समूह कंपनियों के धन से किया भुगतान: सहारा

समूह कंपनियों के धन से किया भुगतान: सहारा

खास बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह से पूछा था पुनर्भुगतान राशि का स्रोत
  • भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की मूल प्रतियां सेबी को सौंपने का दावा
  • मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को
नई दिल्ली:

सहारा समूह ने शुक्रवार को कहा कि वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय ऋण पत्रों (ओएफसीडी) के जरिये जुटाए गए धन को विभिन्न आस्तियों में लगाया गया था और समूह की कंपनियों ने जरूरत पड़ने पर धन उपलब्ध कराया ताकि निवेशकों को पुनर्भुगतान किया जा सके.

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने आज ही सहारा समूह से पूछा कि उसने किन स्रोतों  से 25,000 करोड़ रुपये जुटाकर निवेशकों को नकद में भुगतान किया है. न्यायालय ने समूह से कहा कि वह यह राशि जुटाने के स्रोतों का खुलासा कर पाक साफ होकर सामने आए.

सहारा समूह ने बाद में इस बारे में एक बयान में कहा है, 'यह बताना प्रासंगिक होगा कि सहारा देश भर में लगभग 5000 शाखाओं के जरिए परिचालन करता है और यह भुगतान केवल उन्हीं शाखाओं के जरिये किया गया.' इसके अनुसार, 'सहारा की शाखाओं के अखिल भारतीय नेटवर्क के जरिए ही कंपनी ने धन लौटाया (रिफंड किया) है.' समूह ने अपने वकील के माध्यम से कहा है कि इन भुगतान (रीपेमेंट) से जुड़े सभी दस्तावेजों की मूल प्रतियां व निवेशकों द्वारा लौटाए गए मूल ब्रांड प्रमाण पत्र सेबी को सौंप दिए गए हैं.

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उल्लेखनीय है कि मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान सहारा समूह से कहा, "आप बताएं कि इस पैसे का स्रोत क्या है? क्या आपको अन्य कंपनियों और अन्य योजनाओं से 24,000 करोड़ रुपये मिले? बैंक खातों से यह राशि निकाली? या फिर संपत्ति बेचकर यह राशि जुटाई? यह इन तीनों में से किसी एक माध्यम से होगी. पैसा ऊपर से नहीं गिरता. आपको बताना होगा कि यह धन आपको कहां से मिला.

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पीठ में न्यायमूर्ति एआर दवे और न्यायमूर्ति एके सीकरी भी शामिल हैं. पीठ अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को करेगी.