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  • बाबा का ब्लॉग : बिहार में अगर 'पूरा होता' महागठबंधन, तो बीजेपी का होता और बुरा हाल
    बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू,कांग्रेस और आरजेडी के महागठबंधन को अन्य पार्टियों ने 19 सीटों पर नुकसान पहुंचाया। बहुजन समाज पार्टी जिसकी बिहार चुनाव में चर्चा भी नहीं हुई, उसने महागठबंधन को सबसे अधिक 11 सीटों पर जीतने से रोक दिया।
  • प्राइम टाइम इंट्रो : किन बातों से तय हुई बिहार चुनाव में हार या जीत?
    भारत में एक अखिल भारतीय कारण आयोग होना चाहिए जो चुनावों के बाद हार और जीत के कारणों की समीक्षा करें और कम से कम दस कारणों को आधिकारिक रूप से जारी करे। ऐसे किसी कारण आयोग के अभाव में किसी भी चुनाव के बाद हार और जीत के कारणों की समीक्षा को लीपापोती कहने वालों से मुझे बहुत तकलीफ होती है।
  • बस चलता तो चुनाव आयोग से पहले नतीजे बता देता...
    नमस्कार, मैं रवीश कुमार, बस चलता तो चुनाव आयोग से पहले नतीजे बता देता। बहुत कोशिश की वो नंबर बता दूं जो आने वाला है। एग्जिट पोल ने ऐसे ऐसे नंबर दिये कि समझ ही नहीं आया कि एलजेबरा की कोचिंग करूं या कैलकुलस की। किसी न किसी का तो सही हो ही जाएगा।
  • देखने लायक होंगी ओपिनियन पोल वालों की भाव-भंगिमाएं
    राजनीतिक घटनाओं के विश्लेषण का रिवाज़ कुछ कम होता जा रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव की घटनाओं का तथ्यपरक विश्लेषण तो दुर्लभ ही हो गया।
  • बिहार चुनाव पर Exit Poll : इस चाणक्य से तो चंद्रगुप्त भी डर गए होंगे - रवीश कुमार
    शायद नाम चाणक्य का है, इसलिए भी दहशत होती होगी। चाणक्य ने कहा है तो सही हो सकता है। एग्जिट पोल की दुनिया में चाणक्य ने ऐसा नंबर दिया है कि भाजपा के भीतर हर दूसरे दावेदार के मन में चंद्रगुप्त के ख़्वाब आ रहे होंगे।
  • ऐ पाकिस्तान, बिहार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को अब तेरा ही सहारा ह - रवीश कुमार
    मैं पाकिस्तान नहीं गया हूं। इसलिए गूगलागमन के ज़रिये पता लगाने का प्रयास किया कि पाकिस्तान में दिवाली कौन मनाता है। सारे सर्च यही बता रहे थे कि पाकिस्तान में हिन्दू दिवाली मनाते हैं। अमित शाह के तर्क के हिसाब से बीजेपी के हारने के बाद क्या उन्हें दिवाली नहीं मनानी चाहिए।
  • मैं बताता हूं बिहार के विधानसभा चुनाव में कौन जीतेगा - रवीश कुमार
    आप क्या चाहते हैं, क्या होता दिख रहा है, देखने वाला कौन है और क्या होगा इन चार बातों की कसौटी पर किसी भी चुनावी भविष्यवाणी को परखा जाना चाहिए। बिहार की भविष्यवाणी को लेकर लोग दो खेमों में बंट गए हैं।
  • अखिलेश शर्मा : क्या बदलाव की ओर बढ़ रहा है बिहार?
    मुज़फ़्फ़रपुर में राजवाड़ा के पोलिंग बूथ से कुछ दूर रे-बैन का चश्मा लगाए एक बुज़ुर्ग काफी देर से मुझे देख रहे थे। उनकी झिझक समझते हुए मैं खुद ही उनके पास गया। फिर बातों का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि थमा ही नहीं।
  • अखिलेश शर्मा की कलम से : अभी खत्म नहीं हुआ बिहार चुनाव
    पहले दो चरण के मतदान के बाद नीतीश कुमार के शपथग्रहण की तैयारियाँ शुरू कर दीं गई हैं। विश्लेषक भी इस आकलन से सहमत नजर आ रहे हैं। लेकिन क्या ज़मीनी हकीकत वाकई ऐसी है?
  • रवीश कुमार : इस वक्त बिहार चुनाव से भी अहम हैं एर्नाकुलम के पंचायत चुनाव...
    केरल में जो हो रहा है, वह सामान्य घटना नहीं है। कंपनियां अगर कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत किए जाने वाले कार्यों के बदले पंचायतों पर कब्ज़ा कर लें तो क्या होगा। कंपनी के प्रभुत्व वाले कॉरपोरेट के साथ राजनीतिक दल कैसे बर्ताव करेंगे।
  • रवीश कुमार : सैय्यद अयान इमाम मुस्लिम नहीं सिर्फ खिलाड़ी है...
    अयान पटना ज़िला शेरपुर की महिला वॉलीबॉल टीम की एक मात्र मुस्लिम खिलाड़ी है। अंडर- 19 की टीम में सारी खिलाड़ी उससे बड़ी हैं, जिन्हें अयान दीदी कहती है।
  • उमाशंकर सिंह : वोट काटने में जुटे नेताओं को परवाह नहीं गंगा के कटाव की
    खरही के ऊंचे पौधों के बीच संकरी कच्ची सड़क पर जब हम आगे बढ़े तो हमें भाड़े की बोलेरो गाड़ी किसी वरदान से कम नहीं लगी। आमतौर पर शहरों को जोड़ने वाली सड़क की शानदार हालत मुख्य सड़क से हटते ही थोड़ी पतली हो जाती है। ग्रामीण सड़कों की हालत चमचमाते हाईवेज़ से उलट है।
  • बिहार : यादव या भूमिहार!
    हमारे राजनीतिक दलों में गजब की क्षमता है। कभी वे सबको हिन्दू-मुसलमान खेमे में गोलबंद कर देते हैं तो कभी अलग-अलग जातियों को बांट देते हैं। बिहार चुनाव ने पूरे जनमत को जाति के फ्रेम में कैद कर दिया है।
  • बिहार : क़स्बों का शहर होना और शहर का कस्बा बने रहना
    बिहार के कस्बाई चरित्र के शहरों में आकांक्षाएं खौल रही हैं, उनका भाप इन बेतरतीब शहरों में निकल नहीं पा रहा है। जैसे तसले के भीतर चावल का पानी तो खौल रहा है लेकिन ढक्कन के कारण एक बार में बाहर नहीं आ पा रहा है।
  • दिखी बदलाव की बयार, अगर साइकिल न होती तो न होता यह बिहार
    बिहार में बाइक-सवार लड़कियां कम दिखती हैं, मगर गली-गली में साइकिल-सवार लड़कियों को देख लगता है कि काफी कुछ बदला है। हमारी राजनीति शायद लड़कियों के बदलाव को बदलना नहीं मानती, मगर आप किसी भी सड़क पर झुंड में या अकेले साइकिल चलाती लड़कियों को देख गदगद हो सकते हैं।
  • बिहार का स्टिंग - राजनीति की पिक्चर का पूरा सच
    ऐसे स्टिंग तो बानगी हैं, और पूरी पिक्चर तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर काले धन को लेकर गठित समिति द्वारा राजनेता-माफिया-अपराध के गठजोड़ के विस्तृत विवरण के माध्यम से पहले ही उपलब्ध है।
  • आरा का औरंगज़ेब और उसका दोस्त राहुल
    पीले टी शर्ट में मोहम्मद औरंगजेब है और हल्के नीले रंग वाला राहुल। औरंगज़ेब कम बोलता है और राहुल बहुत अच्छा बोलता है। राहुल खुल कर औरंगजेब से ठिठोली कर लेता है और औरंगज़ेब राहुल की ठिठोली पर चुपके से हंस लेता है।
  • सुधीर जैन : बिहार चुनाव के 'ग्रीन रूम' की अटकलें
    बिहार में चुनावी मंच सजा है। मंच से अलग वह कमरा भी जरूर होगा जहां पात्र सजते-संवरते हैं और डायलॉग की प्रेक्टिस की जाती है। राजनीति में भी ग्रीन रूम होता है। वहां बस एक फर्क दिखता है कि पात्रों से ज्यादा कथा लेखकों और चुनावी विद्वानों का प्रभुत्व रहता है। वे ही तय करते हैं कि चुनावी मंच पर क्या बोला जाना है?
  • सुशील महापात्रा की कलम से : बिहार के चुनावी शोर में महंगाई का मुद्दा गायब
    बिहार के चुनाव में रोज नेताओं के भाषण और बयानबाजी हैडलाइन बन रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि नेताओं के भाषण बिहार का भविष्य तय करने वाले हैं। हर मुद्दे पर नेता बात कर रहे हैं लेकिन जिस मुद्दे पर सबसे ज्यादा बात करना चाहिए वह मुद्दा चुनावी सरगर्मियां से गायब है। यह मुद्दा है महंगाई का।
  • निधि का नोट : सही नीयत के इंतजार में बिहार...
    बिहार में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं और इसी सरगरमी के बीच मुझे यहां एक बार फिर जाने का मौका मिल गया। पिछले साल लोकसभा चुनावों में पंजाब की बजाय बिहार को चुना था। एक उत्सुक्ता थी उस राज्य को समझने की जिसे कई मापदंडों में पिछड़ा हुआ बताया गया।
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