समयसीमा खत्म होने से पहले 'कालेधन' की घोषणा करने वालों की लगी कतारें

समयसीमा खत्म होने से पहले 'कालेधन' की घोषणा करने वालों की लगी कतारें

नई दिल्ली:

कालेधन के बारे में खुलासा करने की समयसीमा बुधवार रात समाप्त होने से पहले स्थानीय आयकर कार्यालय में ऐसे धन की घोषणा करने वालों की खूब भीड़ देखी गई। हालांकि अभी यह पता नहीं चला है कि कितना धन कर विभाग के दायरे में आया है।

एक बारगी मिली अनुपालन सुविधा बंद होने से पहले राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों सहित विभिन्न क्षेत्रों से लोग कालेधन के बारे में घोषणा के लिए, यहां बने विशेष कार्यालयों में पहुंचे।

चार्टर्ड एकाउंटेंटों को लगाया कतार में
पूरे दिन लंबी कतारें देखी गईं। जो लोग पहुंचे, उसमें मुख्य रूप से चार्टर्ड एकाउंटेंट या उन लोगों के प्रतिनिधि थे, जिन्होंने विदेशों में रखे अघोषित धन और संपत्ति के बारे में जाने में जानकारी दी।

एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि करीब 100 लोगों ने बुधवार शाम तक अनुपालन खिड़की का उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जयपुर के एक कारोबारी ने 41 लाख रुपये की संपत्ति की घोषणा की।

उसने कहा, 'बड़ी संख्या में घोषणा आयकर विभाग की आधिकारिक ई-फाइलिंग वेबसाइट से किए जाने की संभावना है।' इससे पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अपने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि विदेशों में अघोषित संपत्ति के बारे में जानकारी देने वाली इकाइयों को खुलासे के संदर्भ में हर प्रकार की मदद दी जानी चाहिए।

दिल्ली के कनाट प्लेस दफ्तर में रही चहल-पहल
सरकार ने कहा था कि 90 दिन का अनुपालन समय 30 सितंबर को समाप्त हो जाएगा और इसमें किसी प्रकार के विस्तार से इनकार किया था। राष्ट्रीय राजधानी में कनाट प्लेस के करीब स्थित दफ्तर में चहल-पहल देखी गई। घोषणा खिड़की के उपयोग के लिए लोगों को भारी दस्तावेजों के साथ देखा गया।

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सुबह जिन लोगों को देखा गया, उसमें दिल्ली के एक पिता-पुत्र थे, जिनका मोटर पार्ट्स का कारोबार है। इस बीच, मुंबई में रिजर्व बैंक ने कहा कि जो भी इकाइयां कालाधन अनुपालन खिड़की के तहत अघोषित संपत्ति का ब्योरा देती हैं, फेमा के तहत उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।

घोषणा करने वालों पर फेमा के तहर कार्रवाई नहीं
बैंकों को दी सूचना में रिजर्व बैंक ने कहा कि विदेशों में अघोषित संपत्ति के बारे में घोषणा किए जाने तथा कालाधन कानून के तहत कर एवं जुर्माने का भुगतान करने वालों के खिलाफ विदेशी विनिमय प्रबंध कानून 1999 (फेमा) के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।