Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com
NDTV Khabar

पिता का बेटे को IAS बनाने का सपना, चाचा के सहारे हुआ साकार

सिविल सर्विसेज परीक्षा में रैंक 26 लाकर आईएएस बने हिमांशु नागपाल की कहानी मुश्किलों से जूझते नौजवानों के लिए प्रेरणा

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
पिता का बेटे को IAS बनाने का सपना, चाचा के सहारे हुआ साकार

अपने चाचा के साथ हिमांशु नागपाल.

खास बातें

  1. हॉस्टल में दाखिला कराके लौटे पिता की रास्ते में हो गई थी मौत
  2. पिता के निधन के दो साल बाद ही बड़े भाई का भी देहांत हो गया
  3. चाचा ने हर विपरीत स्थिति में सहारा और मार्गदर्शन दिया
नई दिल्ली:

अपनी पहली कोशिश में ही इस बार की सिविल सर्विसेज परीक्षा में रैंक 26 लाकर आईएएस बनने वाले हिमांशु नागपाल की कहानी मुश्किलों से जूझते नौजवानों के लिए एक प्रेरणा है. साथ ही मौजूदा समाज के नाम एक संदेश भी कि कैसे एक चाचा ने आगे बढ़कर सहारा दिया और बेटे के लिए एक पिता के देखे सपने को सच किया. ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले हिमांशु ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से बीकॉम किया और फिर थर्ड ईयर से ही सिविल सर्विसेज की तैयारी में जु़ट गए थे, जो तीन साल पहले ही उनका सपना बन चुका था. दरअसल इस सफर की शुरुआत एक बेहद दुखद घटना के बाद हुई जब हॉस्टल में दाखिले के लिए आए पिता की घर वापसी के दौरान ही मृत्यु हो गई. हिमांशु के दिमाग में पिता की कही वह बात घूमती रही कि वे उन्हें एक मुकाम पर देखना चाहते हैं. हरियाणा के हासी में पढ़ाई कर बारहवीं में 97 परसेंट लाने वाले हिमांशु के लिए कॉलेज का माहौल बेहद विचलित कर देने वाला था उन्हें कायदे से इंग्लिश नहीं आती थी, जो आती थी उसके उच्चारण को लेकर वे बेहद घबराए रहते थे.

ऐसे मुश्किल वक्त में चाचा ने उन्हें संबल दिया और इस बात का भरोसा दिलाया कि वे हर वक्त उनके साथ हैं. अगले दो साल में हिमांशु ने खुद को काफी हद तक संभाल भी लिया, लेकिन तभी जीवन में एक दूसरा तूफान आया और बड़े भाई भी गुजर गए. इसके बाद तो थोड़ी देर के लिए हिमांशु को लगा कि अब सब कुछ खत्म हो गया है लेकिन चाचा एक बार फिर चट्टान की तरह साथ खड़े दिखे और हौसला बढ़ाया.


जिंदगी की चुनौतियों को लेकर हिमांशु का मानना है कि यह हर किसी की जिंदगी में होती हैं लेकिन आपको उनसे निकलकर रास्ता बनाना होता है. एनडीटीवी से अपनी बातचीत में हिमांशु कहते हैं कि हर मुश्किल का एक मकसद होता है ताकि आप उससे कुछ सीख सकें.

t84lqo7c

टिप्पणियां

हिमांशु ने शुरुआत में ही ठान लिया था कि उन्हें सिविल सर्वेंट बनना है. इसके लिए उन्होंने खुद से ही रणनीति बनाई और जुट गए. वे अपने टाइम टेबल से किसी भी सूरत में समझौता नहीं करते थे, चाहे वो दिन कितना भी खास क्यों ना हो. एक बार उनका इरादा चार्टेड एकाउंटेंट या फिर कैट की परीक्षा देकर एक वैकल्पिक करिअर चुनने की भी हुआ लेकिन जब पता चला कि कैट की फीस इतनी भारी भरकम होती है कि लोन चुकाने के लिए दो-चार नौकरियां करनी पड़ेंगी तो सिविल सर्विसेज के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा.

प्रीलिम्स और मेंस के बाद जब इंटरव्यू की बारी आई तो हिमांशु की हिम्मत एक बार फिर जवाब देती दिखी, यहां भी चाचाजी ने उन्हें समझाया बुझाया और सीनियर छात्रों ने प्रैक्टिस करने की सलाह दी. आखिरी दो महीने उन्होंने एक सिविल सर्वेंट की तरह रहने और चलने की प्रैक्टिस की और यह मेहनत रंग लाई. इंटरव्यू में हिमांशु को 187 नंबर मिले जिसने रैंक को बेहतर करने में अपनी अहम भूमिका निभाई. हिमांशु सफलता की तीन कुंजी मानते हैं सही दिशा, सही मेहनत और सही मोटिवेशन.



दिल्ली चुनाव (Elections 2020) के LIVE चुनाव परिणाम, यानी Delhi Election Results 2020 (दिल्ली इलेक्शन रिजल्ट 2020) तथा Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


 Share
(यह भी पढ़ें)... इस देश में मनाया जाता है ''Naked Festival'', बेहद ठंडे मौसम में लोग करते हैं ऐसा

Advertisement