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दिव्यांग प्रियंका ठाकुर कई चुनौतियों को पीछे छोड़ बनीं जज, दूसरों के लिए पेश की मिसाल

हिमाचल प्रदेश की दिव्यांग प्रियंका ठाकुर चर्चाओं में बनी हुई हैं. दरअसल, प्रियंका ठाकुर शारीरिक रूप से 54 प्रतिशत विकलांग हैं. उन्‍हें हिमाचल प्रदेश में न्यायिक सेवाओं के लिए चुना गया है.

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दिव्यांग प्रियंका ठाकुर कई चुनौतियों को पीछे छोड़ बनीं जज, दूसरों के लिए पेश की मिसाल

प्रियंका ठाकुर को हिमाचल प्रदेश में न्यायिक सेवा के लिए चुना गया है.

खास बातें

  1. दिव्यांग प्रियंका ठाकुर बनीं दूसरों के लिए मिसाल
  2. हिमाचल प्रदेश में प्रियंका को न्यायिक सेवा के लिए चुना गया
  3. हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से लॉ में कर रही हैं पीएचडी
नई दिल्ली:

किसी भी दिव्यांग को अपनी जिंदगी में बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. बचपन से ही उन्हें बहुत से लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ता है और इस वजह से उनको कोई जल्दी से नौकरी नहीं देता, फिर चाहे वो कितने ही टेलेंटेड क्यों न हो. इसी बीच हिमाचल प्रदेश की दिव्यांग प्रियंका ठाकुर चर्चाओं में बनी हुई हैं. दरअसल, प्रियंका ठाकुर शारीरिक रूप से 54 प्रतिशत विकलांग हैं. उन्‍हें हिमाचल प्रदेश में न्यायिक सेवाओं के लिए चुना गया है.

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द स्टेटमैन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रियंका ठाकुर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (Himachal Pradesh University) से लॉ में पीएचडी कर रही हैं और उन्हें हाल ही में हिमाचल प्रदेश में न्यायिक सेवाओं के लिए चुना गया है. प्रियंका ने अपनी एलएलबी (LLB), हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यायल (HPU) के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला (Dharamshala) से पूरी की. इसके बाद उन्होंने अपनी एलएलएम (LLM) एचपीयू शिमला (Shimla) से की. उन्होंने यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा को भी क्‍वालिफाई किया हुआ है.  


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प्रियंका, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के इंडोरा के एक छोटे से गांव वडाला की रहने वाली हैं. उनके पिता बीएसएफ के सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर हैं और मां गृहिणी हैं. वह उमंग फाउंडेशन से भी जुड़ी हुई हैं, जो विकलांगों के लिए एक लोक कल्याणकारी ट्रस्ट है. 

प्रियंका ने बताया कि उन्होंने कई घंटों तक इसके लिए पढ़ाई की है और न्यायिक सेवाओं के लिए कभी कोई ट्यूशन क्लास नहीं ली. प्रियंका ने अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और कैंपस में ''उभरते विकलांग-अनुकूल वातावरण'' को दिया. प्रियंका ने कहा, ''आमतौर पर लोग महिलाओं पर ध्यान नहीं देते और अगर वह दिव्यांग हो तो बिलकुल नहीं देते. लेकिन अगर आपके पास आत्मविश्वास है, तो आप किसी भी ऊंचाई को प्राप्त कर सकते हैं''.



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