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चुनावी ब्लॉग

  • राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावों में फोन बांटने का खेल क्या है?
    हमारे वक्त की राजनीति को सिर्फ नारों से नहीं समझा जा सकता है. इतना कुछ नया हो रहा है कि उसके अच्छे या बुरे के असर के बारे में ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो रहा है. समझना मुश्किल हो रहा है कि सरकार जनता के लिए काम कर रही है या चंद उद्योगपतियों के लिए.
  • हड़बड़ी में गड़बड़ी...
    मध्य प्रदेश चुनावों में प्रचार के दौरान राहुल गांधी की फिसली जुबान उन पर मुसीबत का सबब बनती दिख रही है. राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की एक अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का दावा कर दिया है.
  • मोदी के बाद योगी, बढ़ता जा रहा प्रभाव
    बीजेपी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तेजी के साथ दूसरे सबसे बड़े चुनाव प्रचारक के रूप में उभर रहे हैं. गुजरात, त्रिपुरा और कर्नाटक में योगी आदित्यनाथ से चुनाव प्रचार कराने के बाद अब बीजेपी ने तीन हिंदी भाषी राज्यों के चुनावों में भी योगी आदित्यनाथ को आगे कर दिया है. बीजेपी के मुताबिक योगी आदित्यनाथ पीएम मोदी के चुनाव मैदान में कूदने से पहले जमीन तैयार करेंगे.
  • 2019 का सेमीफाइनल...
    पांच राज्यों में दिसंबर में चुनाव होने वाले हैं. ये राज्य हैं मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम. इन सभी राज्यों में लोकसभा की 83 सीटें हैं. सीटों की स्थिति देखें तो कुछ इस तरह से है. मध्यप्रदेश-29, राजस्थान -25, छत्तीसगढ़-11, तेलंगाना-17 और मिजोरम में 1 लोकसभा की सीट है.
  • एक-दूसरे के गढ़ों को भेदने में जुटीं कांग्रेस और बीजेपी
    मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों राज्यों की सियासत सिंधिया घराने के इर्द-गिर्द घूमती है. जहां मध्यप्रदेश में यह घराना बीजेपी और कांग्रेस के बीच बंटा है तो वहीं राजस्थान में बीजेपी के साथ है. इनके गढ़ों में सेंध लगाने की कोशिश होती रहती है. आज इसका बीड़ा राहुल गांधी और अमित शाह दोनों ने उठाया.
  • क्या चुनाव आयोग भाजपा का चुनाव प्रभारी बन गया है?
    इस चुनाव आयोग पर कोई कैसे भरोसा करे. ख़ुद ही बताता है कि साढ़े बारह बजे प्रेस कांफ्रेंस है. फिर इसे तीन बजे कर देता है. एक बजे प्रधानमंत्री की सभा है. क्या इस वजह से ऐसा किया गया कि रैली की कवरेज या उसमें की जाने वाली घोषणा प्रभावित न हो?
  • हाथ में नहीं हाथी...
    मध्य प्रदेश में मायावती ने 22 सीटों पर अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी साथ ही छत्तीसगढ़ में मायावती ने अजित जोगी से हाथ मिलाया है. इस पर कई लोगों को काफी आश्चर्य हुआ कि ऐसा कैसे हो गया और लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि विपक्ष का महागठबंधन टूट गया, यह गठबंधन नहीं लठबंधन है.
  • मायावती को क्यों आया गुस्सा?
    बीएसपी प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को करारा झटका दिया है. मायावती ने छत्तीसगढ़ के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कांग्रेस से गठबंधन करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस की रस्सी जल गई पर बल नहीं गए.
  • कर्नाटक में जीत के सबके अपने-अपने दावे...
    कर्नाटक में वोटों की गिनती मंगलवार सुबह आठ बजे शुरू हो जाएगी. दोपहर होते-होते साफ हो जाएगा कि कर्नाटक किसका होगा? लेकिन एक्ज़िट पोल के रुझानों ने सबको उलझा दिया. 75 प्रतिशत एक्जिट पोल कहते हैं कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी जबकि 25 प्रतिशत एक्जिट पोल कांग्रेस के आगे रहने की भविष्यवाणी कर रहे हैं.
  • जब नेहरू ने मुझे फोन किया, नेहरू-व्हाट्सऐप की एक खोज के लिए
    रात नेहरू का फोन आया था. अपनी किसी किताब की समीक्षा की बात कर रहे थे. मैं काफी गुस्से में था. उनसे कहने लगा कि आप भगत सिंह से मिलने नहीं गए, पर मुझसे मिलने क्यों नहीं आए. नेहरू ने कहा कि तुमसे मिलता ज़रूर लेकिन तुम ट्रेन से हिन्दुस्तान नहीं आ रहे थे.
  • कर्नाटक बना कुरुक्षेत्र...
    कर्नाटक में दलित और आदिवासी सीटों की संख्या कुल 224 में से 51 है जिनमें 36 दलित और 15 आदिवासी सीटें हैं. 36 दलित सीटों में से कांग्रेस के पास 17, जेडीएस के पास 10 और बीजेपी के पास 6 सीट है. जबकि 15 आदिवासी सीटों में कांग्रेस के पास 9, जेडीएस और बीजेपी के पास एक-एक सीट है.
  • नेहरू से लड़ते-लड़ते अपने भाषणों में हारने लगे हैं नरेंद्र मोदी
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के लिए चुनाव जीतना बड़ी बात नहीं है. वह जितने चुनाव जीत चुके हैं या जिता चुके हैं, यह रिकॉर्ड भी लंबे समय तक रहेगा. कर्नाटक की जीत कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन आज प्रधानमंत्री को अपनी हार देखनी चाहिए. वह किस तरह अपने भाषणों में हारते जा रहे हैं.
  • इतिहास से खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं पीएम मोदी?
    आवश्यकता है ऐसे किसी भी व्यक्ति कि जो नेहरू और भगत सिंह पर गलत-सलत जानकारी रखता हो, या ऐसी जानकारी रखता हो जिसे गलत तरीके से पेश किया जा सके. ऐसे किसी योग्य को तुरंत उन लोगों से संपर्क करना चाहिए जो प्रधानमंत्री के भाषण के लिए रिसर्च करते हैं या फिर सीधे प्रधानमंत्री से ही संपर्क करना चाहिए. जरूरी है कि योग्य व्यक्ति इतिहास के बारे में कुछ नहीं जानता हो या फिर वही जानता हो जो इतिहास में ही न हो.
  • कर्नाटक चुनाव : मठ और जाति हैं हावी
    कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटों में से BJP ने 68 सीटें लिंगायत समुदाय के लोगों को दी हैं, वहीं कांग्रेस ने 49 और JDS ने 41 सीटें इस समुदाय को दी हैं. जबकि दूसरी बड़ी जाति वोक्कालिगा पर JDS की पकड़ है, क्योंकि देवेगौड़ा इसी जाति से आते हैं. JDS ने वोक्कालिगा समुदाय के 55 लोगों को टिकट दिया है, तो कांग्रेस ने 46 और BJP ने 38 सीटें इस समुदाय को दी हैं.
  • कर्नाटक चुनाव पर मेरी अंतिम राय, मेरे हिसाब से यह होने वाला है...
    मेरा मानना है कि कर्नाटक में BJP का जीतना देश के लिए अच्छा होगा. जीत के बाद प्रधानमंत्री दिल्ली आएंगे और कुछ काम करेंगे. अगर हार गए, तो वह अभी से उस राज्य की तरफ चले जाएंगे, जहां चुनाव होने वाले होंगे.
  • राहुल गांधी का पीएम बनने का सपना
    राहुल गांधी ने एक तरह से ऐलान कर दिया है कि 2019 में वे प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं. हालांकि उनके इस बयान का बीजेपी नेता काफी मखौल बना रहे हैं. मगर सबसे बडा सवाल है कि क्या यह संभव है और यदि यह संभव करना है तो कांग्रेस को अकेले 100 से अधिक सीटें जीतनी होंगी.
  • राजनीति की नई चिढ़ाती-बरगलाती भाषा...
    कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चुनाव बाद कांग्रेस PPP पार्टी बन जाएगी, तो मुझे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की तर्ज पर लगा कि वह विपक्षियों के बीच गठबंधन की बात कर रहे हैं. लेकिन बाद में उन्होंने खुद इसका अर्थ बताया कि कांग्रेस 'पंजाब, पुदुच्चेरी और परिवार' की पार्टी रह जाएगी. दो दिन के बाद राहुल गांधी ने जेडीएस का नया अर्थ दिया - जनता दल संघ परिवार. निःसंदेह, जनता को इससे मजा आ रहा है.
  • विपक्ष के पास राहुल गांधी का विकल्प क्या है...?
    राहुल गांधी या उनकी मां सोनिया गांधी पर यह इल्ज़ाम नहीं लगाया जा सकता कि उनमें प्रधानमंत्री बनने की चाहत है. 2004 में UPA को मिले बहुमत के बाद जब कई दलों ने अपने समर्थन की चिट्ठी सोनिया गांधी के नाम कर दी थी और जब BJP की सुषमा स्वराज और उमा भारती जैसी नेता सोनिया के प्रधानमंत्री बनने पर बाल मुंडाने की बात कर रही थीं, तब सोनिया ने यह पद छोड़कर इस पूरी राजनीति को अंगूठा और आईना दिखा दिया था. उस एक मास्टरस्ट्रोक के साथ सोनिया का कद काफी ऊंचा हो गया था. 2009 में जब कांग्रेस दोबारा सरकार बनाने की स्थिति में आई, तो उत्साही कांग्रेसियों ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की मांग की. तब राहुल ने बड़ी शालीनता से यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया. यह शील BJP के बड़े नेताओं ने भी नहीं दिखाया. आडवाणी मज़ाक में 'PM इन वेटिंग' कहे जाने लगे और अंततः नई पीढ़ी के महत्वाकांक्षी नेताओं द्वारा मार्गदर्शक मंडल में निर्वासित कर दिए गए.
  • राहुल गांधी के PM बनने की बात से इतनी हलचल क्यों...?
    अब राहुल गांधी देश में जहां-जहां जाएंगे और बोलेंगे, जनता उनसे यही उम्मीद लगाएगी कि वह देश के लिए भविष्य की योजनाएं भी बताएं. हालांकि किसानों और बेरोज़गारों की चिंताओं को वह पहले से उठा रहे हैं, लेकिन अब किसानों और बेरोज़गारों के लिए मांग उठाने का वक्त नहीं बचा. उन्हें अब वैसी योजनाओं का खाका लेकर आना पड़ेगा, जिनमें इन दोनों वर्गों की समस्याओं का समाधान हो.
  • मध्य एशिया से आया मोधुल हाउंड कुत्ता कांग्रेस को कैसे सिखाएगा देशभक्ति
    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कांग्रेस को उत्तरी कर्नाटक में पाए जाने वाले मुधोल हाउंड कुत्ते से देशभक्ति सीखनी चाहिए, जिसे भारतीय सेना में शामिल किया गया है. राहुल गांधी का नाम तो नहीं लिया, मगर JNU में राहुल ही गए थे. वहां लगाए गए जिस नारे का ज़िक्र प्रधानमंत्री ने किया, उसकी सत्यता का आज तक पता नहीं. कौन लगाकर गए, आज तक नहीं पकड़े गए.
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