UGC को खत्म कर नया एजुकेशन सिस्टम बनाने के लिए सरकार ने मांगे सुझाव 

इसे लेकर एचआरडी मंत्रालय ने विभिन्न शिक्षाविदों, शिक्षा से जुड़े पक्षकारों एवं आम लोगों से सुझाव मांगे हैं.

UGC को खत्म कर नया एजुकेशन सिस्टम बनाने के लिए सरकार ने मांगे सुझाव 

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की फाइल फोटो

खास बातें

  • सात जुलाई तक सुझाव दे सकते हैं आम लोग
  • मिले सुझाव के आधार पर ही होगा फैसला
  • बीते कुछ समय में कई बड़े पहल की बात सामने आई है
नई दिल्ली:

केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय(एचआरडी) ने UGC को खत्म कर एक नए एजुकेशन सिस्टम को शुरू करने की तैयारी में है. इसे लेकर एचआरडी मंत्रालय ने विभिन्न शिक्षाविदों, शिक्षा से जुड़े पक्षकारों एवं आम लोगों से सुझाव मांगे हैं. गौरतलब है कि सुझाव देने की समय सीमा 7 जुलाई 2018 तक है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था बनाने की दिशा में नियामक एजेंसियों में सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पहल की है. इस उद्देश्य से नियामक ढांचा तैयार करने और यूजीसी अधिनियम के पुनर्गठन के लिये बजट में भी घोषणा की गई थी.

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ध्यान हो कि सरकार ने उच्च शिक्षा में सुधार की कवायद के तहत कई कदम पहले ही उठाये गए हैं जिसमें नैक सुधार, विश्वविद्यालयों को ग्रेड के अनुरूप स्वायत्ता संबंधी नियमन, कॉलेजों को स्वायत्त दर्जा प्रदान करना, दूरस्थ शिक्षा के लिये नियमन, आनलाइन डिग्रियों के नियमन शामिल हैं. एचआरडी मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि यह मसौदा अधिनियम सरकार के नियामक प्रणाली में सुधार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है. इसमें शिक्षा प्रणाली के समग्र विकास और अधिक स्वायत्ता प्रदान करने की पहल पर जोर दिया गया है.

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इसमें मुख्य रूप से अनावश्यक जांच की व्यवस्था को समाप्त कर मेधा के आधार पर निर्णय लेने और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है. गौरतलब है कि यूजीसी ने कुछ दिन पहले ही कॉलेज को लेकर नया नियम लागू किया था. इसके तहत यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में टीचरों की भर्ती व प्रमोशन के लिए न्‍यूनतम योग्‍यता को लेकर नए नियम जारी कर दिए हैं. इन नए नियमों के मुताबिक अब पीएचडी को अनिवार्य कर दिय गया है.

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VIDEO: यूजीसी ने दी शिक्षण संस्थानों क आजादी.

साथ ही पीएचडी और एमफिल कर रहे स्‍टूडेंट को भी भत्ता मिलेगा. ऐसा उच्‍च शिक्षा के स्‍टैंडर्ड को बनाए रखने के लिए किया गया है. UGC को उम्‍मीद है कि इससे कॉलेज और विश्‍वविद्यालयों में अच्‍छे व टैलेंटेड टीचरों को बनाए रखने और आकर्षित करने में मदद मिलेगी. (इनपुट भाषा से)