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देश में चालू खाते का घाटा बढ़कर पहली तिमाही में 14.3 अरब डालर हुआ

घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 2.4 प्रतिशत, पिछले साल इसी तिमाही में चालू खाते का घाटा 0.4 अरब डालर या जीडीपी का 0.1 प्रतिशत था

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देश में चालू खाते का घाटा बढ़कर पहली तिमाही में 14.3 अरब डालर हुआ

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. सालाना आधार पर कैड में वृद्धि के कारण व्यापार घाटा बढ़ा
  2. वस्तुओं के निर्यात के मुकाबले आयात बढ़ने के कारण भी घाटा
  3. विदेशी मुद्रा के प्रवाह और निकासी के अंतर को बताता है कैड
मुंबई: व्यापार घाटा बढ़ने से देश का चालू खाते का घाटा बढ़ा है. वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में यह तेजी से बढ़कर 14.3 अरब डालर हो गया. यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.4 प्रतिशत है.

वित्त वर्ष 2016-17 की इसी तिमाही में चालू खाते का घाटा (कैड) 0.4 अरब डालर या जीडीपी का 0.1 प्रतिशत था. मार्च 2017 को समाप्त तिमाही में यह 3.4 अरब डालर (0.6 प्रतिशत) था.

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रिजर्व बैंक के अनुसार, ‘‘सालाना आधार पर कैड में वृद्धि का मुख्य कारण व्यापार घाटा बढ़ना है. वस्तुओं के निर्यात के मुकाबले आयात बढ़ने के कारण यह 41.2 अरब डालर रहा.’’ सामान्य रूप से कैड विदेशी मुद्रा के प्रवाह और निकासी के अंतर को बताता है.
(इनपुट भाषा से)

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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