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जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय का सौर ऊर्जा संस्‍थान से करार

इस क़रार से जेएमआई के छात्र एनआईएसई में अध्ययन और परीक्षण के काम कर सकेंगे. इससे जेएमआई के छात्रों के नौकरियों के अवसर भी बढ़ेंगे.

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय का सौर ऊर्जा संस्‍थान से करार

इस क़रार से जेएमआई के छात्र एनआईएसई में अध्ययन और परीक्षण के काम कर सकेंगे

नई दिल्‍ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्‍वविद्यालय ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय उद्देश्य में योगदान के लिए सरकार के राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) के साथ मंगलवार को एक क़रार पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत दोनों पक्ष हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों को आपस में साझा करेंगे. इस बारे में जेएमआई के इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग विभाग और एनआईएसई के बीच औपचारिक क़रार हुआ है.

डॉ. अहतेशामुल हक़ की अध्यक्षता वाले एडवांस पावर इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लैब को नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से अनुसंधान एवं विकास अनुदान मिला है. इस संबंध में समझौता पत्र पर जेएमआई के रजिस्ट्रार ए पी सिद्दीकी और एनआईसीई के महानिदेशक एके त्रिपाठी ने हस्तारक्षर किए. इस मौके पर जेएमआई के वाइस चांसलर प्रो. तलत अहमद, कंट्रोलर ऑफ एक्जामिनेशन डॉ. एएए फैज़ी, आर्किटेक्चर विभाग की डीन प्रो. हिना ज़िया और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. ज़ैड ए जाफरी मौजूद थे. जेएमआई की यह मशहूर लैब अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है. यह पूरी लैब सौर ऊर्जा से चलती है.

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इस क़रार से जेएमआई के छात्र एनआईएसई में अध्ययन और परीक्षण के काम कर सकेंगे. इससे जेएमआई के छात्रों के नौकरियों के अवसर भी बढ़ेंगे. इस मौक़े पर जेएमआई के वाइस चांसलर ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए एक अहम मुक़ाम है, क्योंकि इससे न सिर्फ दोनों पक्षकारों को लाभ मिलेगा बल्कि देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के प्रयासों में मददगार साबित होगी. रजिस्ट्रार एपी सिद्दीकी ने कहा कि इस समय दुनिया में सौर ऊर्जा अनुसंधान का सबसे अगुवाई वाला क्षेत्र है. जेएमआई में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की सराहना की.

एके त्रिपाठी ने कहा कि जेएमआई के छात्रों के लिए परीक्षण, अनुसंधान एवं उपकरणों की सुविधाएं मुहैया कराने में एनआइएसई को बहुत प्रसन्नता हो रही है. उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों के बीच हुआ यह क़रार देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा.


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