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पोंजी स्कीमों से निपटने के लिए सेबी को मिले ज्यादा अधिकार

पोंजी स्कीमों से निपटने के लिए सेबी को मिले ज्यादा अधिकार

खास बातें

  • सरकार ने पोंजी योजनाओं से निपटने और भेदिया कारोबार रोकने के लिए सेबी को गुरुवार को और अधिकार दिए। इसके तहत बाजार नियामक फोन कॉल रिकॉर्ड मांगने के साथ ही तलाशी तथा जब्ती की भी कार्रवाई कर सकता है।
नई दिल्ली:

सरकार ने पोंजी योजनाओं से निपटने और भेदिया कारोबार रोकने के लिए सेबी को गुरुवार को और अधिकार दिए। इसके तहत बाजार नियामक फोन कॉल रिकॉर्ड मांगने के साथ ही तलाशी तथा जब्ती की भी कार्रवाई कर सकता है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को और शक्तियां दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के एक दिन बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रतिभूति कानून में संशोधन से संबद्ध अध्यादेश आज जारी किया।

आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से सेबी को उन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के कानूनी अधिकार मिल गए हैं जो भोले-भाले निवेशकों को चूना लगाने के लिए नए-नए तरीके खोजती हैं।

पोंजी योजनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाने को लेकर सरकार की हो रही निंदा के बीच बयान में कहा गया है, ‘अध्यादेश जारी होना, प्रतिभूति बाजार में अनियमितताओं और धोखाधड़ी पर तेजी एवं तत्परता के साथ लगाम लगाने को लेकर सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शता है।’

संशोधित कानून के तहत सेबी 100 करोड़ रुपये या अधिक मूल्य के किसी भी धन जुटाने की योजना का नियमन कर सकता है और नियमों का पालन न करने की स्थिति में संपत्ति जब्त कर सकता है। साथ ही सेबी के चेयरमैन के पास तलाशी तथा जब्ती कार्रवाई का आदेश देने का अधिकार होगा।

बयान के अनुसार बाजार नियामक के पास प्रतिभूति लेन-देन मामले की उसके द्वारा की जा रही जांच के सिलसिले में किसी भी व्यक्ति या इकाई से टेलीफोन कॉल डेटा रिकॉर्ड मांगने समेत सूचना प्राप्त करने का अधिकार होगा। अध्यादेश में सेबी संबंधी मामलों के तेजी से निपटान के लिए विशेष अदालतों का गठन करने का प्रावधान है।

बयान के अनुसार, ‘इस अध्यादेश में सेबी से जुड़े मामलों के लिए विशेष अदालतें गठित करने का प्रावधान है। इससे लंबित मामलों के निपटान में तेजी आएगी।’

इसमें कहा गया है कि कानून में संशोधन से कोष जुटाने के मामले में साधनों के उपयोग के संदर्भ में जो नियामकीय कमी या ‘ओवरलैपिंग’ हैं, वे दूर होंगी।

हालांकि सामूहिक निवेश योजनाएं सेबी की जांच के दायरे में आती हैं, पर जब नियामक को अवैध तरीके से कोष जुटाने को लेकर शिकायतें मिलती हैं तो कुछ कंपनियां दावा करती हैं कि वे सीआईएस नियमन के दायरे में नहीं आती।

बयान के अनुसार, ‘कानून में संशोधन होने के बाद अब सेबी के पास 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की धन संग्रह वाली योजनाओं के नियमन का अधिकार होगा। साथ ही नियमों का अनुपालन न करने की स्थिति में वह संपत्ति जब्त कर सकेगा। सेबी के चेयरमैन के पास पोंजी योजनाओं पर अंकुश लगाने के लिये तलाशी तथा जब्ती कार्रवाई का आदेश देने का अधिकार होगा।’

पश्चिम बंगाल में सारदा समूह द्वारा चिट फंड घोटाले को लेकर काफी विरोध प्रदर्शन हुआ। इस घोटाले के कारण हजारों निवेशकों को गाढ़ी मेहनत की कमाई गंवानी पड़ी। सेबी तथा गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, कारपोरेट कार्य मंत्रालय तथा वित्तीय सेवा विभाग समेत अन्य मंत्रालयों तथा विभागों के साथ विचार-विमर्श के बाद सेबी कानून, एससीआर कानून तथा डिपोजिटरीज कानून में संशोधन को अंतिम रूप दिया गया।