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सस्ते लोन की उम्मीदों पर फिरा पानी? फिर चुभने लगा महंगाई का डंक...

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सस्ते लोन की उम्मीदों पर फिरा पानी? फिर चुभने लगा महंगाई का डंक...

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली: खाने-पीने की चीजें और ईंधन महंगा होने से जहां थोक मुद्रास्फीति फरवरी में उछलकर 39 माह के उच्च स्तर 6.55 प्रतिशत पर पहुंच गई, वहीं खुदरा मुद्रास्फीति भी बढ़कर 3.65 प्रतिशत हो गई. मुद्रास्फीति में वृद्धि को देखते हुए रिजर्व बैंक आगामी 6 अप्रैल को होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों में कटौती से बच सकता है.

सरकारी आंकड़े के अनुसार हालांकि, सब्जी एवं दाल के भाव इस दौरान नरम रहे, जिससे ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली. थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जनवरी में 5.25 प्रतिशत, जबकि उपभोक्ता मुद्रास्फीति 3.17 प्रतिशत थी. थोक मूल्य सूचकांक आंकड़ों के अनुसार फरवरी में खाद्य मुद्रास्फीति तेजी से बढ़कर 2.69 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि ईंधन खंड में 21.02 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

आलोच्य महीने में अनाज, चावल और फलों की महंगाई दर बढ़ी जबकि सब्जी के दाम में 8.05 प्रतिशत की गिरावट आई. थोक मूल्य सूचकांक के दिसंबर के संशोधित आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में मुद्रास्फीति 3.68 प्रतिशत हो गई जो कि प्रारंभिक आंकड़ों में 3.39 प्रतिशत थी. वहीं फल, चीनी, चॉकलेट एवं मिठाई जैसी खाने-पीने की चीजें महंगी होने से खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 3.65 प्रतिशत पर पहुंच गई जो चार महीने का उच्च स्तर है. इससे पहले जनवरी में यह 3.17 प्रतिशत पर कई सालों के निम्न स्तर पर रही.
(इनपुट भाषा से)


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