यह ख़बर 02 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

शेयर बाजार को सट्टाबाजार बाजार न समझें : सेबी

शेयर बाजार को सट्टाबाजार बाजार न समझें : सेबी

खास बातें

  • भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने कहा कि शेयर बाजार को सट्टेबाजों का बाजार नहीं समझा जाना चाहिए।
मुंबई:

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि शेयर बाजार को सट्टेबाजों का बाजार नहीं समझा जाना चाहिए। सेबी के चेयरमैन यूके सिन्हा ने एक सम्मेलन में कहा, पूंजी बाजार को सटोरियों का बाजार न मानें। सिस्टम से अड़चनों को दूर करने पर जोर देते हुए सिन्हा ने कहा कि खुदरा भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाना चाहिए। सिन्हा ने कहा कि यदि आप आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के फॉर्म को देखें तो विवरणिका काफी बड़ी होगी, जिसमें बहुत छोटे अक्षरों में लिखा है। हम आईपीओ फॉर्म का सरलीकरण करने जा रहे हैं। एक समूह ने इस पर काम शुरू कर दिया है, जिसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। उन्होंने कहा कि भारत में शेयर बाजार के कुल कोष में खुदरा भागीदारी मात्र आठ फीसद की है। वहीं दूसरी ओर चीन, दक्षिण कोरिया और ब्राजील में यह 20 से 30 प्रतिशत है। सेबी चेयरमैन ने कहा कि नियामक भी अब प्रौद्योगिकियां अपना रहा है। पूंजी बाजार की गतिविधियों विकसित की जा रही हैं। सिन्हा ने कहा कि बचत के धन को अर्थव्यवस्था में इस तरह निवेश किया जाना चाहिए, जो फायदेमंद साबित हो।

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