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औंधे मुंह गिरे शेयर बाजार, सेंसेक्स करीब 1200 अंक नीचे, निफ्टी 350 अंक लुढ़का

सेंसेक्स करीब 1200 अंक नीचे खुला तो निफ्टी भी 350 से ज्यादा अंक नीचे कारोबार कर रहा था. 

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औंधे मुंह गिरे शेयर बाजार, सेंसेक्स करीब 1200 अंक नीचे, निफ्टी 350 अंक लुढ़का

शेयर बाजार में भारी गिरावट.

खास बातें

  1. मंगलवार को शेयर बाज़ारों में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट दर्ज हुई
  2. गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में तेज़ गिरावट को माना जा रहा है
  3. गिरावट का दौर कुछ दिन और जारी रहने की आशंका
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शेयर बाजार में मंगलवार को भी भारी गिरावट का दौर सुबह सुबह दिखाई दिया. सेंसेक्स करीब 1200 अंक नीचे खुला तो निफ्टी भी 350 से ज्यादा अंक नीचे कारोबार कर रहा था. बता दें कि सेंसेक्स 800 अंकों की गिरावट के साथ खुला था. भारतीय शेयर बाजारों में यह गिरावट की वजह माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गिरावट. जानकारों का मानना है कि निवेशकों को सोच समझकर बाजार में फिलहाल निवेश करना चाहिए. उनका कहना है कि अभी गिरावट का दौर जारी और यह दौर कुछ दिन और चल सकता है, इसलिए सभी को समझदारी के साथ बाजार में पैसा लगाना चाहिए. फिलहाल सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही लगभग 3.34 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है.

रीयल्टी, टिकाऊ उपभोग, धातु और बैंकिंग सहित अन्य अलग-अलग क्षेत्रों के सूचकांकों में गिरावट रही.  पिछले पांच कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में 1,526 अंक गिरावट देखी गयी. जनवरी में इसमें 2,200 अंक से अधिक की तेजी रही थी. ब्रोकरों ने कहा कि अमेरिका के वॉल स्ट्रीट में रिकॉर्ड गिरावट के बाद एशियाई बाजारों में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला.  एशियाई बाजारों में टोक्यो 5 प्रतिशत से अधिक, हांग कांग 4 प्रतिशत और सिडनी 3 प्रतिशत, सिंगापुर 2.3 प्रतिशत, सियोल 3 प्रतिशत, ताईपाई 3.7 प्रतिशत और शंघाई 2.1 प्रतिशत गिरे.

ब्रोकरों ने कहा कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा नीति को लेकर सतर्क रहने और डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में रुपये के 29 पैसे कमजोर होने से भी घरेलू शेयर बाजार में गिरावट के रुख को बल मिला. अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कल के कारोबारी दिन में 1,263.57 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

टाटा मोटर्स, यस बैंक, एक्सिस बैंक, एसबीआई, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, अडाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, एलएंडटी और हीरो मोटोकॉर्प के शेयरों में भारी गिरावट रही. इनमें 7.55 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई.

उल्लेखनीय है कि  केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली  ने सोमवार को कहा था कि बाजार में लगातार जारी गिरावट की वजह आम बजट में शेयरों में कमाई पर दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर लगाया जाना नहीं बल्कि वैश्विक कारक हैं. जेटली का बयान ऐसे समय में आया, जब शेयर बाजार में नवंबर 2016 के बाद से शुक्रवार को सबसे भारी गिरावट दर्ज की गई थी. आम बजट 2018-19 में शेयरों से कमाई पर एलटीसीजी कर दोबारा लगाए जाने के ऐलान के बाद बाजार लुढ़के थे. शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स में 800 अंकों से अधिक की एकदिनी गिरावट हुई थी जबकि निफ्टी सूचकांक में 200 से अधिक गिरावट दर्ज की गई थी. 

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1 फरवरी को मोदी सरकार के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संसद में बजट पेश किया. बजट के कुछ प्रस्तावों को लेकर निवेशकों की चिंता तथा वैश्विक स्तर पर बिकवाली से शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला सोमवार को लगातार पांचवें दिन जारी रहा तथा सेंसेक्स 310 अंक टूटकर 34,757.16 अंक के तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया था. निफ्टी में भी 94 अंक की गिरावट आई थी और यह 10,667 अंक पर आ गया. पिछले सप्ताह बजट में सरकार ने शेयरों पर 10 प्रतिशत का पूंजीगत लाभ कर (कैपिटल गेन टैक्‍स) लगाने का प्रस्ताव किया है. इससे निवेशक चिंतित हैं. इसके अलावा राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकने से भी बाजार धारणा प्रभावित हुई है.

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एक फरवरी को बजट पेश होने के बाद से सेंसेक्स तीन सत्रों में 1,208 अंक से अधिक नीचे आ चुका है. वहीं निफ्टी 361 अंक टूटा है. ब्रोकरों ने कहा कि निवेशकों ने रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा से पहले सतर्कता का रुख अपनाया हुआ है. उनका मानना है कि मुद्रास्फीति को लेकर बढ़ती चिंता की वजह से केंद्रीय बैंक रेपो दर बढ़ा सकता है.

VIDEO: शेयर बाजार में गिरावट

वैश्विक स्तर पर एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई, जबकि शुरुआती कारोबार में यूरोपीय बाजार भी नीचे चल रहे हालांकि, सरकार ने सोमवार को बजटीय प्रस्तावों लेकर चिंता को नजरअंदाज करते हुए कहा कि शेयरों में गिरावट वैश्विक बाजारों के रुख की वजह से है. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘बांड प्राप्ति तथा कमजोर वैश्विक बाजारों से यहां बिकवाली का सिलसिला जारी है. बाजार की निगाह अब रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक समीक्षा बैठक पर है. हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों के मोर्चे पर यथास्थिति कायम रखेगा, लेकिन सरकार की राजकोषीय नीतियों पर किसी तरह की टिप्पणी से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.’’


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