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चुनावी ब्लॉग

  • 'न्यूज़ छपती है कि नहीं लोकतंत्र में सिर्फ यही एक चीज़ नहीं है' - मोदी
    प्रधानमंत्री ने यह बात इंडियन एक्सप्रेस के रवीश तिवारी और राजमकल झा से कही है. यह इंटरव्यू 12 मई को छपा है. इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री इंडियन एक्सप्रेस को कई बार पत्रकारिता को लेकर लेक्चर देते हैं. एक्सप्रेस के पत्रकार काउंटर सवाल नहीं करते हैं. ऐसा लगता है कि उन्होंने सुनाने के लिए एक्सप्रेस को बुलाया है. वे यह नहीं बताते हैं कि एक्सप्रेस की कौन सी ख़बर ग़लत थी मगर यह बताना नहीं भूलते हैं कि कौन सी ख़बर उसने नहीं की. किसी प्रधानमंत्री का यह कहना है कि न्यूज़ का छपना ही लोकतंत्र में एक मात्र काम नहीं है, डरावना है. आपको डरना चाहिए कि फिर जनता कितने अंधेरे में होगी.
  • समय के साथ-साथ कितने बदले हैं राहुल गांधी?
    2014 से लेकर 2019 के बीच राहुल गांधी के अंदर बहुत बदलाव आया है. इस चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने कई इंटरव्यू दिए है. शुक्रवार को राहुल गांधी ने एनडीटीवी के रवीश कुमार को इंटरव्यू दिया. मध्य प्रदेश के सुजालपुर में यह इंटरव्यू हुआ. इंटरव्यू के लिए मैं भी रवीश कुमार के साथ ट्रेवल कर रहा था. हम सबके मन में एक सवाल यह भी था क्या राहुल गांधी लाइव इंटरव्यू देंगे? समय के मुताबिक राहुल गांधी सुजालपुर पहुंचते है फिर कार्यक्रम शुरू होता है. स्टेज पर कमल नाथ समेत कई बड़े नेता मौजूद थे. मेरी नजर राहुल गांधी पर थी, यह पहला मौका था जब मैं राहुल गांधी को करीब से देख रहा था. राहुल के हावभाव पर मेरी नजर थी. मैं राहुल गांधी का आत्मविश्वास को मापने में लगा हुआ था.
  • त्रिशंकु लोकसभा की आशंका को लेकर जुगाड़ में जुटे विपक्षी दल
    अभी लोकसभा चुनाव के दो चरण होने बाकी हैं. 23 मई को क्या होगा, यह कोई नहीं जानता, लेकिन कई विपक्षी पार्टियों ने सरकार बनाने के लिए अभी से जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है, पर इन्हें एक डर है. वह यह कि त्रिशंकु लोकसभा के हालात में बीजेपी अगर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी तो कहीं राष्ट्रपति उसे सरकार बनाने के लिए न बुला लें. ऐसा 1996 में हो चुका है जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाया था.
  • अब चुनाव राजीव गांधी के नाम पर? चोर का जवाब भ्रष्टाचारी से...
    पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर बोफोर्स में लगे भ्रष्टाचार के आरोप पीएम नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर उछाल दिए. उन्होंने कांग्रेस को चुनौती दी है कि दम है तो बाकी बचे दो चरणों में इसी मुद्दे पर चुनाव लड़ कर देख ले. पीएम मोदी ने कहा कि अभी पंजाब में, दिल्ली में, भोपाल में वोटिंग होनी है. कांग्रेस चाहे तो राजीव गांधी के नाम पर चुनाव लड़ कर दिखा दे. और अब से कुछ देर पहले दिल्ली में एक रैली में राहुल गांधी ने पीएम को जवाब दिया है. आपको बता दूं कि राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर एक बताने के पीएम मोदी के बयान से कांग्रेस पहले से ही भड़की हुई है. पार्टी ने आज इसकी शिकायत चुनाव आयोग को भी कर दी. कांग्रेस का कहना है कि यह अपमानजनक भाषा है.
  • फिसलता हुआ दिख रहा बीजेपी का
    सत्तारूढ़ दल जीत के लिए राष्ट्रवाद की भावना को भुनाकर बैलेट बॉक्स को अपने पक्ष में भरने की कोशिश कर रहा है. इजराइल में बेंजामिन नेतन्याहू और तुर्की में रेसेप तईप एर्दोगन इस राजनीतिक कला में वर्षों से महारथ हासिल किए हैं. जबकि इस साल मतदाताओं की बढ़ती बेरुखी के संकेत साफ तौर पर मिले हैं.
  • क्या चुनाव आयोग प्रधानमंत्री मोदी आयोग बन गया है?
    चुनाव आयोग के सामने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ आचार संहिता के उल्लंघन के पांच मामले आए. यह भी शर्मनाक मामला है कि भारत के प्रधानमंत्री आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं. आयोग ने चेतावनी दी थी कि सेना के नाम पर वोट नहीं मांगा जाएगा. धार्मिक पहचान और उन्माद के नाम पर वोट नहीं मांगा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के दबाव में शुरू में तीन चार नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई तो हुई लेकिन जब अमित शाह और नरेंद्र मोदी का नाम आया तो आयोग के हाथ कांपते से लगते हैं.
  • बिहार में अपने नारे से पीछे क्यों हट रहे हैं मोदी?
    बिहार में ऐसा कुछ हुआ है क्या कि 5 दिन के भीतर प्रधानमंत्री मोदी की सभा के अंत में लगने वाले नारे से वंदे मातरम का नारा ही ग़ायब हो गया. क्या ऐसा नीतीश कुमार की असहजता को देखकर किया गया, अगर नहीं तो इसका प्रमाण 4 मई को बगहा की रैली में मिल जाएगा जब प्रधानमंत्री और नीतीश कुमार दोनों साझा रैली करेंगे.
  • क्या भारत में भी दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं होना चाहिए...?
    अक्षय कुमार भारतीय नागरिक नहीं हैं. यह बात मुंबई में वोटिंग के दौरान सामने आई. कई सितारों ने वोट दिए. उनकी पत्नी ट्विंकल ने भी वोट डाला. लेकिन इस सूची में अक्षय कुमार नहीं थे, क्योंकि उन्होंने कनाडा की नागरिकता ले रखी है. लेकिन क्या नागरिकता न होने से अक्षय कुछ कम भारतीय हो जाते हैं...? इत्तफाक से पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार ऐसी फिल्में कीं, जिनका वास्ता देशभक्ति से है. बल्कि कुछ अतिरिक्त राजभक्ति दिखाते हुए उन्होंने बिल्कुल सरकारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने वाली 'टॉयलेट - एक प्रेम कथा' और 'पैडमैन' जैसी फिल्में भी कीं. और तो और, ऐन चुनावों के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री का इंटरव्यू किया और देसी चुटकुले भी साझा किए.
  • प्रधानमंत्री के खिलाफ शिकायतों पर कार्रवाई में चुनाव आयोग की देरी क्यों?
    शांतिपूर्ण मतदान के बीच अशांतिपूर्ण मतदान आज भी मौजूद हैं. चार चरण के मतदान इस तरह बीत गए. तीन चरण के अभी बाकी हैं. चुनाव आयोग एक तरफ गिरिराज सिंह से लेकर मेनका गांधी के बयानों को लेकर चेतावनी तो जारी कर रहा है मगर प्रधानमंत्री के 9 अप्रैल के बयान पर उसकी कार्रवाई का कुछ पता नहीं चल रहा है. 20 दिन हो गए. पुलवामा और ऑपरेशन बालाकोट के नाम पर पहली बार वोट डालने जा रहे वोटरों से अपील करने वाले बयान को लेकर अब विपक्ष भी पूछने लगा है कि कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है.
  • क्या अक्षय कुमार का प्रधानमंत्री मोदी का इंटरव्यू पेड न्यूज़ नहीं है?
    अक्षय कुमार ने प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लिया. लेकिन इंटरव्यू के लिए कैमरा किसका था? तकनीकि सहयोग किसका था? क्या इंटरव्यू के अंत में किसी प्रोडक्शन कंपनी का क्रेडिट रोल आपने देखा? इन सवालों पर बात नहीं हो रही है. क्योंकि इन पर बात होगी जो जवाबदेही तय होगी. सोचिए ग़ैर राजनीति के नाम पर आप दर्शकों के भरोसे के साथ इतनी बड़ी राजनीति हो गई.
  • आम जनता को पॉलीटीशियनों पर भरोसा नहीं रहा, वादे करते हैं, पर पूरे नहीं होते : आतिशी
    पूर्वी दिल्‍ली लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी ने आतिशी को उम्‍मीदवार बनाया है. उनका मुकाबला बीजेपी के गौतम गंभीर और कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली के साथ है. आतिशी जोरशोर से चुनाव प्रचार में लगी हैं और उन्‍होंने कल्‍याणपुरी इलाके में रोड शो किया. इस दौरान उन्‍होंने NDTV के रवीश कुमार से बात भी की.
  • प्रियंका गांधी क्या वायनाड या अमेठी से लड़ेंगी लोकसभा चुनाव?
    प्रियंका गांधी वाड्रा के संसद में पहुंचने की संभावना अभी भी बनी हुई है. उनके बनारस से नहीं लड़ने के पीछे कई तरह के तर्क दिए गए... मायावती की न कहने, बड़े नेताओं के खिलाफ गांधी परिवार के किसी सदस्य के न लड़ने की परंपरा की दुहाई.. जैसी बातें भी कही गईं. यह भी कहा गया कि प्रियंका को अमेठी और मायावती पर ध्यान देने की जरूरत है. मगर इसका मतलब यह नहीं है कि प्रियंका सांसद नहीं बन सकती हैं.
  • आखिर नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी की जंग से पीछे क्यों हटीं प्रियंका गांधी वाड्रा...
    अब यह कांग्रेस की आदत बन गई है कि वह सबसे बुरे हालात में पहुंचकर रुक जाती है. ताज़ातरीन उदाहरण है - कर्तव्यपरायण पुत्री ने परिवार के फैसले के सामने सिर झुका दिया है.
  • लोकसभा चुनाव के इस माहौल में कुछ गैर-राजनीतिक बात 
    वैसे आम वाले सवाल ने प्रसून जोशी के उस सवाल को तगड़ा कंपटीशन दिया है. प्रसून जोशी ने कहा था कि आपमें फकीरी कहां से आती है. अक्षय कुमार को पता था कि वे फकीर का नहीं, प्रधानमंत्री का इंटरव्यू करने आ रहे हैं. एक व्यक्ति का इंटरव्यू करने जा रहे हैं. फिर भी देखना चाहिए कि प्रसून जोशी और अक्षय कुमार के सवालों में क्या अंतर है. किसके सवाल ज़्यादा राजनीतिक हैं किसके ज्यादा आध्यात्मिक हैं. ये आप तय करेंगे. प्रसून ने मोदी मे फकीरी देखा तो अक्षय उनमें सैनिक और सन्यासी देखकर कंफ्यूज हो गए.
  • फिरोजाबाद में चाचा शिवपाल यादव और भतीजे अक्षय यादव के सियासी मैदान का हाल
    चूड़ियों की नगरी फिरोजाबाद में सबसे बड़े राजनीतिक परिवार का मनमुटाव यहां सियासी जंग में तब्दील हो चुका है. हर गली हर नुक्कड़ पर चाचा शिवपाल यादव और भतीजे अक्षय यादव की ही चर्चा चल रही है.
  • फर्रुखाबाद की सियासत पर आलू और मोदी
    उनसे जब सियासी हाल जानने की कोशिश की तो मुस्कुरा दिए बोले हम लोगों को खेती किसानी से फुरसत कहा लेकिन जब मैंने कहा कि लड़ाई किसमें है तो हंसते बोले बीजेपी और गठबंधन में... हमने कहा आप लोगों का वोट किसे जा रहा है...
  • फर्रुखाबाद की ढहती विरासत और सियासी समीकरण का हाल
    लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार सलमान खुर्शीद के घर कायम गंज जाते हुए रास्ते में कई मकबरे दिखे तो शहर के इतिहास की जानकारी लेने की उत्सुकता बढ़ी. फर्रुखाबाद में गुरुगांव मंदिर के ठीक पीछे नवाब मोहम्मद खां बंगश का मकबरा नजर आया.
  • भाजपा-कांग्रेस हारती है न जीतती है, जीतता ज़िले का कुलीन/दंबग है...
    चुनाव में भाग लेने के साथ-साथ उसे समझने की प्रक्रिया भी चलती रहनी चाहिए. हमारा सारा ध्यान सरकार बदलने और बनवाने पर रहता है लेकिन थोड़ा सा ध्यान हमें उन कारणों पर भी देना चाहिए जो राजनीति को तय करते हैं. जिनके कारण राजनीतिक बदलाव असंभव सा हो गया है.
  • यूपी में 74 सीटें अमित शाह ही जीत लेंगे तो बाकी वहां की राजनीति के शाह क्या करेंगे
    उत्तर प्रदेश में 73 सीटों में से एक कम नहीं होगा. 72 की जगह 74 हो सकता है. यह बयान अमित शाह का है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का इंडियन एक्सप्रेस में लंबा इंटरव्यू छपा है. उनके इस दावे से यही निष्कर्ष लगता है कि बसपा और सपा का गठबंधन समाप्त हो चुका है. इस बार फिर बसपा को शून्य आने वाला है और सपा अपने परिवार के नेताओं को ही जिता सकेगी.
  • इटावा की 'घोड़ा चाय' की दुकान और सियासी चर्चा
    मैंने भी कुल्हड़ में चाय की चुस्की लेते पूछा कि जिस चाय की दुकान पर इतनी भीड़ होती हो वहां चुनावी चर्चा न होती हो ये कैसे मुमकिन है. अनिल कुमार गुप्ता बोले कि वो खुद लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं और भारत में नकली चुनाव के नाम से एक किताब भी लिख चुके हैं. उन्होंने इटावा में चाय पिलाने में ही क्रांति नहीं की है बल्कि 1975 में इमरजेंसी के दौरान सरकार से जब बगावत की तो 33 धाराऐं लगाकर इनको जेल में भी डाला गया. अब अनिल कुमार गुप्ता लोकतंत्र सेनानी के तौर पर जाने जाते हैं और चाय की केतली धीमी आंच पर रखते हुए वो गर्व से बताते हैं कि सपा सरकार की शुरू की गई सेनानी पेंशन के बीस हजार रुपये भी हर महीने मिलती है.
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