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अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी वे 7 बातें जो आज भी दूसरों के लिए बनी हुई हैं मिसाल

देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं अटल बिहारी वाजपेयी जिन्होंने यूएन में हिन्दी में दिया था संबोधन

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अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी वे 7 बातें जो आज भी दूसरों के लिए बनी हुई हैं मिसाल

अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 93वां जन्मदिन है. अटल बिहारी देश के उन चुनिन्दा राजनेताओं में से हैं जिन्हें दूरदर्शी माना जाता है. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में ऐसे कई फैसले लिए जिसने देश और उनके खुदके राजनीतिक छवि को काफी मजबूती दी. आज हम आपको अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी ऐसी ही 7 बातों को बताने जा रहे हैं, जिनका उनकी सफलता में काफी बड़ा हाथ रहा. आइये जानते हैं कौन सी वह बातें.....

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पोखरण में परमाणु परीक्षण
उस दौर में जब देश की सत्ता संभालने वाले ज्यादातर प्रधानमंत्री ने भारत को विश्वशक्ति बनाने के लिए परमाणु बम का परीक्षण करने की बात कर रहे थे, वहीं अटल बिहारी वाजपेयी ने लीक से हटकर पहली बार पोखरण में एक के बाद एक पांच परमाणु बम परीक्षण करने का माद्दा दिखाया. उन्होंने बड़े ही गोपनीय तरीके से इस परीक्षण को अंजाम दिलाया. 

बने पहले गैर- कांग्रेसी प्रधानमंत्री 
अटल बिहारी वाजपेयी देश के पहले ऐसे गैर- कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने जिन्होंने बतौर प्रधानमंत्री पांच साल सरकार चलाई. इससे पहले ऐसा कोई भी बड़ा नेता नहीं कर पाया था.

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पहले ऐसे सांसद जो चार राज्यों से चुने गए
अटल बिहारी वाजपेयी इतने चर्चित और लोकप्रिय थे कि उन्होंने एक अलग कीर्तिमान स्थापित किया. वह पहले ऐसे सांसद बने जिन्हें चार राज्यों यूपी, एमपी, गुजरात और दिल्ली से चुना गया. 

पहली बार बनाई गठबंधन की सरकार
अटल बिहारी वाजपेयी देश के पहले ऐसे राजनेता थे जिन्होंने पहली बार गठबंधन की सरकार बनाई. न सिर्फ उन्होंने सरकार बनाई बल्कि सभी को साथ लेकर भी चले. उनके इस सफल प्रयास ने भारतीय राजनीति को हमेशा हमेशा के लिए बदलकर रख दिया. 

यूएन में हिन्दी में संबोधित किया
अटल बिहारी वाजपेयी का हिन्दी के प्रति लगाव सबसे ज्यादा था. यही वहज थी कि जब वह बतौर पीएम यूएन में संबोधन के लिए गए तो उन्होंने वहां हिन्दी भाषा में ही संबोधित किया. वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे. 

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मिला भारत रत्न
वर्ष 2015 में उन्हें भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. उनके साथ-साथ पंडित मदन मोहन मालवीय को भी यह सम्मान दिया गया. 

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