि का अंतिम आंकड़ा 3.9 प्रतिशत रह गया जबकि अग्रिम अनुमान में इसके 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था. 

इसमें कहा गया है कि ऐसा इसलिये हुआ कि हर नये दौर में मजबूत आंकड़ों को शामिल किया गया. इसके साथ ही डेटा कवरेज में भी हर बार वृद्धि होती रही है.


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