सहारा प्रमुख को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत, सरेंडर करने के लिए 30 सितंबर तक का वक्त

सहारा प्रमुख को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत, सरेंडर करने के लिए 30 सितंबर तक का वक्त

नई दिल्ली:

सहारा समूह प्रमुख सुब्रत रॉय को सुप्रीम कोर्ट से नाटकीय घटनाक्रम के बाद अंतरिम राहत मिल गई है, और अब उन्हें तुरंत जेल नहीं जाना पड़ेगा, क्योंकि सरेंडर करने के लिए कोर्ट ने उन्हें 30 सितंबर तक की मोहलत दे दी है, जबकि सुबह कोर्ट ने उन्हें तुरंत जेल भेजे जाने का आदेश दे दिया था. इस राहत के अलावा कोर्ट ने सहारा प्रमुख की पैरोल रद्द नहीं करने की अर्जी पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 28 सितंबर तय की है, जबकि मुख्य मामले की सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी.

दरअसल, दोपहर बाद मामले की सुनवाई दोबारा शुरू होने पर सहारा के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से दूसरे वकील राजीव धवन के व्यवहार को लेकर माफी मांगी, और कोर्ट से सुब्रत रॉय को जेल भेजने का आदेश वापस लेने की मांग की. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अपने आदेश पर पुनर्विचार करेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें किसी से कोई समस्या नहीं है. हम सुबह मामले की सुनवाई टाल रहे थे, हम इसे एन्जॉय नहीं करते, यह हमारे लिए भी पीड़ाभरा होता है. हम भी दिन के ख़त्म होने पर सोचते हैं कि किसी को हमारे आदेश से तकलीफ तो नहीं हुई. कोई अगर बहुत अच्छा बोलता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह कोर्ट पर हावी हो जाए. हमारी भी सहने की एक क्षमता होती है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय और समूह के दो अन्य निदेशकों को दी गई जमानत समेत सभी अंतरिम राहत शुक्रवार को रद्द कर दी थीं, और उन्हें हिरासत में लेने का निर्देश दिया था. दरअसल, सहारा की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने जब मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि उन्हें भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा संपत्ति की बिक्री प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है तो न्यायाधीश काफी नाराज़ हो गए. पीठ ने कहा, "अगर आप चाहते हैं कि आपकी बातें सुनी जाएं, तो पहले आप जेल जाइए... हमें यह मत बताइए कि हमें क्या करना है... सभी अंतरिम व्यवस्था रद्द की जाती हैं... सभी को हिरासत में लिए जाने का निर्देश दिया जाता है..." पीठ में न्यायाधीश एआर दवे और न्यायाधीश एके सीकरी भी शामिल हैं.

धवन ने कहा था कि यह कहना उचित नहीं है कि उन्हें फिर से जेल भेजा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमने पिछले निर्देश के मुताबिक 352 करोड़ रुपये पहले ही जमा कर दिए हैं, जो 52 करोड़ रुपये अतिरिक्त हैं... यह उपयुक्त नहीं है..." सेबी की तरफ से पेश अधिवक्ता ने बताया कि 58 संपत्तियों को नीलामी के लिए रखा गया और उनमें से आठ को 137 करोड़ रुपये में बेचा गया. उन्होंने यह भी कहा कि संपत्तियों में से पांच को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया था.

उन्होंने कहा कि सहारा ने उन्हें संपत्तियों की जो सूची सौंपी है, उसमें वे संपत्तियां भी शामिल हैं, जो पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं. इस पर पीठ ने सहारा के अधिवक्ता से कहा, "आपने उन संपत्तियों की सूची दी है, जो पहले से ही कुर्क हैं... आप सहयोग नहीं कर रहे हैं, सो, बेहतर होगा कि आप जेल जाएं..." पीठ ने सहारा प्रमुख को जमानत जारी रखने के लिये 300 करोड़ रुपये जमा करने को कहा.

न्यायालय के इस रुख के बाद धवन ने अनुरोध किया कि मामले पर आगे की सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख रखी जाए, उस दिन वह इस पर अपना पक्ष रखेंगे. जैसे ही पीठ ने रॉय और सहारा के दो अन्य निदेशकों अशोक रॉय चौधरी और रवि शंकर दुबे को हिरासत में लेने का निर्देश दिया, सहारा ने अपने अधिवक्ता को केस से हटा लिया और पीठ से माफी मांगी.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कुछ लोग अदालत की मर्यादा के साथ खेलते हैं और कुछ वकील हैं, जो अदालत के प्रति सम्मान नहीं रखते.

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न्यायालय ने गत 16 सितंबर को सहारा प्रमुख के पैरोल की अवधि शुक्रवार तक के लिए बढ़ा दी थी. रॉय की मां के निधन के बाद उन्हें मई में पैरोल पर रिहा किया गया था. बाद में पैरोल जारी रहा, ताकि वह निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए राशि जुटा सके.

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(इनपुट भाषा से भी)