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  • रवीश कुमार का ब्‍लॉग: ग़ैर जाटवों को समेटती बसपा के मुश्किल रास्ते
    यह लड़का वहाँ खड़ा था जहाँ खड़े होने की जगह नहीं थी. दो टाँग वालों की भीड़ में वह एक टाँग पर खड़ा था. अपने नेता मायावती को एक झलक देखने की वह बेताबी क्या होती है, न तो इसे फ़िल्म स्टार की दीवानगी से समझ सकते हैं और न ही क्रिकेट स्टार की दीवानगी से.
  • काल्पनिक डर और हमारे अंदर के 'रावण'
    भारत में, और विशेषकर उत्तर भारत के राज्यों में चुनावी प्रचार एक तरह से फ्री-स्टाइल कुश्ती की तर्ज पर होता है जिसमें कोई भी नियम या बंदिश नहीं होती. भले ही भारत का चुनाव आयोग अपने तमाम आदेशों से चुनाव प्रचार के वक्तव्यों, टिप्पणियों और भाषणों के लिए दिशा निर्देश निर्धारित करता रहा हो, लेकिन नेता हैं कि मानते ही नहीं. उनके लिए प्रचार का एक-एक मौका अपनी बात को अतिरंजित कर कहने के लिए इस्तेमाल किया जाता है भले ही इससे किसी की संवेदनाओं पर चोट क्यों न पहुंचती हो.
  • वरुण गांधी की अनदेखी से हो सकती है बीजेपी में बड़ी बगावत
    एक सप्ताह पहले पांच सांसद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिले और उनसे स्टार प्रचारकों की सूची में वरुण गांधी का नाम जोड़ने को कहा क्योंकि उनका नाम न होने से आम जनता में गलत संदेश जा रहा था. पांच सांसदों के दल में शामिल रहे हाथरस से बीजेपी सांसद राजेश दिवाकर का कहना है, "मुझे 2009 में टिकट भैयाजी ने ही दिलवाया था. उन्होंने 2009 में मेरी दावेदारी का समर्थन किया था. वह मेरे नेता हैं और मेरे उनसे पारिवारिक संबंध हैं. भैयाजी के अपमान से मेरे क्षेत्र के लोगों में गलत संदेश जा रहा था.
  • आम आदमी पार्टी का बज सकता है पंजाब में डंका
    यदि आप पंजाब के गांव-देहात से गुजरें तो आपको गांव की चौड़ी सड़कें नजर आएंगी. कुछ मकान तो दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी को भी मात दे रहे हैं. बेहतर बिजली और पानी के बेहतर इंतजाम से लगेगा कि वर्तमान बादल सरकार को सत्ता से बाहर करने की बात जनता क्यों करेगी. आप इन चीजों को देखकर अकाली दल के तीसरी बार सत्ता में आने पर शर्त लगाएंगे. लेकिन आप अपना दांव हार सकते हैं. सच्चाई इससे कुछ हटकर है. यह ऐसी सच्चाई है जो अकाली दल को सत्ता से दूर कर सकती है. यहां तक कि इस राज्य के दो पार्टी सिस्टम के चलन को पूरी तरह से बदल सकती है.
  • जाट..भारत की राजनीति की बेचैन आत्मा!
    सांप्रदायिक जूनून समुदायों को बदल देता है. हठी बना देता है. कोई भी पक्ष आसानी से अपनी बात से पीछे नहीं हटता है. पश्चिम उत्तर प्रदेश के जाटों का यह भोलापन मुझे बहुत पसंद आया कि वे अपने ग़ुस्से की बात को कबूल कर रहे हैं.
  • कांग्रेस के साथ गठबंधन अखिलेश के लिए बड़े फायदे का सौदा नहीं दिखता
    अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने सपा-कांग्रेस गठबंधन का हिस्‍सा भले ही अजित सिंह की पार्टी राष्‍ट्रीय लोक दल(रालोद) को नहीं बनाया लेकिन पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में बीजेपी से नाराज जाट समुदाय अपने समर्थन पर पुनर्विचार कर रहे हैं.
  • विधानसभा चुनाव 2017 : ओपिनियन या एग्ज़िट पोल पर ओपिनियन...
    सिद्ध होता है कि चुनाव सर्वेक्षण अपनी संपूर्ण सतर्कता की स्थिति में भी अविश्वसनीय ही हैं. हालांकि ऐसे अनुमानों को तरह तरह से वैज्ञानिकता और सैम्पल के साइज़ का तर्क देकर विश्वसनीय दिखा दिया जाता है.
  • बीजेपी अपने इस विज्ञापन से ख़ुद जाल में फंस सकती है....
    मंगलवार सुबह-सुबह बीजेपी उत्तरप्रदेश के फेसबुक पेज पर पार्टी के इस प्रचार पोस्टर को देखकर चुनावी विज्ञापनों की चालाकी पकड़ने का मन कर गया. इस पोस्टर में जो आंकड़े दिए गए हैं वे तथ्य के हिसाब से सही हैं मगर जिस रिपोर्ट के आधार पर दिए गए हैं, उसी में और भी ऐसे तथ्य हैं जो बीजेपी पर भी भारी पड़ सकते हैं.
  • अखिलेश यादव-राहुल गांधी की नई दोस्ती से उठते नए सवाल
    कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच चुनावपूर्व समझौता हाल के दशकों में सबसे आश्चर्यजनक और महत्‍वपूर्ण राजनीतिक गठबंधनों में एक है.
  • नोटबंदी का चुनावों के चेहरे-मोहरे पर और उसकी सेहत पर क्या प्रभाव पड़ा
    इन पंचरंगी चुनावों में फिलहाल सबसे गाढ़ा और चटख रंग है उत्तर प्रदेश का, और इसके बाद बारी आती है पंजाब की. लोकसभा में बहुत कम सांसद भेजने वाले उत्तराखंड (5), गोवा (2) और मणिपुर (2) इसमें महज कदमताल भर कर रहे हैं, हालांकि 'आप' की उपस्थिति के कारण गोवा के बारे में थोड़ा-बहुत सुनाई पड़ जाता है.
  • पंजाब और गोवा में आम आदमी पार्टी की ताकत का यह है राज...
    पंजाब में एक तरफ शिरोमणि अकाली दल के बादल परिवार की राजनीतिक जड़ें गहरी हैं वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी अपनी पहचान बना रही है. सवाल यह है कि अरविंद केजरीवाल ने दो राज्यों में ही चुनाव लड़ने का फैसला क्यों लिया?
  • उत्तर प्रदेश में गठबंधन की खिचड़ी हमेशा कड़वी साबित हुई...
    उत्तर प्रदेश में एक बार फिर चुनावी गठबंधन की खिचड़ी पकाने की तैयारी चल रही है. हालांकि इस प्रदेश के पिछले 25 सालों के इतिहास पर नजर डालें तो यह साफ हो जाता है कि यहां गठबंधन की खिचड़ी हमेशा कड़वी ही साबित हुई है. गठबंधन चुनाव पूर्व किया गया हो या फिर बाद में, अल्प समय बाद ही नतीजे दरार के रूप में ही सामने आए हैं.
  • यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन से किसे क्या मिलेगा?
    यह प्रदेश में एक दशक से भी अधिक समय के बाद किन्हीं दो बड़े राजनीतिक दलों के बीच चुनावी गठबंधन है और ख़ास बात यह है कि इसकी घोषणा होने से पहले कांग्रेस ने प्रदेश की सपा सरकार को ही लपेटते हुए आक्रामक तौर पर अपना जनसंपर्क और सभा कार्यक्रम शुरू कर दिया था.
  • पंचर साइकिल संग कांग्रेस, परिवारवाद संग बीजेपी...
    दरअसल भारतीय राजनीति में आदर्श और विचारधारा एक तमाशा है. संगठन और कार्यकर्ता सबसे बड़ा मिथक. जनता को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता. राजनीतिक दल इंटरनेट की तरह ओपन प्लेटफॉर्म हैं. कोई भी बीजेपी से आईपी अड्रेस खरीद कर अपनी वेबसाइट बना सकता है. दूसरे दलों के साथ भी यही है.
  • क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति भी बदल डालेंगे अखिलेश यादव...?
    अखिलेश सपा की राजनीति के साथ ही यूपी की राजनीति भी बदल सकते हैं... यही नहीं, कांग्रेस के साथ गठबंधन कर अखिलेश ने एक ऐसी राजनैतिक पहल की है, जिसके बाद बीजेपी को अपनी रणनीति बदलनी ही होगी...
  • 'कैप्टन' अमरिंदर की टीम में सिद्धू, लेकिन सुनेंगे सिर्फ 'सेलेक्टर' राहुल की?
    न ढ़ोल बजा, न नगाड़ा और न ही भांगड़ा हुआ. यहां तक कि जो तस्वीर सामने आयी उसमें राहुल और सिद्धू के अलावा कोई तीसरा नेता भी नज़र नहीं आया. राहुल गांधी के घर बिना किसी तामझाम के नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस की पंजाब टीम में शामिल हो गए. उस टीम में जिसकी बागडोर कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों में है.
  • केरल में बदल गई गद्दी, लेकिन भगवा खिड़की भी खुली
    कर्नाटक में बीजेपी इसी तरह बढ़ी थी, जैसे वह केरल में बढ़ रही है। हालांकि फर्क यह है कि केरल में कांग्रेस को अधिकतर मुसलमानों और ईसाइयों के वोट मिलते हैं। उन्हीं के ज्यादातर संगठन उसके मोर्चे में हैं। कांग्रेस की हिन्दू वोटों में हिस्सेदारी वाममोर्चा से कम है।
  • पश्चिम बंगाल में ममता की शानदार जीत और वाममोर्चे की करारी हार के मायने
    बहरहाल, इन नतीजों का कांग्रेस से भी अधिक बुरा असर वाममोर्चे पर होगा और प्रकाश करात के बाद माकपा की कमान संभालने वाले सीताराम येचुरी के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। एक और बात यह कि कम से कम बंगाल के इन नतीजों से 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को कुछ लाभ शायद ही मिले।
  • असम का चुनाव परिणाम, और कांग्रेस की हार के 10 प्रमुख कारण...
    असम विधानसभा चुनाव के नतीजों में अपेक्षा के अनुरूप कांग्रेस की हार हुई है और 15 वर्ष से मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई चौथी पारी जीतने में नाकाम रहे। परिणाम आने के बाद अब गोगोई की हार के 10 प्रमुख कारण कुछ इस प्रकार समझे जा सकते हैं...
  • क्या चुनावी तुलनाओं के प्रतिशोध में केरल को सोमालिया तक ले गए प्रधानमंत्री...?
    चुनावी राजनीति में थोड़ी किरकिरी तो सबकी हो जाती है। इसी बहाने हम जैसे लोगों को केरल की जनजाति और सोमालिया का अध्ययन करने का मौका मिला, उसके लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया। कई बार किसी का नहीं जानना किसी और के जानने का मार्ग प्रशस्त कर देता है।
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