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सांठ-गांठ से मामले की जांच पर नहीं पड़ेगा असर : सीबीआई

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खास बातें

  1. सीबीआई ने कहा कि 2-जी लाइसेंस आवंटित करने में हुई गड़बड़ी के कारण सरकारी खजाने को 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। एजेंसी ने कहा कि उसके एक वकील और मामले के एक आरोपी के बीच कथित सांठ-गांठ से उसकी जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
नई दिल्ली:

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को कहा कि 2-जी लाइसेंस आवंटित करने में हुई गड़बड़ी के कारण सरकारी खजाने को 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। एजेंसी ने कहा कि उसके एक वकील और मामले के एक आरोपी के बीच कथित सांठ-गांठ से उसकी जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष पेश होते हुए सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने यह भी संकेत दिया कि एजेंसी के वकील एके सिंह और मामले के आरोपी यूनीटेक के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा के बीच कथित बातचीत को रिकॉर्ड किया जाना किसी सरकारी एजेंसी का कार्य नहीं हो सकता।

बताया जाता है कि वकील और चंद्रा ने कथित रूप से अभियोजन पक्ष की रणनीति पर चर्चा की थी। जेपीसी अध्यक्ष पीसी चाको ने मंगलवार को हुई समिति की बैठक के बाद बताया कि सीबीआई निदेशक ने स्पष्ट किया कि एके सिंह 2-जी मामले में शामिल सरकारी वकीलों में से एक हैं जो मुख्य वकील यूयू ललित की मदद कर रहे हैं। ललित की नियुक्ति उच्चतम न्यायालय ने की है।

सिन्हा ने कहा कि सिंह इस मामले में शामिल सरकारी वकीलों में से एक थे इसलिए (सिंह और चंद्रा के बीच कथित सांठ-गांठ से) इस मामले की जांच पर कोई असर नहीं पड़ा है।


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यह पूछे जाने पर आवंटित किए गए 2-जी स्पेक्ट्रम लाइसेंसों की संख्या 122 थी तो ऐसे में कितना नुकसान हुआ होगा, सीबीआई ने कहा कि 30984.55 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

चाको ने कहा कि 22 हजार करोड़ रुपये लाइसेंस देने में हुआ नुकसान है जबकि 8000 करोड़ का नुकसान पात्रता के आंकड़े के बाद अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन करने के कारण हुआ।



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