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इम्तिहान पर इम्तिहान; लेकिन नील आर्यन बने जईई के टॉपर, जानिए कैसे

अस्पताल में बीमारी से लड़ते हुए की तैयारी और आत्मविश्वास जगाकर दी गई परीक्षा में मिली सफलता

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इम्तिहान पर इम्तिहान; लेकिन नील आर्यन बने जईई के टॉपर, जानिए कैसे
नई दिल्ली:

छात्र चाहे जितने भी मेधावी हों इम्तिहान के पहले एक टेंशन तो होता ही है और इम्तिहान अगर आईआईटी प्रवेश परीक्षा का हो तो फिर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं. अप्रैल और मई बारहवीं के साइंस के छात्रों के लिए लिहाज़ से काफी अहम होता है, क्योंकि इन्हीं दिनों उन्हें बोर्ड की परीक्षा और प्रवेश परीक्षाओं में अपनी किस्मत आज़मानी होती है. 

नील आर्यन गुप्ता भी उन छात्रों में से हैं जिन्होंने कई साल तक इस उम्मीद में तैयारी की कि उन्हें भी न सिर्फ आईआईटी में पढ़ने का मौका मिल सकेगा बल्कि JEE मेंस और एडवांस्ड में उनकी रैंकिंग भी काफी ऊपर होगी. पर आर्यन को अचानक ही एक कठिन परीक्षा का सामना करना पड़ा और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान काफी बीमार हो गए. उनकी तबीयत इतनी ख़राब थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और मैथ्स का पेपर देने वे सीधे अस्पताल से परीक्षा हॉल में पहुंचे. आर्यन को बैठने में काफी दिक़्क़त हो रही थी पर दो परीक्षाओं में किसी में तो सफल होना ही था. 

जब रिजल्ट आए तो आर्यन को मैथ्स में सौ में सौ अंक मिले. पर आर्यन  के लिए अभी अग्नि परीक्षा का लम्बा दौर बाक़ी था. बोर्ड परीक्षा के बाद भी आर्यन लगातार बीमार चल रहे थे और उनकी तबीयत बिगड़ती ही जा रही थी हालांकि डॉक्टर्स अभी ये पता नहीं लगा पाए थे उन्हें कौन सी बीमारी है. बारहवीं की बोर्ड परीक्षा के बाद अब जीईई मेंस की बारी थी. अपनी बीमारी से परेशान आर्यन पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे. फिर जब बीमारी का पता चला तो डॉक्टर्स का कहना था कि ऑपरेशन ही एक मात्र रास्ता है. 


एनडीटीवी से बातचीत में आर्यन की मां बतातीं हैं कि हमें लगा अगर ऑपरेशन करवाया तो फिर जेईई मेंस देना लगभग असंभव हो जाएगा. उनके मन में कई तरफ की आशंकाएं उठ रही थीं - कहीं आर्यन को परीक्षा ड्राप तो नहीं करनी पड़ेगी वगैरह.  फिर उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टर्स को कंसल्ट किया. पीजीआई के डॉक्टर्स ने मेंस तक ऑपरेशन टालने को हरी झंडी दे दी. पर आर्यन के लिए तकलीफ़ का दौर चलता रहा. 

आर्यन बताते हैं कि मेंस के दिन परीक्षा हॉल में उनकी तबियत बिगड़ गई और उन्हें स्टेबल होने में ही 15-20 मिनट लग गए और उनकी मेंस की परीक्षा बहुत अच्छी नहीं गई. मेंस के बाद परिवार ने ऑपरेशन करवाने का निर्णय लिया. एनडीटीवी से आर्यन बताते हैं कि ऑपरेशन के बाद उन्हें लगा कि अब उनके दर्द के दिन बीत गए पर ये उनकी ग़लत-फ़हमी साबित हुई. दिन में दो बार ड्रेसिंग होती थी जो जिसमें उन्हें काफी दर्द होता था फिर दवा खाने से झपकियां आतीं थी. 

 
neel aryan gupta jee
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आर्यन कहते हैं दर्द ने उन्हें जेईई एडवांस्ड तो भुला ही दिया था. पर परिवार ने ऑपरेशन के बाद आर्यन को ये अहसास दिलाना शुरू किया कि अब उन्हें फिर से दोबारा परीक्षा की तैयारी के लिए खुद को तैयार करना है. बैठने में मुश्किल आने के बाद भी अब आर्यन बैठने की प्रैक्टिस करने लगे ताकि कुछ पढ़ाई कर सकें. जब बैठ नहीं पाते तो लेटे हुए पढ़ते. आर्यन के टीचर्स उन्हें ईमेल पर प्रैक्टिस के लिए टेस्ट पेपर्स भेजते. इस दौरान आर्यन को ये भी अहसास हुआ कि जब वो पिछले सालों के पेपर्स सॉल्व करने बैठते हैं तो शुरुआत के पांच मिनट के बाद वो सवालों में इतने खो जाते हैं कि दर्द भूल जाते. फिर खुद को मोटीवेट करने के लिए आर्यन यूट्यूब पर वीडियो भी देखते. 

आर्यन बताते हैं कि आखिरकार जब वो जेईई एडवांस्ड देकर आए तो वे काफी खुश थे, उन्हें उम्मीद थी कि टॉप 20-30
में उन्हें जगह मिल जानने चाहिए पर जब रिजल्ट्स आया तो रैंक 10 पर नाम था- नील आर्यन गुप्ता!



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