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केंद्र सरकार के 47 विश्वविद्यालयों के अध्यादेश और अधिनियम हिन्दी में उपलब्ध नहीं

देशभर में पिछले 100 वर्षों के दौरान स्थापित 47 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के अध्यादेश और अधिनियम अब तक हिन्दी में उपलब्ध नहीं हो पाये हैं. हिंदी में कामकाज को बढ़ावा देने की सरकार की पहल का केन्द्रीय विश्वविद्यालयों पर असर के बारे में किये गये अध्ययन में चौंकाने वाले परिणाम सामने आये हैं.

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केंद्र सरकार के 47 विश्वविद्यालयों के अध्यादेश और अधिनियम हिन्दी में उपलब्ध नहीं

कई केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कानून हिन्दी में उपलब्ध नहीं

देशभर में पिछले 100 वर्षों के दौरान स्थापित 47 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के अध्यादेश और अधिनियम अब तक हिन्दी में उपलब्ध नहीं हो पाये हैं. हिंदी में कामकाज को बढ़ावा देने की सरकार की पहल का केन्द्रीय विश्वविद्यालयों पर असर के बारे में किये गये अध्ययन में चौंकाने वाले परिणाम सामने आये हैं.

सामाजिक सरोकारों से जुड़ी संस्था मीडिया स्टडीज ग्रुप द्वारा जारी की गयी अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक केवल तीन केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के संचालन संबंधी अधिनयम और अध्यादेश विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर हिन्दी में उपलब्ध है. जबकि महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय सहित 11 विश्वविद्यालय ही अपने अधिनियम और अध्यादेशों का हिन्दी में आंशिक अनुवाद कर सके हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय साल 2013 में स्थापित होने के बाद अब तक अपनी बेवसाइट नहीं बना पाने वाला एकमात्र केन्द्रीय विश्वविद्यालय है. 

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केवल 29 विश्वविद्यालयों की हिंदी में वेबसाइट
संस्था के प्रमुख अनिल चमड़िया ने बताया कि 46 विश्वविद्यालयों ने अपनी बेवसाइटें तो तैयार कर ली है लेकिन इनमें से केवल 29 विश्वविद्यालयों की हिन्दी में वेबसाइट है. उन्होंने कहा, 'किसी भी संस्थान की बुनियाद में उस संस्था के नियम कानून, गठन की प्रक्रिया और संचालन के तौर तरीके होते हैं. लेकिन देश के विश्वविद्यालयों की स्थिति यह है कि उनके द्वारा जारी किए जाने वाले अध्यादेश व उनकी स्थापना के अधिनियम भी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं है. इससे लगता है कि इन संस्थानों के उद्देश्यों में सिर्फ भारतीय भाषाओं को जानने वालों के साथ संवाद स्थापित करने की योजना शामिल ही नहीं होती है. अध्यादेश व अधिनियम को हिन्दी में तैयार करने की संवैघानिक औपचारिकता को भी पूरा करने की जरूरत विश्वविद्यालय महसूस नहीं करते हैं. लगता है कि शैक्षणिक संस्थानों के भीतर भाषा का ढांचा जिस तरह का अंग्रेजी शासन काल में बना था वह अपने मूलरूप में बना हुआ हैं.'

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हिमाचल प्रदेश एवं राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय, सिक्किम विश्वविद्यालय, बिहार स्थित नालंदा विश्वविद्यालय और दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय की वेबसाइट भले ही हिंदी में नहीं बन पायी हो लेकिन दोनों विश्वविद्यालय अपने अधिनयम एवं अध्यादेशों का शत प्रतिशत हिंदी रूपांतरण कर चुके हैं. (इनपुट  न्यूज  एजेंसी भाषा से भी)


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