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शेयर बाजारों में आज सुबह नरमी का रुख, सेंसेक्स और निफ्टी गिरकर खुले

पिछले साल नवंबर के बाद लगातार सात दिन तक शेयर बाजारों में तेजी रही. नवंबर में लगातार आठ दिनों तक तेजी देखी गई थी.

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शेयर बाजारों में आज सुबह नरमी का रुख, सेंसेक्स और निफ्टी गिरकर खुले

शेयर बाजार.

खास बातें

  1. सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ खुले
  2. पिछले सप्ताह रही थी तेजी
  3. लगातार सात दिन तक रही तेजी
मुंबई: देश के शेयर बाजार सोमवार को गिरावट के साथ खुले. प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.31 बजे 62.70 अंकों की कमजोरी के साथ 34,129.95 पर और निफ्टी भी लगभग इसी समय 15.60 अंकों की गिरावट के साथ 10,465.00 पर कारोबार करते देखे गए. बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 247.92 अंकों की गिरावट के साथ 33944.73 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 82.3 अंकों की कमजोरी के साथ 10,186.85 पर खुला. 

बीते सप्ताह देश के शेयर बाजारों में तेजी देखी गई. पिछले साल नवंबर के बाद लगातार सात दिन तक शेयर बाजारों में तेजी रही. नवंबर में लगातार आठ दिनों तक तेजी देखी गई थी. सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी. पिछले दिनों अमेरिका द्वारा अपने घरेलू बाजार के लिए संरक्षणवादी रुख अपनाने के बाद चीन की प्रतिक्रिया के आशंका में वैश्विक बाजारों में गिरावट छाने लगी थी, लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एक भाषण में अमेरिकी रुख पर चीन द्वारा प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करने और निर्यात शुल्क में गिरावट लाने की घोषणा से वैश्विक बाजारों में तेजी लौटी.

वहीं, दूसरी तरफ सीरिया को लेकर रूस और अमेरिका के बीच तनातनी बढ़ने की आशंका से कारोबारी सप्ताह के मध्य में शेयर बाजारों की कमजोरी देखी गई. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह ट्वीट करने पर कि अमेरिका सीरीया में जल्दीबाजी में हमला नहीं करेगा, शेयर बाजारों में तेजी लौट गई. 

बीते सप्ताह सभी पांच कारोबारी दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी तेजी के साथ बंद हुए. साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 565.68 अंकों या 1.68 फीसदी की तेजी के साथ 34,192.65 पर तथा निफ्टी 129 अंकों या 1.44 फीसदी की तेजी के साथ 10,480.60 पर बंद हुआ.

सोमवार को शेयर बाजारों की सकारात्मक शुरुआत हुई और सेंसेक्स 161.57 अंको या 0.48 फीसदी की तेजी के साथ 33,788.54 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 47.75 अंको या 0.46 फीसदी की तेजी के साथ 10,379.35 पर बंद हुआ. मंगलवार को सेंसेक्स 91.71 अंकों या 0.27 फीसदी की तेजी के साथ 33,880.25 पर बंद हुआ और निफ्टी 22.90 अंकों या 0.22 फीसदी की तेजी के साथ 10,402.25 पर बंद हुआ.

बुधवार को सेंसेक्स 60.19 अंकों या 0.18 फीसदी की तेजी के साथ 33,940.44 बंद हुआ, जबकि निफ्टी 14.90 अंकों या 0.14 फीसदी की तेजी के साथ 10,417.15 पर बंद हुआ. गुरुवार को भी बाजार में तेजी का रूख रहा और सेंसेक्स 160.69 अंकों या 0.47 फीसदी की तेजी के साथ 34,101.13 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 41.50 अंकों या 0.40 फीसदी की तेजी के साथ 10,458.65 पर बंद हुआ. इसी दिन सेंसेक्स ने 34,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर पर कर लिया.

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बाजार में उतार-चढ़ाव का रुख देखने को मिला और सेंसेक्सस 91.52 अंकों या 0.27 फीसदी की तेजी के साथ 34,192.65 पर बंद हुआ तथा निफ्टी 21.95 अंकों या 0.21 फीसदी की तेजी के साथ 10,480.60 पर बंद हुआ.

बीते सप्ताह सेंसेक्स के तेजी वाले शेयरों में प्रमुख रहे - एक्सिस बैंक (8.23 फीसदी), आईसीआईसीआई बैंक (2.48 फीसदी), एचडीएफसी बैंक (0.28 फीसदी), इंफोसिस (3.52 फीसदी), विप्रो (3.26 फीसदी), टीसीएस (6.82 फीसदी), रिलायंस इंडस्ट्रीज (3.20 फीसदी), बजाज ऑटो (0.43 फीसदी) और टाटा स्टील (1.53 फीसदी).

सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे - यस बैंक (1.53 फीसदी), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (3.31 फीसदी), लार्सन एंड टूब्रो (4.03 फीसदी), टाटा मोटर्स (1.98 फीसदी) और मारुति सुजुकी (0.75 फीसदी).

व्यापक आर्थिक मोर्चे पर, खाने पीने की चीजों के दाम में राहत के कारण मार्च में खुदरा मुद्रास्फीति की दर घटकर 4.28 फीसदी रही, जो फरवरी (2018) में 4.44 फीसदी पर थी. आधिकारिक आंकड़े गुरुवार को जारी किए गए.साल-दर-साल आधार पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) हालांकि पिछले महीने उच्च स्तर पर रही, क्योंकि 2017 के मार्च में यह 3.89 फीसदी पर थी.

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केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) मार्च में 2.81 फीसदी पर रही, जबकि फरवरी में यह 3.26 फीसदी पर थी.

पिछले हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में चालू वित्तवर्ष के लिए मुद्रास्फीति की दर 4.7 फीसदी से 5.1 फीसदी के बीच रहने और वित्तवर्ष की दूसरी छमाही में इसे 4.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों के लिए अल्पकालिक ऋण दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया था.
 


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