मजदूरी करके पढ़ाई के पैसे जुटाने वाले माधव मेहनत करके बने आईएएस

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के माधव गिट्टे ने यूपीएससी परीक्षा 2019 में रैंक 210 हासिल की, इंजीनियरिंग की शिक्षा लेने वाले माधव ने अपना करियर बनाने के लिए किया कड़ा संघर्ष

मजदूरी करके पढ़ाई के पैसे जुटाने वाले माधव मेहनत करके बने आईएएस

यूपीएससी परीक्षा 2019 (UPSC 2019) में रैंक 210 हासिल करने वाले माधव गिट्टे.

नई दिल्ली:

संसाधनों के अभाव में अक्सर सपने अधूरे रह जाते हैं... इस बात को गलत साबित कर दिया है माधव गिट्टे (Madhav Gitte) ने. माधव ने यूपीएससी परीक्षा 2019 (UPSC 2019) में रैंक 210 हासिल कर आईएएस (IAS) बनने की राह पर हैं. पेशे से इंजीनियर और जज़्बे से सिविल सर्वेंट माधव का यह दूसरा प्रयास था. इससे पहले माधव ने 2018 की यूपीएससी परीक्षा में रैंक 567 हासिल की थी और फ़िलहाल वे ट्रेनिंग में हैं. 
       
हालांकि माधव अब आईएएस बनने वाले हैं लेकिन यहां तक पहुंचना उनके लिए लगभग असंभव सा था. महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में जन्मे माधव के माता-पिता किसान थे जिन पर माधव समेत उनके 5 भाई-बहनों की जिम्मेदारी थी. माधव अपने अन्य भाई - बहनों की तरह ही माता-पिता का खेती में हाथ बटांते थे. लेकिन उनके भीतर पढ़ाई करने और कुछ बनने की लालसा कभी ख़त्म नहीं हुई. 

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माधव ने अपनी 10 वीं की पढ़ाई 2004 में पूरी की, लेकिन उसी साल उनकी मां को कैंसर हो गया. कैंसर का इलाज हो गया लेकिन एक साल बाद ही उनका देहांत हो गया. मां की मौत से माधव को गहरा सदमा लगा. इसके बाद उन्होंने 11 वीं में दाखिला ले लिया. वे रोज़ 11 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर पढ़ने जाया करते और थक कर सो जाया करते थे. ग्यारहवीं कक्षा के बाद माधव को आर्थिक कारणों से एक साल का गैप लेना पड़ा. वे पैसे जुटाने के लिए खेत में काम करने लगे. 

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बारहवीं के बाद माधव ने पॉलीटेक्निक की पढ़ाई के लिए आवेदन किया लेकिन अंक कम होने के कारण उन्हें कोई सरकारी कॉलेज नहीं मिल पाया. यह माधव के लिए एक झटके के समान था. लेकिन उन्हें और आगे पढ़ना था और पढ़ने के लिए पैसों की ज़रूरत थी. उन्होंने पढ़ाई के लिए पैसे के लिए एक मजदूर के रूप में 2400 रुपये महीना कमाना शुरू कर दिया. 

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कुछ समय बाद उन्हें एक नए पॉलीटेक्निक कॉलेज के बारे में पता चला और उन्होंने वहां एडमिशन ले लिया. पहले सेमेस्टर में तो सब ठीक रहा पर अगले सेमेस्टर की फीस के लिए उन्हें अपनी ज़मीन गिरवी रखनी पड़ी. उन्होंने अपना डिप्लोमा पूरा किया और सबसे अधिक अंक लेकर कॉलेज के टॉपर बने. 

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अच्छे अंक होने के कारण माधव का दाखिला ग्रेजुएशन के लिए हो गया और ग्रेजुएशन के बाद सॉफ्टवेयर कंपनी में प्लेसमेंट भी हो गया. अब माधव को अपनी मंज़िल साफ दिखाई दे रही थी, यानी यूपीएससी. लेकिन शुरुआत में उन्हें यूपीएससी के विषय में अधिक जानकारी नहीं थी लेकिन अपने जज़्बे पर पूरा भरोसा था. अपने भरोसे, जज़्बे और मेहनत के बल पर माधव ने पहले 567 और अब 201 रैंक हासिल कर कामयाबी का परचम लहराया है.