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राजस्थान: 'अन्नपूर्णा दूध योजना' शुरू, 62 लाख बच्चों को सप्ताह में तीन दिन मिलेगा दूध

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सरकारी स्कूलों और मदरसों में पढ़ने वाले करीब 62 लाख बच्चों के लिए अन्नपूर्णा दूध योजना शुरू की है.

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राजस्थान: 'अन्नपूर्णा दूध योजना' शुरू, 62 लाख बच्चों को सप्ताह में तीन दिन मिलेगा दूध

सीएम वसुंधरा राजे ने बच्चों को दूध पिलाकर 'अन्नपूर्णा दूध योजना' शुरू की.

खास बातें

  1. राजस्थान के करीब 62 लाख बच्चों को दूध पिलाया जाएगा.
  2. बच्चों के लिए सप्ताह में तीन दिन दूध का वितरण किया जाएगा.
  3. इस साल वसुंधरा राजे ने बजट में इसकी घोषणा की थी.
नई दिल्ली: राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों और मदरसों में पढ़ने वाले करीब 62 लाख बच्चों के लिए अन्नपूर्णा दूध योजना शुरू की है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दहमी कलां के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक स्कूल में जयपुर के विभिन्न स्कूलों से आए बच्चों को अपने हाथों से गर्म दूध पिलाकर अन्नपूर्णा दूध योजना की पूरे प्रदेश में शुरुआत की. उन्होंने कहा कि आज से 8वीं क्लास तक के सभी स्कूलों और मदरसों में पढ़ने वाले हर बच्चे को सप्ताह में तीन दिन ताजा, शुद्ध और पौष्टिक गर्म दूध मिलेगा.

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अन्नपूर्णा दूध योजना के राज्य स्तरीय शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए राजे ने कहा कि यह योजना हमारे खुशहाल और स्वस्थ भविष्य की नींव है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों और मदरसों में पढ़ने वाले करीब 62 लाख बच्चों के लिए सरकार ने अन्नपूर्णा दूध योजना शुरू की है.जब ये बच्चे मिड-डे मील के साथ दूध पीकर स्वस्थ बनेंगे, तो हमारा आने वाला कल बेहतर होगा.मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं भी एक मां हूं और मैं जानती हूं कि अपने बच्चे को तंदुरुस्त देखने का सुख क्या होता है. 

उन्होंने इस योजना में महिला दुग्ध उत्पादक समितियों के जरिए दूध की आपूर्ति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया. उन्होंने महिला दुग्ध उत्पादक समितियों से जुड़ी महिलाओं को दूध की गुणवत्ता बनाए रखने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि अब मिड-डे मील योजना के साथ अन्नपूर्णा दूध को जोड़ने से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पोषण स्तर में सुधार तो होगा ही, स्कूलों में एडमिशन भी बढ़ेगा.

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उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे कई काम किए हैं, जिनसे राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है. बड़ी संख्या में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरा गया है. प्रत्येक पंचायत में आदर्श विद्यालयों से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आया है. 


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