World University Ranking 2018: टॉप 100 में भी जगह नहीं बना सकी कोई भारतीय लॉ यूनिवर्सिटी

दुनियाभर की टॉप 10 लॉ यूनिवर्सिटी की लिस्‍ट में 4 यूनिवर्सिटी संयुक्त राज्‍य अमेरिका की, तीन यूनाइटेड किंगडम की और ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की 1-1 यूनिवर्सिटी शामिल हैं. यूनिवर्सिटीज को विभिन्‍न पैमानों जैसे पूर्णकालिक छात्रों, लिंग अनुपात, प्रति कर्मचारी छात्रों की संख्या और यूनिवर्सिटी में नामांकित अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की संख्‍या के आधार पर रैंक किया गया है.

World University Ranking 2018: टॉप 100 में भी जगह नहीं बना सकी कोई भारतीय लॉ यूनिवर्सिटी

टाइम्स हायर एजुकेशन (द) ने दुनिया भर के लॉ यूनिवर्सिटी के लिए रैंकिंग जारी की है. इस लिस्‍ट में संयुक्त राज्य अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी सबसे ऊपर है. दुनियाभर की टॉप 10 लॉ यूनिवर्सिटी की लिस्‍ट में 4 यूनिवर्सिटी संयुक्त राज्‍य अमेरिका की, तीन यूनाइटेड किंगडम की और ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की 1-1 यूनिवर्सिटी शामिल हैं. यूनिवर्सिटीज को विभिन्‍न पैमानों जैसे पूर्णकालिक छात्रों, लिंग अनुपात, प्रति कर्मचारी छात्रों की संख्या और यूनिवर्सिटी में नामांकित अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की संख्‍या के आधार पर रैंक किया गया है.

टाइम्‍स हायर एजुकेशन रैंकिग 2018 के अनुसार, टॉप 10 लॉ यूनिवर्सिटी इस प्रकार हैं:

  • ड्यूक यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • येल यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • शिकागो यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, यूनाइटेड किंगडम
  • यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफ़ोर्ड, यूनाइटेड किंगडम
  • मेलबोर्न यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया
  • यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, यूनाइटेड किंगडम
  • हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • टोरंटो यूनिवर्सिटी, कनाडा

वेबसाइट के अनुसार, हार्वर्ड को शिक्षण में कम स्कोर के कारण नौवां स्थान मिला है.

ग्लोबल रैंकिंग में लॉ यूनिवर्सिटी गायब
वैश्विक रूप से टॉप 100 लॉ यूनिवर्सिटी में कोई भी भारतीय यूनिवर्सिटी शामिल नहीं है. हालांकि, भारत में एनएलयू जैसे लॉ विश्वविद्यालयों का अपना उचित हिस्सा है, लेकिन इनमें से कोई भी वैश्विक रैंकिंग में अपनी जगह नहीं बना पाया है.

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वास्तव में, MHRD, जो पिछले दो सालों से पूरे भारत में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में NIRF रैंकिंग जारी कर रहा है, भारत में लॉ यूनिवर्सिटी को रैंक करना है. 

वैश्विक और राष्ट्रीय रैंकिंग के संदर्भ में मान्यता की कमी , देश में कानून शिक्षा की स्थिति के बारे में दर्शात है. जबकि छात्रों को सर्वोत्तम संस्थान का चयन करने में मदद करने के लिए फायदेमंद होती हैं, इतना ही नहीं रैंकिंग संस्थानों को बेहतर करनेद्व बुनियादी ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए प्रेरित करती है.
 

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