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जेएनयू ने दी चेतावनी, परीक्षाएं नहीं देने वाले स्‍टूडेंट यूनिवर्सिटी से हो जाएंगे बाहर

हॉस्टल फीस बढ़ोतरी को लेकर एक महीने से आंदोलन कर रहें छात्रों ने परीक्षा बहिष्कार का फैसला किया है.

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जेएनयू ने दी चेतावनी, परीक्षाएं नहीं देने वाले स्‍टूडेंट यूनिवर्सिटी से हो जाएंगे बाहर

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय.

खास बातें

  1. एक महीने से अधिक समय हो गया है छात्रों के आंदोलन को.
  2. यूनिवर्सिटी के 17 सेंटर ने मिलकर लिया है परीक्षा बहिष्कार का फैसला.
  3. अकादमिक कैलेंडर का हवाला दे रहा है विश्विद्यालय प्रशासन.
नई दिल्ली:

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्र संघ 12 दिसंबर से शुरू हो रही सेमेस्टर परीक्षाओं का बहिष्कार करने की योजना बना रहा है. बता दें कि छात्र संघ ऐसा हॉस्टल की फीस बढ़ोतरी के चलते कर रहा है. इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि जो छात्र परीक्षाओं में नहीं बैठेंगे वे यूनिवर्सिटी के छात्र नहीं रह जाएंगे. मंगलवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जारी सर्कुलर के हिसाब से प्रशासन ने छात्रों को चेताया है कि छात्र नियमों के हिसाब से अपने असाइनमेंट, टेस्ट और सत्र के अंत में होने वाली परीक्षाओं को पूरा करें, नहीं तो छात्रों को इसका परिणान भुगतना होगा.   

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यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि नियमों के हिसाब से परीक्षाओं में न बैठने वाले छात्र यूनिवर्सिटी के छात्र नहीं रह जाएंगे. सर्कुलर के मुताबिक परीक्षा में न बैठने वाले छात्रों को अगले सत्र के लिए भी रजिस्टर करने नहीं दिया जाएगा और इस तरह छात्र यूनिवर्सिटी से अपनी पात्रता गंवा देंगे. 


सर्कुलर में लिखा है, "जो शोधार्थी अपनी एमफिल परीक्षा में दूसरे सत्र का कोर्स वर्क पूरा करने पर भी 5.00 सीजीपीए हासिल नहीं कर पाते हैं उनका नाम अपने आप यूनिवर्सिटी की रोल लिस्ट से हटा दिया जाएगा. इस पर यूनिवर्सिटी छात्र संघ, जो कि एक महीने से अधिक समय से फीस बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शनरत है,  का कहना है कि कम से कम यूनिवर्सिटी के 17 सेंटर ने मिलकर यह फैसला लिया है कि हम परीक्षाओं का बहिष्कार करेंगे.

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यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि मानसून सत्र के लिए सभी स्कूलों/सेंटर में एमफिल, डिसर्टेशन/पीएचडी थीसिस जमा करने और इवैल्युएशन ब्रांच को भेजने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है. छात्रों को चेताते हुए सर्कुलर में लिखा है कि अकादमिक कैलेंडर अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद द्वारा पारित है इसलिए इसे मानना अनिवार्य है. 



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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