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केंद्र की हरी झंडी मिलते ही रिजर्व बैंक चलाएगा प्लास्टिक के नोट

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  1. अगर केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी, तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) देश में प्लास्टिक के नोट चलाने का प्रयोग शुरू देगा। सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद केंद्रीय बैंक सबसे पहले 10 रुपये के प्लास्टिक के नोट जारी करना चाहता है।
इंदौर:

अगर केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी, तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) देश में प्लास्टिक के नोट चलाने का प्रयोग शुरू देगा। सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद केंद्रीय बैंक सबसे पहले 10 रुपये के प्लास्टिक के नोट जारी करना चाहता है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर डी.सुब्बाराव ने इंदौर से करीब 60 किलोमीटर दूर खुर्दा में एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं को बताया, ‘देश में प्लास्टिक के नोट जारी करने के लिए हम सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। यह मंजूरी मिलने के बाद हम पहले 10 रुपये के नोट किसी विदेशी प्रेस में छपवाकर इनका आयात करेंगे। अगर यह योजना सफल रही, तो हम स्वदेश में भी प्लास्टिक के नोट छापना शुरू कर देंगे।’

देश में जाली नोटों के चलन पर सुब्बाराव ने कहा, ‘जाली नोटों की समस्या मुल्क के सरहदी सूबों में अपेक्षाकृत ज्यादा है।’ उन्होंने कहा कि बैंकिंग तंत्र में नकली नोटों की घुसपैठ रोकने के लिए केंद्रीय बैंक बैंकों से समन्वय स्थापित करते हुए उन्हें जाली मुद्रा को जमा करके पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कराने को कह रहा है।


सुब्बाराव ने कहा कि जाली नोटों के मामलों की जांच के लिये बड़े शहरों में विशेष पुलिस थाने होने चाहिये। इन थानों में प्रशिक्षित अफसरों की तैनाती की जानी चाहिये।

उन्होंने देश के निवेशकों, खासकर ग्रामीण लोगों से अपील की कि वे उंची दरों पर ब्याज अदायगी का दावा करके पैसा बढ़ाने का लालच देने वाली धोखेबाज वित्तीय इकाइयों से सावधान रहें।

सुब्बाराव ने कहा, ‘चिट फंड अवैधानिक नहीं हैं। लेकिन पैसा बढ़ाने का दावा करने वाली कुछ ऐसी वित्तीय योजनाएं जरूर गैरकानूनी हैं, जिन्हें लोग चिट फंड समझते हैं। हम इस सिलसिले में लोगों में जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।’

उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश सरकारों को ऐसी गैरकानूनी वित्तीय योजनाओं पर पैनी निगाह रखनी चाहिए और इनमें गड़बड़ियां मिलने पर इनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करनी चाहिए।

आरबीआई गवर्नर ने देश में वित्तीय समावेशन के अभियान को तेज गति से आगे बढ़ाए जाने की जरूरत पर जोर देते हुए एक अनुमान के हवाले से बताया कि फिलहाल मुल्क के महज एक तिहाई गांवों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच है।

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उन्होंने एक सवाल पर कहा कि बैंकों को चाहिए कि वे योग्य विद्यार्थियों को शिक्षा ऋण देने में ‘उदारता’ बरतें। इसके साथ ही, गांवों में खाते खोलने की प्रक्रिया को सरल बनाएं।

सुब्बाराव ने मध्यप्रदेश की तारीफ करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों का पैसा सीधे उनके खातों में जमा करने के मामले में इस सूबे की स्थिति देश के कई राज्यों से बहुत अच्छी है।



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