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कुछ ऐसा था चंद्रशेखर के 'आजाद' बनने का सफर, पहली बार गिरफ्तार होने पर मिली थी 15 कोड़ों की सजा, जानिए 10 बातें

Chandra Shekhar Azad: चंद्रशेखर आजाद की जयंती के मौके पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है. महान क्रांतिकारी आजाद ने देश की आजादी के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी थी.

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कुछ ऐसा था चंद्रशेखर के 'आजाद' बनने का सफर, पहली बार गिरफ्तार होने पर मिली थी 15 कोड़ों की सजा, जानिए 10 बातें

Chandra Shekhar Jayanti: चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था.

नई दिल्ली:

Chandra Shekhar Azad Jayanti: महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की आज जयंती है. चंद्रशेखर आजाद का जन्म (Chandra Shekhar Azad Birthday) 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ था. आज उनकी जयंती के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने लिखा, '' भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) को उनकी जयंती पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि. वे एक निर्भीक और दृढ़ निश्चयी क्रांतिकारी थे, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी थी. उनकी वीरता की गाथा देशवासियों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है'  देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले चंद्रशेखर आजाद के कई दिलचस्प किस्से हैं. उनमें से एक किस्सा तक का है जब 1920 में 14 वर्ष की आयु में चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) गांधी जी के असहयोग आंदोलन से जुड़े थे. जिसके बाद वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए. जहां उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और 'जेल' को उनका निवास बताया. आजाद को 15 कोड़ों की सजा दी गई थी. आज चंद्रशेखर आजाद की जयंती के मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़ी 10 बाते बता रहे हैं.
 

चंद्रशेखर आजाद से जुड़ी 10 बातें
 

1. आजाद का प्रारम्भिक जीवन आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित भाबरा गांव में बीता था. बेहद कम उम्र में चंद्रशेखर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे.


2. चंद्रशेखर की मां उन्हें संस्कृत का शिक्षक बनाने चाहती थी. इसीलिए आजाद 14 वर्ष की आयु में बनारस गए और वहां एक संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई की. 

3. बताया जाता है कि चंद्रशेखर आजाद की निशानेबाजी बहुत अच्छी थी. दरअसल इसकी ट्रेनिंग उन्होंने बचपन में ही ले थी. 

4. पहली बार गिरफ़्तार होने पर उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई. हर कोड़े के वार के साथ उन्होंने, 'वन्दे मातरम्‌' और 'महात्मा गांधी की जय' का स्वर बुलंद किया. इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से 'आजाद' पुकारे जाने लगे.

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5. 1922 में चौरी चौरा की घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया तो देश के तमाम नवयुवकों की तरह आज़ाद का भी कांग्रेस से मोहभंग हो गया. जिसके बाद पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, शचीन्द्रनाथ सान्याल योगेशचन्द्र चटर्जी ने 1924 में उत्तर भारत के क्रान्तिकारियों को लेकर एक दल हिन्दुस्तानी प्रजातान्त्रिक संघ का गठन किया. चन्द्रशेखर आज़ाद भी इस दल में शामिल हो गए.

6. आजाद रामप्रसाद बिस्मिल के क्रांतिकारी संगठन हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (एचआरए) से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई. उन्होंने सरकारी खजाने को लूट कर संगठन की क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाना शुरू कर दिया. उनका मानना था कि यह धन भारतीयों का ही है जिसे अंग्रेजों ने लूटा है. रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद ने काकोरी कांड (1925) में सक्रिय भाग लिया था.

7. चंद्रशेखर आजाद ने 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस ऑफिर एसपी सॉन्डर्स को गोली मारकर लाला लाजपत राय की मौत का बदला लिया था. 

8. साण्डर्स की हत्या के बाद लाहौर में जगह-जगह परचे चिपका दिए गए, जिन पर लिखा था- लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला ले लिया गया है. 

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9. चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में सुखदेव और अपने एक अन्य और मित्र के साथ योजना बना रहे थे. अचानक अंग्रेज पुलिस ने उनपर हमला कर दिया. आजाद ने पुलिस पर गोलियां चलाईं जिससे कि सुखदेव (यह वे सुखदेव नहीं हैं जो भगत सिंह के साथ फांसी पर चढ़ाए गए थे) वहां से बचकर निकल सके. पुलिस की गोलियों से आजाद बुरी तरह घायल हो गए थे. वे सैकड़ों पुलिस वालों के सामने 20 मिनट तक लोहा लेते रहे. उन्होंने संकल्प लिया था कि वे न कभी पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी. इसीलिए अपने संकल्प को पूरा करने के लिए अपनी पिस्तौल की आखिरी गोली खुद को मार ली और मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी.

10. चंद्रशेखर आजाद ने कहा था-
दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे,
आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे.



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