NDTV Khabar

जमा पूंजी बढ़ाने के लिए FD या PPF में बेहतर कौन?

एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर कर चुकाना होता है जबकि पीपीएफ में मिलने वाले पैसे पर कई टैक्स नहीं देना होता. यानि यह टैक्स से पूरी तरह मुक्त होता है.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
जमा पूंजी बढ़ाने के लिए FD या PPF में बेहतर कौन?

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली: आम तौर पर पीपीएफ और एफडी मुनाफे या कहें लाभ देने में लगभग समान माने जाते रहे हैं. इनमें मुख्य अंतर यह होता है कि पीपीएफ की अवधि 15 साल होती है जबकि एफडी की एक महीने से लेकर एक साल या 5 साल या कुछ भी हो सकती है. टैक्स छूट की बात करें तो दोनों पर 80 सी के अनुसार छूट मिलती है, लेकिन यादे रहे, एफडी में पांच साल का लॉक-इन पीरियड होने पर ही छूट मिलती है, इससे कम अवधि की एफडी पर नहीं. एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर कर चुकाना होता है जबकि पीपीएफ में मिलने वाले पैसे पर कई टैक्स नहीं देना होता. यानि यह टैक्स से पूरी तरह मुक्त होता है.

पीपीएफ पर 3 वर्ष बाद लोन लेना संभव है जबकि एफडी पर लोन नहीं मिलता. पीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज की बात करें तो सरकार द्वारा घोषित होती है और बदलती भी रहती है. वर्तमान में यह दर 7.6 प्रतिशत है. एफडी पर ब्याज दर सालाना बदलती रहती है जो कि समय और बैंक के हिसाब से अलग अलग होती है. फिर भी कुछ ऐसी बाते हैं जो जो पीपीएफ को एफडी से अलग करती है.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ अकाउंट पोस्ट ऑफिस , स्टेट बैंक आफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक के अलावा कई निजी बैंकों की चुनिंदा शाखाओं में खुलवाए जा सकते हैं. यह अकाउंट कम से कम 15 वर्ष के लिए खोला जाता है और इसकी सीमा 5 वर्ष और बढ़ाई जा सकती है. इसे समय से पहले बंद नहीं कराया जा सकता है, यह सिर्फ मृत्यु होने की स्थिति में ही संभव है. इस अकाउंट में प्रतिवर्ष न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं.

पढ़ें : अब बचत खाते जैसा हो जाएगा आपका PPF अकाउंट

एक समय फिक्स डिपाजिट निवेश का सबसे बढ़िया और अच्छा विकल्प होने के साथ साथ सुरक्षित निवेश का बड़ा माध्यम रहा है. लेकिन पिछले कुछ सालों में एफडी पर मिलने वाला ब्याज लगातार कम होता जा रहा है. इससे बैंकों में एफडी को लेकर रुचि कुछ कम हुई है. बैंकों के ब्याज दरों में कमी के कारण लोगों का पैसा जो पहले 4-5 सालों में दोगुना होता था वह अब इस अवधि में लगभग डेढ़ गुना ही हो पाता है. कुछ बैंक अभी भी अच्छी ब्याज दर दे रहे हैं. लेकिन यहां पर आम बैंकों बात हो रही है. फिर बता दें कि एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है.

पढ़ें : जानें सरकार की छोटी बचत योजनाओं में कितना मिल रहा है ब्याज, आप भी उठाएं लाभ

एफडी पर ब्याज से होने वाली आमदनी पर टैक्स की गणना संग्रहण आधार पर की जाती है न कि उस समय करदाता को प्राप्त वास्तविक रिटर्न पर किया जाता है. एफडी कितने दिनों की है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, यदि किसी शेड्यूल बैंक से 5 साल की एफडी हुई है तो आयकर अधिनियम 80 सी के तहत करछूट का लाभ मिलता है. एफडी पर मिलने वाले ब्याज को आम डिपाजिट की ही तरह आयकरदाता के टैक्स स्लैब के अनुसार ही अदा करना होता है.

पढ़ें : PPF समेत कई छोटी बचत योजनाओं पर अब कम मिलेगा ब्याज- 10 खास बातें

इससे यह साफ है कि वर्तमान में यदि आप पैसे को किसी भी सूरत में ब्लॉक नहीं करना चाहते हैं और अपनी शर्तों पर उसे समय के हिसाब से प्रयोग में लाना चाहते हैं तब एफडी से बेहतर कुछ नहीं. यहां पर आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा जब चाहें निकाल सकते हैं और आप अपने पैसे का प्रयोग कहीं भी कर सकते हैं. यानी एफडी निवेश और सुरक्षित ब्याज कमाने का ऐसा माध्यम है जहां पर आप ब्याज के साथ-साथ कैश की व्यवस्था का प्रबंध बनाए रखते हैं.

पढ़ें : पीपीएफ (PPF) और पीएफ (EPF) : दोनों में हैं कुछ बेसिक फर्क, जानें किससे क्या नफा...

टिप्पणियां
उधर, पीपीएफ के साथ यह अच्छाई है कि यहां एफडी से ज्यादा ब्याज मिलता है. पैसा सुरक्षित है, लेकिन आप अपनी जरूरतों के हिसाब से इसे समय पर निकाल नहीं सकते हैं. जरूरत पर भी पैसा निकालने की प्रक्रिया जटिल ही है. सरकारी बैंकों और सरकारी कार्यालयों में पैसा जमा होने पर थोड़ी दिक्कत का सामना करना ही होगा. लेकिन यहां ऐसा फायदा है कि पैसा पूरा और समय पर ब्याज सहित खाते में दिखता रहता है. और समयावधि पूरी होने पर खाते में इसे लेकर प्रयोग में ला सकते हैं.

अब यह साफ है कि पैसा लगाकर आप यदि कुछ सालों के लिए भूल सकते हैं तब पीपीएफ से बेहतर कुछ नहीं और अगर आप इस पैसे का इस्तेमाल कभी जरूरत पर करना चाहते हैं तब एफडी से बेहतर कुछ नहीं.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement