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DU में एड-हॉक वैकेंसियों को बदलकर किया जाएगा परमानेंट, साल भर में भरे जाएंगे सभी खाली पड़े पद

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DU में एड-हॉक वैकेंसियों को बदलकर किया जाएगा परमानेंट, साल भर में भरे जाएंगे सभी खाली पड़े पद
नयी दिल्ली: मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में सभी तदर्थ (एड-हॉक) पांच हजार रिक्त पदों को साल भर के भीतर स्थायी नियुक्तियों में बदलकर इन पदों को भरने का निर्देश दिया गया है.

जावडेकर ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों द्वारा किए गए सवालों के जवाब में इस बात को स्वीकार किया कि देश के 41 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 20 फीसदी पद रिक्त पड़े हैं. उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर स्थिति है.

उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापकों के पांच हजार तदर्थ पद हैं. उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि सालभर के भीतर इन सभी पदों को स्थायी कर इन्हें भरा जाए.

मानव संसाधन विकास मंत्री ने साथ ही बताया कि साथ ही यह भी अनिवार्य कर दिया गया है कि सभी विश्वविद्यालय नियमित आधार पर अपनी वेबसाइट पर रिक्त पदों की सूचना प्रकाशित करेंगे.

'टीचिंग की जॉब को लेकर उत्साह की कमी'
कर्नाटक के विश्वविद्यालय में अध्यापकों के 68 फीसदी और ओडिशा में 95 फीसदी पदों के रिक्त होने संबंधी सदस्यों की चिंताओं पर जावडेकर ने कहा कि विश्वविद्यालयों में अध्यापकों के पदों के रिक्त होने के पीछे कई कारण हैं. उन्होंने बताया कि जब वह विभिन्न शिक्षण संस्थानों का दौरा करते हैं और छात्रों से पूछते हैं कि कौन कौन अध्यापक बनना चाहता है तो उन्हें कोई उत्साहजनक जवाब नहीं मिलता.

उन्होंने कहा, ‘‘ यदि कोई अध्यापक नहीं बनना चाहेगा तो शिक्षा ही नहीं होगी.’’ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और बी आर अम्बेडकर विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति वर्ग के अध्यापकों के पद भारी संख्या में रिक्त होने का जिक्र करते हुए भाजपा के ही एक सदस्य ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय में इस वर्ग के पद रिक्त पड़े हैं और निजी विश्वविद्यालय में तो कोई अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों को लेता ही नहीं है.

इस सदस्य ने कहा कि केंद्र सरकार निजी विश्वविद्यालय को स्वायत्तता देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती.

इस पर जावडेकर ने बताया कि राष्ट्रपति ने पिछले दिनों सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों की एक बैठक बुलायी थी और अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों की नियुक्ति के मामले में विश्वविद्यालयों को भरसक प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं और यह प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है तथा जल्द ही पूरी होगी.


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