चना दाल की बढ़ती कीमत सरकार के लिए बनी सिरदर्द

चना दाल की बढ़ती कीमत सरकार के लिए बनी सिरदर्द

नई दिल्ली:

दाल के बढ़ते संकट के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने अरहर की नई वेराइटी विकसित की है, जो सिर्फ 120 दिनों में तैयार हो जाती है, लेकिन अरहर की पैदावार बढ़ाने की कवायद के बीच चना दाल अब सरकार के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है.

सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली कृषि मंत्री के साथ पूसा कैंपस पहुंचे. उन्होंने 'पूसा अरहर 16' नाम की अरहर की एक नई वेराइटी का फील्ड ट्रायल करीब से देखा. अरहर की वेराइटी 120 दिन में तैयार हो जाती है, जबकि आम अरहर की फसल को तैयार होने में 175 दिन से 240 दिन लग जाते हैं.

इस मौके पर जेटली ने विश्वास जताया कि इस प्रयोग से देश में अरहर की पैदावार बढ़ाने में मदद मिलेगी. जेटली ने माना कि दाल को लकेर सरकार लंबे समय से चिंतित है. उन्होंने कहा, 'पिछले दो साल से दालों को लेकर सरकार में विशेष चिंता है. कारण स्पष्ट है- हमारे यहां दाल की पैदावार भी सबसे ज़्यादा है, खपत भी और आयात भी. ये एक प्राइस सेंसिटिव कमोडिटी है. इस मौके पर कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा, 'अरहर की नई वेराइटी अगले साल जनवरी तक आ जाएगी और अगले खरीफ सीज़न में किसानों के पास पहुंच जाएगी. इससे अरहर दाल की पैदावार बढ़ेगी.'

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एक तरफ जहां सरकार अरहर की पैदावार बढ़ाने की कोशिश में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ चना दाल महंगी होती जा रही है. पिछले एक हफ्ते में चना दाल देश के 18 शहरों में 5 रुपये किलो या उससे ज़्यादा मंहगी हुई है. सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी मैंगलोर में दर्ज की गई है, जहां चना दाल के दाम एक हफ़्ते में 43 रुपये किलो बढ़ गए.

खाद्य मंत्रालय के पास मौजूद ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक चना दाल लखनऊ के खुदरा बाज़ार में 150 रुपये प्रति किलो की रेट पर बिक रही है, जबकि मुंबई और बेंगलुरु में इसकी कीमत 146 रुपये किलो, कानपुर में 145 रुपये और दिल्ली के खुदरा बाज़ार में 144 रुपये प्रति किलो है. जाहिर है...कोशिशों के बावजूद त्योहारों के सीज़न में चना दाल के दाम एक बड़ा संकट बने हुए हैं.