19 साल के इस लड़के के नाम हैं दो-दो पेटेंट, ठुकरा दिया NASA का ऑफर, करना चाहता भारत का नाम रौशन

19 साल के गोपाल जी अन्‍वेषक, शोधकर्ता और मोटिवेशनल स्‍पीकर हैं. अभी तक वह केला और पेपर बायो सेल्‍स को लेकर दो पेटेंट अपने नाम कर चुके हैं, जबकि कई दूसरे प्रयोगों पर अभी वह काम कर ही रहे हैं

19 साल के इस लड़के के नाम हैं दो-दो पेटेंट, ठुकरा दिया NASA का ऑफर, करना चाहता भारत का नाम रौशन

गोपाल जी 19 साल के हैं और अभी बीटेक कर रहे हैं, लेकिन अब तक दो पेटेंट अपने नाम करा चुके हैं

नई दिल्ली:

19 साल के एक लड़के ने इतनी छोटी सी उम्र में ऐसे-ऐसे बड़े कारनामे कर दिखाए हैं जिन्‍हें सुनकर कोई भी हैरान रह जाए. हम उस लड़के की बात कर रहे हैं जिसके नाम दो-दो पेटेंट हैं और अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा उसके साथ काम करना चाहती है. लेकिन वो लड़का कहीं नहीं जाना चाहता, बल्कि उसकी तमन्‍ना में भारत में रहकर अपने वतन के लिए कुछ कर गुजरने की है. जी हां, हम यहां बात कर हरे हैं गोपाल जी (Goapl Jee) की, जो बिहार के भागलपुर जिले के एक गांव के रहने वाले हैं. 

19 साल के गोपाल जी अन्‍वेषक, शोधकर्ता और मोटिवेशनल स्‍पीकर हैं. अभी तक वह केला और पेपर बायो सेल्‍स को लेकर दो पेटेंट अपने नाम कर चुके हैं, जबकि कई दूसरे प्रयोगों पर अभी वह काम कर ही रहे हैं. यही नहीं उसे कई अंतरराष्‍ट्रीय मंचों से भी बतौर स्‍पीकर आमंत्रण मिल रहे हैं. खास बात यह है कि गोपाल जी अभी बीटेक कर रहे हैं.

लेकिन सफलता की ओर गोपाल जी की राह कभी भी आसान नहीं रही. गरीबी में पल-बढ़े गोपाल जी को जब 10वीं में इंस्‍पायर अवॉर्ड मिला तब उसने कुछ अलग करने की सोची. आपको बता दें कि बेकार पड़े केले के पत्तों से बिजली बनाने का आविष्‍कार करने के लिए ही उन्‍हें ये अवॉर्ड मिला था. उनके पिता प्रेम रंजन कुंवर मामूली किसान हैं और उनके पास अपने बेटे की प्रतिभा को आगे ले जाने के लिए पैसे नहीं थे. लेकिन गोपाल जी ने हार नहीं मानी. 21 अगस्‍त 2017 को उन्‍होंने पीएम मोदी से मुलाकात की. 

हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स ने गोपाल जी के हवाले से लिखा है, "वह मुलाकात सिर्फ 5-10 मिनट के लिए थी. उसके बाद मुझे साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी डिपार्टमेंट में भेज दिया गया, फिर वहां से मुझे अहमदाबाद स्थित नेशनल इंवोशन फाउंडेशन (NIF) भेजा गया, जहां मैंने 3-4 चीजों का आविष्‍कार किया. तभी से मुझे विदेशों से आमंत्रण मिलने लगे." 

गोपालजी ने  Goponium Alloy का आविष्‍कार भी किया है, जो अधिकतम तापमान को भी बरदाश्‍त कर सकता है. उनके मुताबिक, "अमेरिका से कुछ वैज्ञानिक भी मुझसे मिलने आए. मुझे नासा से भी ऑफर मिला, लेकिन मैं हमेशा से अपने देश में काम करना चाहता था ताकि मैं समाज को कुछ वापस दे सकूं." 

गोपाल जी कहते हैं कि मैंने जिस तरह की गरीबी देखी है, वैसे ही हालातों का सामना देश के 75 फीसदी स्‍टूडेंट भी कर रहे होंगे. उनके मुताबिक, "मेरे पिता जी किसी तरह दो वक्‍त की रोटी का इंतजाम कर पाते थे. उन्‍होंने मेरी बहन को ननिहाल छोड़ दिया क्‍योंकि हम जिस घर में रहते थे वो बहुत छोटा था." 

लेकिन आज हालात बदल चुके हैं. गोपाल जी एक डिजिटल एजुकेशन प्‍लेटफॉर्म के ब्रांड अम्‍बेस्‍डर हैं और इस नाते उन्‍हें बड़ी धनराशि मिलती है. उन्‍हें देश केअलग-अलग हिस्‍सों से बतौर मोटिवेशनल स्‍पीकर बुलाया जाता है. आपको बता दें कि रिसर्च के अलावा गोपाल जी अभी देहरादून स्थित ग्राफिक ऐरा यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे हैं. उन्‍हें हाल ही में दुबई में होने वाले एक कार्यक्रम में चीफ स्‍पीकर की हैसियत से बुलाया गया है. इसके अलावा उन्‍हें अप्रैल में होने वाले सालाना साइंस फेयर के लिए भी यूएई में आमंत्रित किया गया है. 

गोपाल जी कहते हैं, "मैं इस बात पर पूरी तरह से विश्‍वास रखता हूं क‍ि अच्‍छे काम की हमेशा सराहना होती है और कभी किसी को हार नहीं माननी चाहिए, चाहे कितनी ही मुश्किलें क्‍यों न आ जाएं."   

 
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