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जामिया में शुरू होंगे संस्कृत में अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी कोर्सेज

जेएमआई में संस्कृत विभाग के प्रमुख जी सी पंत ने बताया कि विभाग संस्कृत में चार कार्यक्रम आगे बढ़ा रहा है जिसमें बीए ऑनर्स, एमए संस्कृत, एमफिल और पीएचडी शामिल है.

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जामिया में शुरू होंगे संस्कृत में अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी कोर्सेज

जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) विश्विविद्यालय

जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) विश्विविद्यालय ने संस्कृत विभाग का गठन किया है और चालू शैक्षणिक सत्र से यहां संस्कृत में बीए ऑनर्स, स्नातकोत्तर, पीएचडी पाठ्यक्रम की पढ़ाई शुरू कर रहा है. अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय के रूप में संस्कृत को बढ़ावा देने की जामिया की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. तलत अहमद ने बातचीत में कहा, ‘‘ विश्वविद्यालय में संस्कृत का एक नया विभाग खोला गया है. इसके माध्यम से संस्कृत में स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी कोर्स पढ़ाये जायेंगे.’’ उन्होंने बताया कि संस्कृत शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिये हमने विशेषज्ञों को जोड़ा है और इन विशेषज्ञों के सहयोग से प्राचीन और आधुनिक संस्कृत का समावेश करके पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं.

जेएमआई में संस्कृत विभाग के प्रमुख जी सी पंत ने बताया कि विभाग संस्कृत में चार कार्यक्रम आगे बढ़ा रहा है जिसमें बीए ऑनर्स, एमए संस्कृत, एमफिल और पीएचडी शामिल है. ये कोर्स चालू सत्र से आयोजित किये जायेंगे. पहली बार जामिया में संस्कृत को आगे बढ़ाने की पहल की जा रही है.

उन्होंने कहा, ‘‘हम संस्कृत भाषा में एक सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू करने पर विचार कर रहे हैं. यह अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों के आग्रह पर किया जा रहा है. ’’ पंत ने बताया कि संस्कृत भाषा के इन पाठ्यक्रमों के संदर्भ में काफी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं. स्नातक संस्कृत कोर्स के लिये 64 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिसमें से 31 आवेदन अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों की तरफ से आए हैं. इसके अलावा दो आवेदन कश्मीरी विस्थापितों की ओर से प्राप्त हुए हैं.

उन्होंनें बताया कि इन पाठ्यक्रमों के लिये दाखिला 31 जुलाई से शुरू हो जायेगा.

जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्कृत विभाग के प्रमुख जी सी पंत ने बताया कि इसके अलावा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिये 74 आवेदन प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान समेत दिल्ली में 20 से अधिक संस्थाओं में संस्कृत पढ़ायी जाती है लेकिन संस्कृत बोलना सिखाने का कोई कोर्स नहीं है. हम संस्कृत स्पीकिंग पर एक कोर्स शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं.

संस्कृत पांडुलिपि पर कोर्स शुरू करने पर भी विचार
पंत ने कहा कि भाषा और साहित्य को आगे बढ़ाने में पांडुलिपियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है. संस्कृत से जुड़ी पांडुलिपियां लाखों की संख्या में फैली है. ऐसे में हम जामिया में संस्कृत पांडुलिपि पर एक कोर्स शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं. बीए आनर्स में एक पत्र और एमफिल में एक पत्र इस विषय पर रखेंगे.

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उन्होंने कहा कि हम संस्कृत के क्षेत्र में शोध कार्य को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं और इस दिशा में वैदिक साहित्य, स्थापत्य, मनोविज्ञान, दर्शन जैसे विषयों को स्थान दे रहे हैं. हम एफफिल में कम्प्यूटर और मीडिया को भी जोड़ना चाहते हैं.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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