यह ख़बर 09 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

अमेरिकी संकट के चलते दुनियाभर के बाजार गिरे

अमेरिकी संकट के चलते दुनियाभर के बाजार गिरे

खास बातें

  • अमेरिकी संकट का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों में दिख रहा है। अमेरिका के फिर से मंदी में चले जाने के डर से निवेशक जमकर बिकवाली कर रहे हैं।
मुम्बई/वाशिंगटन:

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के आश्वासनों के बावजूद अमेरिकी शेयर बाजारों में सोमवार को आई ऐतिहासिक गिरावट के कारण दुनिया में आर्थिक संकट के बादल और गहरा गए हैं। अमेरिकी बाजार में गिरावट का असर मंगलवार को एशियाई बाजारों पर भी पड़ा और यहां के सभी प्रमुख सूचकांकों में चार से नौ फीसदी तक की गिरावट देखी गई। सोमवार को अमेरिका के तीनों प्रमुख सूचकांकों में पांच से सात फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रपति बराक ओबामा के आश्वासनों का बाजार पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ा और डाउ जोंस इंडस्ट्रीयल एवरेज सोमवार को 634 अंक यानी 5.6 फीसदी गिरकर 11 हजार के नीचे पहुंच गया, जो अक्टूबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट थी। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स 500 सूचकांक 6.7 प्रतिशत और नास्डैक 175 अंक यानी 6.9 फीसदी गिरकर 2358 पर पहुंच गया। अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले दो सप्ताहों के दौरान 15 फीसदी की गिरावट आई है। व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में ओबामा ने कहा, "यह कोई मायने नहीं रखता कि कुछ एजेंसियां क्या कह रही हैं। हम हमेशा से 'एएए' अर्थव्यवस्था रहे हैं और रहेंगे।" उन्होंने कहा कि अमेरिका मजबूत वित्तीय स्थिति को हासिल करने का रास्ता खोज लेगा। साख रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स द्वारा शुक्रवार को अमेरिका की साख रेटिंग कम किए जाने के संदर्भ ने उन्होंने कहा कि यह देश की 'समाधान की जा सकने वाली' आर्थिक समस्या है और इसके लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों में राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह कर्ज की सीमा बढ़ाने को लेकर हुई चर्चाओं के बाद उन्होंने हमारी राजनीतिक व्यवस्था की ताकत पर अविश्वास किया इसलिए रेटिंग में कमी की। उन्होंने कहा कि ऐसे खतरे यूरोप, जापान और मध्यपूर्व में आर्थिक अस्थिरता के कारण पैदा हुए, जिसने अब बाजार को प्रभावित किया है और उपभोक्ताओं में विश्वास को कम किया है। इससे सुधार की गति धीमी हो गई है। ओबामा ने ताजा आर्थिक संकट के बारे में स्पेन के प्रधानमंत्री जोस लुइस जापाटेरो और इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी से अलग-अलग फोन पर बात की। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया है, "राष्ट्रपति ने स्पेन और इटली द्वारा अपनी मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से निपटने और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने के लिए अपनाए गए उपायों का स्वागत किया।" पर्यवेक्षकों का कहना है कि एस एंड पी द्वारा अमेरिका की साख रेटिंग कम किए जाने से इतना असर नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन बाजार में खरीददारी नहीं हो रही है। आईएनजी निवेश प्रबंधन के संपत्ति आवंटन के प्रमुख पॉल जेमस्की के हवाले से सीएनएन ने कहा, "रेटिंग में कमी को लेकर निवेशकों में एक ही धारणा है पहले शेयर बेचो फिर सवाल करो।" इस गिरावट की आंधी से कुछ शेयर से बच सके हैं। डाउ जोंस 30 और एस एंड पी 500 के सभी शेयरों में गिरावट देखी गई। बैंक ऑफ अमेरिका के शेयरों में 20 फीसदी और सिटी समूह और मोर्गन स्टैनले के शेयरों में 15-15 फीसदी की गिरावट आई। अमेरिकी बाजारों में गिरावट का असर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों पर भी देखा गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 472.31 अंक गिरकर 16517.87 पर जबकि निफ्टी 170.60 अंक गिरकर 4947.90 पर खुला। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में जापान का निक्केई 4.8 फीसदी, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7.3 फीसदी और हांगकांग का हांग सेंग करीब छह फीसदी गिर गए।

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